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घूस लेने पर बीयू कर्मचारी निलंबित
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 08 Dec 2017 01:45 AM IST
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- फोटो : demo
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के वरिष्ठ सहायक गजेंद्र सिंह यादव को सत्यापन के बदले घूस लेने के आरोपों पर कुलसचिव सीपी तिवारी ने निलंबित कर दिया है। राजभवन ने विश्वविद्यालय प्रशासन को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
भोगनीपुर निवासी रामप्रकाश निरंजन ने राज्यपाल राम नाईक से विश्वविद्यालय में तैनात वरिष्ठ सहायक गजेंद्र सिंह यादव पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया था। रामप्रकाश का आरोप था कि गजेंद्र यादव गोपनीय अभिलेखों में अंकों में हेरफेर कर फर्जी डिग्रियां, फर्जी सत्यापन करके लाखों रुपये कमाते हैं। उरई बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कुछ समय पहले छात्र सौरभ श्रीवास्तव का बीएड का सत्यापन करने के लिए रिकॉर्ड बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को भेजा था।
सत्यापन के दौरान गजेंद्र द्वारा रुपये मांगे गए, जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग बना ली गई। मामले की शिकायत राज्यपाल राम नाईक से की गई। सबूत के तौर पर वीडियो फुटेज भी राजभवन को उपलब्ध कराई गई। राजभवन ने विश्वविद्यालय प्रशासन को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए। कुलसचिव सीपी तिवारी ने बताया कि आरोपी कर्मचारी की उपस्थिति मेें सीडी की जांच की गई। जांच में गजेंद्र यादव प्रथम दृष्टया अनुचित लाभ लेने, कर्मचारी नियमावली के विपरीत आचरण करने और विश्वविद्यालय की छवि धूमिल करने के दोषी मिले हैं। इसलिए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय कार्रवाई के आदेश दे दिए गए हैं।
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भोगनीपुर निवासी रामप्रकाश निरंजन ने राज्यपाल राम नाईक से विश्वविद्यालय में तैनात वरिष्ठ सहायक गजेंद्र सिंह यादव पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया था। रामप्रकाश का आरोप था कि गजेंद्र यादव गोपनीय अभिलेखों में अंकों में हेरफेर कर फर्जी डिग्रियां, फर्जी सत्यापन करके लाखों रुपये कमाते हैं। उरई बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कुछ समय पहले छात्र सौरभ श्रीवास्तव का बीएड का सत्यापन करने के लिए रिकॉर्ड बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को भेजा था।
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सत्यापन के दौरान गजेंद्र द्वारा रुपये मांगे गए, जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग बना ली गई। मामले की शिकायत राज्यपाल राम नाईक से की गई। सबूत के तौर पर वीडियो फुटेज भी राजभवन को उपलब्ध कराई गई। राजभवन ने विश्वविद्यालय प्रशासन को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए। कुलसचिव सीपी तिवारी ने बताया कि आरोपी कर्मचारी की उपस्थिति मेें सीडी की जांच की गई। जांच में गजेंद्र यादव प्रथम दृष्टया अनुचित लाभ लेने, कर्मचारी नियमावली के विपरीत आचरण करने और विश्वविद्यालय की छवि धूमिल करने के दोषी मिले हैं। इसलिए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय कार्रवाई के आदेश दे दिए गए हैं।
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