{"_id":"615b55a98ebc3e62931b095e","slug":"burning-garbage-and-moving-vehicles-spoiled-the-climate-of-the-metropolis-aqi-reached-128-jhansi-news-jhs205897131","type":"story","status":"publish","title_hn":"जलता कूड़ा और बढ़ते वाहनों ने बिगाड़ी महानगर की आबोहवा, 128 तक पहुंचा एक्यूआई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जलता कूड़ा और बढ़ते वाहनों ने बिगाड़ी महानगर की आबोहवा, 128 तक पहुंचा एक्यूआई
विज्ञापन
झांसी। हरी-भरी अपनी झांसी की आबोहवा बिगड़ती जा रही है। महानगर में स्मार्ट सिटी के तहत पांच स्थानों पर लगाए गए सेंसरों ने वायु गुणवत्ता की खतरनाक स्थिति की ओर इशारा किया है। महानगर में जगह-जगह जलते कूड़े और सड़कों पर बढ़ती वाहनों की तादाद से वायु गुणवत्ता सूचकांक संवेदनशील श्रेणी में पहुंच चुका है। जबकि चार माह पहले इस इंडेक्स का स्तर 100 के करीब था।
देश और प्रदेश के बड़े शहरों की तुलना में झांसी को शुद्ध आबोहवा के लिए काफी जाना जाता है। मगर अब यहां भी प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। अमूमन दीपावली के आसपास महानगरों में प्रदूषण का स्तर बढ़ता हैै लेकिन, इस दफे दीपावली से पहले ही वातावरण में खतरनाक गैसों के घुलने का प्रतिशत बढ़ गया।
अभी तक झांसी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) अमूमन 51-100 के बीच रहता था लेकिन, कुछ माह पहले लगाए गए स्मार्ट सिटी के सेंसर बताते हैं कि वातावरण में हानिकारक धुएं की उपस्थिति से एक्यूआई बढ़कर 128 तक पहुंच चुका है। वातावरण के लिहाज से इसे संवेदनशील माना जाता है। इसके बाद का वातावरण हानिकारक होता है।
विज्ञापन
हवा की गुणवत्ता खासतौर से घुलनशील तत्वों के पैदा होने की वजह से खराब हो रही है। यह खासतौर से डीजल एवं पेट्रोल के जलने की वजह से पैदा होती है। इसी तरह जगह-जगह कूडे़े में आग लगा दी जाती है। इसकी वजह से भी कार्बन मोनो ऑक्साइड एवं सल्फर जैसी गैस वातावरण में पैदा होती हैं। वातावरण में इसके अधिक होने से सांस लेने में परेशानी के साथ ही आंखों में जलन एवं उससे पानी आने की समस्याएं आम हो जाती हैं।
--------------
यह है गैसों की स्थिति
पीएम-2.5 - 33.25 माइक्रो प्रति क्यूबिक मीटर
सल्फर डाइऑक्साइड- 38.532 माइक्रोग्राम
कार्बन मोनो ऑक्साइड- .624 मिलीग्राम प्रति क्यूबिक मीटर
-------------
एक्यूआई की स्थिति
0-50 - उत्तम
51- 100- आंशिक दूषित
101-150- संवेदनशील
151-200 - हानिकारक
201-300- अति हानिकारक
---------------
पांच जगह लगे हैं सेंसर
वातावरण की गुणवत्ता मापने को महानगर में पांच स्थानों पर यह विशेष सेंसर लगाए गए हैं। यह सेंसर इलाइट चौराहा, बीकेडी चौराहा, मिनर्वा चौराहा, मेडिकल बाईपास तिराहा एवं मंडी बस स्टैंड के पास लगाए गए हैं। इनकी निगरानी स्मार्ट सिटी मिशन के कमांड सेंटर के जरिए की जा रही है।
मेडिकल बाईपास का इलाका सबसे प्रदूषित
मेडिकल बाईपास इलाके के आसपास सबसे अधिक हवा खराब पाई गई। यहां कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रेट, ऑक्साइड जैसे अन्य अवयय सामान्य से अधिक पाए गए। सेंसर वाले स्थानों में मिनर्वा चौराहे के आसपास का वातावरण अन्य के मुकाबले साफ पाया गया। बीकेडी चौराहा, बस स्टैंड एवं इलाइट चौराहे के पास भी वातावरण में साफ नहीं पाया गया।
महानगर के वातावरण की निगरानी के लिए ही स्मार्ट सिटी से सेंसर लगवाए गए हैं। इसकी नियमित निगरानी कराई जा रही है। मानक के मुताबिक जहां वायु की गुणवत्ता खराब मिलेगी, उसे रोकने के लिए कदम भी उठाए जाएंगे। आम लोगों में जागरूकता के लिए इसे प्रदूषण से आजादी थीम के साथ मुहिम भी शुरू की गई है।
शादाब असलम
अपर नगर आयुक्त एवं अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी
स्मार्ट सिटी मिशन
विज्ञापन
देश और प्रदेश के बड़े शहरों की तुलना में झांसी को शुद्ध आबोहवा के लिए काफी जाना जाता है। मगर अब यहां भी प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। अमूमन दीपावली के आसपास महानगरों में प्रदूषण का स्तर बढ़ता हैै लेकिन, इस दफे दीपावली से पहले ही वातावरण में खतरनाक गैसों के घुलने का प्रतिशत बढ़ गया।
विज्ञापन
अभी तक झांसी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) अमूमन 51-100 के बीच रहता था लेकिन, कुछ माह पहले लगाए गए स्मार्ट सिटी के सेंसर बताते हैं कि वातावरण में हानिकारक धुएं की उपस्थिति से एक्यूआई बढ़कर 128 तक पहुंच चुका है। वातावरण के लिहाज से इसे संवेदनशील माना जाता है। इसके बाद का वातावरण हानिकारक होता है।
विज्ञापन
हवा की गुणवत्ता खासतौर से घुलनशील तत्वों के पैदा होने की वजह से खराब हो रही है। यह खासतौर से डीजल एवं पेट्रोल के जलने की वजह से पैदा होती है। इसी तरह जगह-जगह कूडे़े में आग लगा दी जाती है। इसकी वजह से भी कार्बन मोनो ऑक्साइड एवं सल्फर जैसी गैस वातावरण में पैदा होती हैं। वातावरण में इसके अधिक होने से सांस लेने में परेशानी के साथ ही आंखों में जलन एवं उससे पानी आने की समस्याएं आम हो जाती हैं।
--------------
यह है गैसों की स्थिति
पीएम-2.5 - 33.25 माइक्रो प्रति क्यूबिक मीटर
सल्फर डाइऑक्साइड- 38.532 माइक्रोग्राम
कार्बन मोनो ऑक्साइड- .624 मिलीग्राम प्रति क्यूबिक मीटर
-------------
एक्यूआई की स्थिति
0-50 - उत्तम
51- 100- आंशिक दूषित
101-150- संवेदनशील
151-200 - हानिकारक
201-300- अति हानिकारक
---------------
पांच जगह लगे हैं सेंसर
वातावरण की गुणवत्ता मापने को महानगर में पांच स्थानों पर यह विशेष सेंसर लगाए गए हैं। यह सेंसर इलाइट चौराहा, बीकेडी चौराहा, मिनर्वा चौराहा, मेडिकल बाईपास तिराहा एवं मंडी बस स्टैंड के पास लगाए गए हैं। इनकी निगरानी स्मार्ट सिटी मिशन के कमांड सेंटर के जरिए की जा रही है।
मेडिकल बाईपास का इलाका सबसे प्रदूषित
मेडिकल बाईपास इलाके के आसपास सबसे अधिक हवा खराब पाई गई। यहां कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रेट, ऑक्साइड जैसे अन्य अवयय सामान्य से अधिक पाए गए। सेंसर वाले स्थानों में मिनर्वा चौराहे के आसपास का वातावरण अन्य के मुकाबले साफ पाया गया। बीकेडी चौराहा, बस स्टैंड एवं इलाइट चौराहे के पास भी वातावरण में साफ नहीं पाया गया।
महानगर के वातावरण की निगरानी के लिए ही स्मार्ट सिटी से सेंसर लगवाए गए हैं। इसकी नियमित निगरानी कराई जा रही है। मानक के मुताबिक जहां वायु की गुणवत्ता खराब मिलेगी, उसे रोकने के लिए कदम भी उठाए जाएंगे। आम लोगों में जागरूकता के लिए इसे प्रदूषण से आजादी थीम के साथ मुहिम भी शुरू की गई है।
शादाब असलम
अपर नगर आयुक्त एवं अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी
स्मार्ट सिटी मिशन