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बुंदेलखंड के फूलों से सज रहा सीएम का मंच
amarujala
Updated Wed, 28 Feb 2018 02:42 AM IST
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cm, jhansi news
- फोटो : demo
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बुंदेलखंड में उगाए जा रहे फूलों से प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मंच सजाया जा रहा है। देखने में आकर्षक लगने वाले झरबेरा के केसरिया फूल यहां से लखनऊ व अन्य जगह भेजे जा रहे हैं। उद्यान विभाग की पहल पर मोंठ ब्लाक के पथर्रा में लगी इन फूलों की फसल खूब लहलहा रही है। वहीं, बबीना के चमरऊआ में गुलाब की खेती हो रही है। किसानों को फूलों की खेती मालामाल कर रही है।
झरबेरा के फूलों का प्रयोग बुके बनाने में किया जाता है। स्टेज की सजावट करने में भी इनका प्रयोग होता है। ये फूल दो से तीन दिन तक मुरझाते नहीं हैं। केसरिया, सफेद, महरून, पीला, लाल और गुलाबी झरबेरा की बहुत डिमांड है। इन दिनों केसरिया रंग के फूलों को मुख्यमंत्री का मंच सजाने में प्रयोग किया जा रहा है। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री के मंच को सजाने में प्रयोग होने वाले केसरिया फूलों की मांग मोंठ के पथर्रा से पूरी हो रही है। वहीं, चमरऊआ का गुलाब भोपाल भेजा जा रहा है।
पचास फीसदी छूट
एक एकड़ (अधिकतम चार हजार वर्ग मीटर) जमीन में गुलाब की खेती करने पर अधिकतम 26 लाख रुपये लागत आती है। वहीं, झरबेरा की खेती करने पर 58 लाख रुपये लागत आती है। इस पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। अनुदान के लिए शर्त यह है कि बैंक से ऋण लेना पड़ेगा, तभी छूट मिलेगी।
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पॉली ग्रीन हाउस में खेती
बेहतर खेती के लिए पूरी जमीन पर चारों ओर से पॉलीथिन कवर कर दी जाती है। इसके लिए 22 टन लोहे का स्ट्रक्चर बनाया जाता है, जिसके ऊपर से पॉलिथीन कवर की जाती है। पॉली हाउस से यह फायदा होता है कि गर्मी की फसल सर्दियों में और सर्दी की फसल गर्मियों में उसी तापमान पर ली जा सकती है। पॉलिथीन से पूरा खेत ढका होने के कारण खरपतवार पैदा नहीं होते, तापमान स्थिर रहता है। पॉली हाउस सेमी शेड जालियों के माध्यम से 40 फीसदी धूप रोकता है। सर्दियों में किसी तरह के कीटाणु इसमें नहीं पनपते और पौधों को बीमारियां नहीं लगतीं। फूलों में ताजगी के लिए एअरकंडीशनर का प्रयोग किया जाता है।खास बात यह है कि रासायनिक खाद ही खेती में डाली जा रही है।
बहुत डिमांड
मेरे पिताजी खेती करते थे। उनके बाद मैं खेती करने लगा। एक एकड़ में फूलों की खेती कर रहा हूं। केसरिया झरबेरा फूल मुख्यमंत्री के स्टेज बनाने में काम आ रहा है। इतनी डिमांड है कि पूरा नहीं कर पा रहा हूं।
-अमित कुमार, किसान पथर्रा गांव
किसानों की आय बढ़ा रहे
फूलों की खेती से न केवल किसानों की आय दोगुनी से अधिक हो गई है, बल्कि किसान स्वयं का रोजगार कर दूसरों को भी रोजगार देने की स्थिति में हैं।
- भैरम सिंह, अधीक्षक राजकीय उद्यान।
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झरबेरा के फूलों का प्रयोग बुके बनाने में किया जाता है। स्टेज की सजावट करने में भी इनका प्रयोग होता है। ये फूल दो से तीन दिन तक मुरझाते नहीं हैं। केसरिया, सफेद, महरून, पीला, लाल और गुलाबी झरबेरा की बहुत डिमांड है। इन दिनों केसरिया रंग के फूलों को मुख्यमंत्री का मंच सजाने में प्रयोग किया जा रहा है। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री के मंच को सजाने में प्रयोग होने वाले केसरिया फूलों की मांग मोंठ के पथर्रा से पूरी हो रही है। वहीं, चमरऊआ का गुलाब भोपाल भेजा जा रहा है।
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पचास फीसदी छूट
एक एकड़ (अधिकतम चार हजार वर्ग मीटर) जमीन में गुलाब की खेती करने पर अधिकतम 26 लाख रुपये लागत आती है। वहीं, झरबेरा की खेती करने पर 58 लाख रुपये लागत आती है। इस पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। अनुदान के लिए शर्त यह है कि बैंक से ऋण लेना पड़ेगा, तभी छूट मिलेगी।
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पॉली ग्रीन हाउस में खेती
बेहतर खेती के लिए पूरी जमीन पर चारों ओर से पॉलीथिन कवर कर दी जाती है। इसके लिए 22 टन लोहे का स्ट्रक्चर बनाया जाता है, जिसके ऊपर से पॉलिथीन कवर की जाती है। पॉली हाउस से यह फायदा होता है कि गर्मी की फसल सर्दियों में और सर्दी की फसल गर्मियों में उसी तापमान पर ली जा सकती है। पॉलिथीन से पूरा खेत ढका होने के कारण खरपतवार पैदा नहीं होते, तापमान स्थिर रहता है। पॉली हाउस सेमी शेड जालियों के माध्यम से 40 फीसदी धूप रोकता है। सर्दियों में किसी तरह के कीटाणु इसमें नहीं पनपते और पौधों को बीमारियां नहीं लगतीं। फूलों में ताजगी के लिए एअरकंडीशनर का प्रयोग किया जाता है।खास बात यह है कि रासायनिक खाद ही खेती में डाली जा रही है।
बहुत डिमांड
मेरे पिताजी खेती करते थे। उनके बाद मैं खेती करने लगा। एक एकड़ में फूलों की खेती कर रहा हूं। केसरिया झरबेरा फूल मुख्यमंत्री के स्टेज बनाने में काम आ रहा है। इतनी डिमांड है कि पूरा नहीं कर पा रहा हूं।
-अमित कुमार, किसान पथर्रा गांव
किसानों की आय बढ़ा रहे
फूलों की खेती से न केवल किसानों की आय दोगुनी से अधिक हो गई है, बल्कि किसान स्वयं का रोजगार कर दूसरों को भी रोजगार देने की स्थिति में हैं।
- भैरम सिंह, अधीक्षक राजकीय उद्यान।