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सावधान: बरसात के मौसम में बड़ा खतरा बन जाते सांप, तीन साल में 107 की मौत

Wed, 28 Jul 2021 12:54 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jul 2021 12:54 AM IST
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Caution: Snakes become a big danger in rainy season, 107 died in three years
झांसी। बरसात के मौसम में झांसी और ललितपुर में सर्पदंश का खतरा मंडराने लगता है। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों से सांप के डसने की घटनाएं तेजी से सामने आने लगती हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले तीन साल के भीतर झांसी और ललितपुर जिले में सर्पदंश से 107 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। मरने वालों में बड़ी तादाद ऐसे लोगों की है, जो झाड़फूंक के चक्कर में फंसकर समय से अस्पताल नहीं पहुंचे।
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बुंदेलखंड में कोबरा और करैत प्रजाति के सांप बहुतायत में पाए जाते हैं। जून और जुलाई का महीना इन दोनों प्रजातियों के सांपों का प्रजनन काल होता है। इस अवधि में सांप हमलावर हो जाते हैं। यही वजह है कि इन दिनों में सर्पदंश की घटनाएं तेजी से बढ़ जाती हैं। ग्रामीण इलाकों से इसके सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। अनजाने में पैर पड़ जाने पर ये काट लेते हैं। जमीन पर सोते वक्त, खेत पर काम करते समय लोग इनका शिकार हो जाते हैं। पिछले तीन साल के दरम्यान झांसी और ललितपुर जनपद में 107 लोग सर्पदंश का शिकार होकर अपनी जान गवां चुके हैं। साल 2019-20 में 42, 2020-21 में 47 और साल 2021-22 में अब तक 18 लोग सर्पदंश का शिकार होकर मौत की नींद सो चुके हैं।
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खास बात ये है कि मरने वालों में अस्सी फीसदी वे लोग हैं, जो समय रहते अस्पताल नहीं पहुंचे। बल्कि, सांप के डसने के बाद वे झाड़-फूंक में उलझ गए। हालत गंभीर होने के बाद उन्होंने अस्पताल का दरवाजा खटखटाया। इलाज में हुई देरी उनकी जान पर भारी पड़ी।
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मेडिकल में इलाज की पूरी है व्यवस्था
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर (फिजीशियन) डॉ. जकी सिद्दीकी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में सर्पदंश के इलाज की पर्याप्त व्यवस्था है। बशर्ते मरीज समय रहते अस्पताल पहुंच जाए। लेकिन, 80 फीसदी मरीज पहले झाड़फूंक या देसी इलाज कराते हैं और जब हालत ज्यादा बिगड़ जाती है, तब अस्पताल की ओर रुख करते हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल में सर्पदंश के इलाज में उपयोग किए जाने वाले इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। आवश्यकता पड़ने पर मरीज को वेंटीलेटर पर ले जाया जाता है। एक सप्ताह में मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाता है।

चाल लाख के मुआवजे का है प्रावधान
झांसी। सर्पदंश को राज्य आपदा की श्रेणी में शामिल किया जा चुका है। सांप के डसने से मौत होने पर सरकार की ओर से मृतक के आश्रितों को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। इसके अलावा सर्पदंश से भैंस की मौत होने पर 30 हजार, गाय की मौत पर 25 हजार और बकरी के मरने पर तीन हजार रुपये की आर्थिक सहायता पशुपालक को प्रदान की जाती है। लेकिन, इसके लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण सर्पदंश होना जरूरी होता है।
रहें सावधान, रखें ये ध्यान...
- बारिश के मौसम में बाहर जाने पर जूते पहनें। पहनने से पहले जूतों को अच्छी तरह से फटकार लें।
- सांप नजर आने पर पास न जाएं, उसे निकल जाने दें
- सांप के डसने पर घबराएं नहीं, आराम से लेट जाएं, कपड़े ढीले कर दें, चूड़ी, कड़े, घड़ी, अंगूठी जैसे चीजों को शरीर से निकाल दें।
- घाव के साथ छेड़छाड़ न करें, दौड़ने-भागने से जहर शरीर में तेजी से फैलता है।
- सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति को शराब या नशे की कोई चीज न दें।
- झाड़ - फूंक से बचें, पीड़ित को जल्द अस्पताल ले जाएं।
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