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गांव से जयकारे लगाते हुए निकले थे, मंजिल से चंद किलोमीटर दूर मातम में बदलीं खुशियां
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झांसी। पंडोखर से चिरगांव के छिरोना गांव के लिए श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए निकले थे। चारों तरफ खुशियों से भरा माहौल था। जवारे विसर्जित करके सभी लोग मनौती पूरी करने वाले थे। मगर मंजिल से चंद किलोमीटर दूर रहते हुए दुर्घटना हो जाने से सारी खुशियां मातम में बदल गईं।
पंडोखर निवासी लोगों ने बताया कि हादसे का शिकार हुए कई लोग व्रत रखे हुए थे। अनिल ने तो नवरात्र के पूरे नौ दिन का उपवास रखा था। बच्चे के जन्म की मन्नत पूरी करने के लिए सभी चिरगांव के छिरोना गांव के लिए जवारे विजर्सन को पंडोखर से निकले। सुबह सात बजे लगभग 35 से 40 लोग दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर छिरोना के लिए निकल पड़े। ट्रैक्टर में सभी लोग गाते-बजाते और जयकारे लगाते हुए चले आ रहे थे। एक ट्रैक्टर आगे होने की वजह से छिरोना पहुंच भी गया मगर दूसरा ट्रैक्टर मंजिल से चंद किलोमीटर दूर हादसे का शिकार हो गया। दुर्घटना की खबर सुनकर पहले वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार लोग भी घटनास्थल पर पहुंच गए। सभी को सीएचसी चिरगांव ले जाया गया मगर वहां पहुंचने से पहले ही 11 लोगों की सांसें थम चुकी थीं। एक हादसे ने खुशियों को मातम में बदलकर रख दिया।
हादसे के एक घंटे बाद तक नहीं मिली मदद
झांसी। मुन्नीदेवी के बेटे पवन ने आरोप लगाया है कि हादसे के एक घंटे बाद तक कोई मदद नहीं मिली। बोला कि घायलों को ऑक्सीजन मिल जाती तो कुछ लोगों की जान बच सकती थी। एंबुलेंस भी देर से पहुंची। ऐसे में घायलों को अस्पताल देर से पहुंचाया जा सका।
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पंडोखर निवासी लोगों ने बताया कि हादसे का शिकार हुए कई लोग व्रत रखे हुए थे। अनिल ने तो नवरात्र के पूरे नौ दिन का उपवास रखा था। बच्चे के जन्म की मन्नत पूरी करने के लिए सभी चिरगांव के छिरोना गांव के लिए जवारे विजर्सन को पंडोखर से निकले। सुबह सात बजे लगभग 35 से 40 लोग दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर छिरोना के लिए निकल पड़े। ट्रैक्टर में सभी लोग गाते-बजाते और जयकारे लगाते हुए चले आ रहे थे। एक ट्रैक्टर आगे होने की वजह से छिरोना पहुंच भी गया मगर दूसरा ट्रैक्टर मंजिल से चंद किलोमीटर दूर हादसे का शिकार हो गया। दुर्घटना की खबर सुनकर पहले वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार लोग भी घटनास्थल पर पहुंच गए। सभी को सीएचसी चिरगांव ले जाया गया मगर वहां पहुंचने से पहले ही 11 लोगों की सांसें थम चुकी थीं। एक हादसे ने खुशियों को मातम में बदलकर रख दिया।
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हादसे के एक घंटे बाद तक नहीं मिली मदद
झांसी। मुन्नीदेवी के बेटे पवन ने आरोप लगाया है कि हादसे के एक घंटे बाद तक कोई मदद नहीं मिली। बोला कि घायलों को ऑक्सीजन मिल जाती तो कुछ लोगों की जान बच सकती थी। एंबुलेंस भी देर से पहुंची। ऐसे में घायलों को अस्पताल देर से पहुंचाया जा सका।
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