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झांसी में बोले थे सीडीएस रावत... जन-जन तक पहुंचाई जाए रानी की गौरवगाथा
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झांसी। अभी 19 दिन पहले ही चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत झांसी आए थे। उन्होंने रानी की जयंती पर 19 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यहां सेना द्वारा आयोजित राष्ट्र रक्षा समर्पण पर्व में हिस्सा लिया था। इस अवसर पर उन्होंने कहा था कि रानी की गौरव गाथाओं का वर्णन समय की मांग है। महज 03.24 मिनट के संबोधन में वे बुंदेलों से गहरा नाता जोड़ गए थे। बुधवार को उनके निधन से झांसी में भी लोग शोकमग्न नजर आए।
किले की तलहटी में आयोजित राष्ट्र रक्षा समर्पण पर्व में पहला संबोधन सीडीएस बिपिन रावत का रहा था। ‘शुभ संध्या’ बोलकर उन्होंने सभी का अभिवादन किया था। सीडीएस ने कहा था कि रानी का अदम्य साहस और वीरता, बुंदेले ही नहीं, बल्कि समस्त देशवासियों की एकता और अखंडता की भावना को उजागर करती है। रानी के शौर्य को याद करते हुए उन्होंने कहा था कि दांतों में घोड़े की लगाम थामकर तलवार से अंग्रेजों पर वार करते हुए रानी ने साहस और बलिदान का अचंभित करने वाला नजारा इतिहास के पन्नों में रचा है। इस नजारे को उनकी पीठ पर बंधा नन्हा पुत्र इतिहास के पन्नों में समाता देखता रहा था। महारानी ने नारी शक्ति को साहस की प्रेरणा दी थी। साथ ही उन्होंने कहा था कि झांसी की धरती नेशन फर्स्ट और तिरंगे के सम्मान का महत्वपूर्ण संदेश देती है। बुंदेलखंड की इस भूमि को रानी ने विशेष पहचान दिलाई है। इस दौरान उन्होंने कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता ‘खूब लड़ी मर्दानी...’ की कुछ पंक्तियां भी सुनाईं थीं।
सीडीएस जनरल रावत पहली बार झांसी आए थे और एक बार में ही यहां के लोगों से गहरा नाता जोड़ गए थे। बुधवार को तमिलनाडु में हुए हादसे में उनकी मौत सूचना आने पर झांसी में भी लोग शोकमग्न नजर आए और उनके 19 नवंबर के दौरे को याद करते रहे।
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तीन महीने पहले दतिया में किया था अनुष्ठान
झांसी। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत तीन महीने पहले दतिया आए थे। दतिया में उन्होंने पीतांबरा पीठ में दर्शन और अनुष्ठान किया था। तकरीबन छह-सात घंटे वे मंदिर में रहे थे। इस दौरान उन्होंने वन खंडेश्वर महादेव मंदिर पर जलाभिषेक भी किया था। उनका ये पूरा दौरा बेहद गोपनीय रखा गया था।
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किले की तलहटी में आयोजित राष्ट्र रक्षा समर्पण पर्व में पहला संबोधन सीडीएस बिपिन रावत का रहा था। ‘शुभ संध्या’ बोलकर उन्होंने सभी का अभिवादन किया था। सीडीएस ने कहा था कि रानी का अदम्य साहस और वीरता, बुंदेले ही नहीं, बल्कि समस्त देशवासियों की एकता और अखंडता की भावना को उजागर करती है। रानी के शौर्य को याद करते हुए उन्होंने कहा था कि दांतों में घोड़े की लगाम थामकर तलवार से अंग्रेजों पर वार करते हुए रानी ने साहस और बलिदान का अचंभित करने वाला नजारा इतिहास के पन्नों में रचा है। इस नजारे को उनकी पीठ पर बंधा नन्हा पुत्र इतिहास के पन्नों में समाता देखता रहा था। महारानी ने नारी शक्ति को साहस की प्रेरणा दी थी। साथ ही उन्होंने कहा था कि झांसी की धरती नेशन फर्स्ट और तिरंगे के सम्मान का महत्वपूर्ण संदेश देती है। बुंदेलखंड की इस भूमि को रानी ने विशेष पहचान दिलाई है। इस दौरान उन्होंने कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता ‘खूब लड़ी मर्दानी...’ की कुछ पंक्तियां भी सुनाईं थीं।
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सीडीएस जनरल रावत पहली बार झांसी आए थे और एक बार में ही यहां के लोगों से गहरा नाता जोड़ गए थे। बुधवार को तमिलनाडु में हुए हादसे में उनकी मौत सूचना आने पर झांसी में भी लोग शोकमग्न नजर आए और उनके 19 नवंबर के दौरे को याद करते रहे।
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तीन महीने पहले दतिया में किया था अनुष्ठान
झांसी। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत तीन महीने पहले दतिया आए थे। दतिया में उन्होंने पीतांबरा पीठ में दर्शन और अनुष्ठान किया था। तकरीबन छह-सात घंटे वे मंदिर में रहे थे। इस दौरान उन्होंने वन खंडेश्वर महादेव मंदिर पर जलाभिषेक भी किया था। उनका ये पूरा दौरा बेहद गोपनीय रखा गया था।