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Jhansi News: गर्मी में सूख रहे बुंदेलखंड के बांध... पांच में सिंचाई तक के लिए पानी नहीं
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। लगातार पड़ रही भीषण गर्मी से बुंदेलखंड में बांधों का जलस्तर तेजी से घट रहा है। हालात यह हैं कि झांसी मंडल के 26 बड़े बांध में पांच बांधों में सिंचाई के लिए बिल्कुल पानी नहीं बचा है। जबकि आठ बांधों में महज पांच फीसदी से भी कम सिंचाई का पानी है। अगर मानसून सामान्य नहीं रहा तो रबी सीजन के लिए सिंचाई का पानी मिल पाना भी मुश्किल होगा।
झांसी मंडल में कुल 26 बड़े बांध हैं। इनमें से 13 बांध झांसी में और शेष 13 बांध ललितपुर में हैं। दोनों जगहों में रबी की फसल की सिंचाई बांधों में स्टोर पानी से ही होती है। बुंदेलखंड में पिछले करीब दो माह से तापमान 40-49 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। ऐसे में यहां पेयजल की मांग में इजाफा हो गया। इसके लिए बांधों से अतिरिक्त पानी को पीने के लिए छोड़ना पड़ा। वहीं, जनपद के तालाबों को भरने के लिए माताटीला बांध के गेट भी खोले गए।
इसके चलते बांध का जलस्तर तेजी से घट रहा है। माताटीला बांध में पेयजल के लिए सुरक्षित रखे पानी को छोड़ दिया जाए तो इसमें सिर्फ पांच फीसदी सिंचाई का पानी ही बचा है। यही हाल अन्य दूसरे बांधों का है। यहां भी सिंचाई के लिए रखा जाने वाला पानी न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है।
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हालात यह हैं माताटीला समेत बंडई आदि बांधाें में सिंचाई के लिए 10 फीसदी से कम पानी बचा है। जबकि खपरार, सपरार, पथरई, शहजाद, लहचूरा बांध में अब सिंचाई के लिए नाममात्र का ही पानी बचा हुआ है। अगर ऐसे ही हालात रहे तो रबी सीजन में इनसे सिंचाई का पानी भी नहीं दिया जा सकेगा। सिंचाई अफसरों को उम्मीद है कि मानसून के सामान्य रहने पर इन बांधों में आवश्यकता के मुताबिक पानी भर लिया जाएगा। माताटीला बांध के एक्सईएन पंकज सिंह का कहना है कि मानसून आने पर बांध में पर्याप्त पानी स्टोर हो जाएगा।
इनसेट
बांध सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता (प्रतिशत में) माताटीला बांध 5.66 जामनी बांध 2.53 सजनम 8.06
रोहिणी 00
उटारी 00 जमरार 00
डोंगरी 00 खपरार 00 सपरार 4.21 पहाड़ी 4.53 पथरई 0.88 सिजार 2.64 कुरार 4.14
(स्थिति - 18 जून 2024 तक)
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इनसेट
बारह नहर प्रणालियों के जरिये होती है सिंचाई
झांसी और ललितपुर में रबी सीजन के दौरान कुल 12 नहर प्रणालियों के जरिये किसानों को पानी दिया जाता है। इनमें बेतवा समेत सजनाम नहर प्रणाली, रोहिणी नहर, उटारी नहर, लोअर रोहिणी नहर, पहूंज नहर, रानीपुर नहर, पथरई नहर, सिजार नहर, लखेरी नहर के जरिये पानी मिलता है। झांसी और ललितपुर में करीब 80 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित किया जाता है।
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झांसी। लगातार पड़ रही भीषण गर्मी से बुंदेलखंड में बांधों का जलस्तर तेजी से घट रहा है। हालात यह हैं कि झांसी मंडल के 26 बड़े बांध में पांच बांधों में सिंचाई के लिए बिल्कुल पानी नहीं बचा है। जबकि आठ बांधों में महज पांच फीसदी से भी कम सिंचाई का पानी है। अगर मानसून सामान्य नहीं रहा तो रबी सीजन के लिए सिंचाई का पानी मिल पाना भी मुश्किल होगा।
झांसी मंडल में कुल 26 बड़े बांध हैं। इनमें से 13 बांध झांसी में और शेष 13 बांध ललितपुर में हैं। दोनों जगहों में रबी की फसल की सिंचाई बांधों में स्टोर पानी से ही होती है। बुंदेलखंड में पिछले करीब दो माह से तापमान 40-49 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। ऐसे में यहां पेयजल की मांग में इजाफा हो गया। इसके लिए बांधों से अतिरिक्त पानी को पीने के लिए छोड़ना पड़ा। वहीं, जनपद के तालाबों को भरने के लिए माताटीला बांध के गेट भी खोले गए।
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इसके चलते बांध का जलस्तर तेजी से घट रहा है। माताटीला बांध में पेयजल के लिए सुरक्षित रखे पानी को छोड़ दिया जाए तो इसमें सिर्फ पांच फीसदी सिंचाई का पानी ही बचा है। यही हाल अन्य दूसरे बांधों का है। यहां भी सिंचाई के लिए रखा जाने वाला पानी न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है।
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हालात यह हैं माताटीला समेत बंडई आदि बांधाें में सिंचाई के लिए 10 फीसदी से कम पानी बचा है। जबकि खपरार, सपरार, पथरई, शहजाद, लहचूरा बांध में अब सिंचाई के लिए नाममात्र का ही पानी बचा हुआ है। अगर ऐसे ही हालात रहे तो रबी सीजन में इनसे सिंचाई का पानी भी नहीं दिया जा सकेगा। सिंचाई अफसरों को उम्मीद है कि मानसून के सामान्य रहने पर इन बांधों में आवश्यकता के मुताबिक पानी भर लिया जाएगा। माताटीला बांध के एक्सईएन पंकज सिंह का कहना है कि मानसून आने पर बांध में पर्याप्त पानी स्टोर हो जाएगा।
इनसेट
बांध सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता (प्रतिशत में) माताटीला बांध 5.66 जामनी बांध 2.53 सजनम 8.06
रोहिणी 00
उटारी 00 जमरार 00
डोंगरी 00 खपरार 00 सपरार 4.21 पहाड़ी 4.53 पथरई 0.88 सिजार 2.64 कुरार 4.14
(स्थिति - 18 जून 2024 तक)
इनसेट
बारह नहर प्रणालियों के जरिये होती है सिंचाई
झांसी और ललितपुर में रबी सीजन के दौरान कुल 12 नहर प्रणालियों के जरिये किसानों को पानी दिया जाता है। इनमें बेतवा समेत सजनाम नहर प्रणाली, रोहिणी नहर, उटारी नहर, लोअर रोहिणी नहर, पहूंज नहर, रानीपुर नहर, पथरई नहर, सिजार नहर, लखेरी नहर के जरिये पानी मिलता है। झांसी और ललितपुर में करीब 80 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित किया जाता है।