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बुंदेली लोक रंगों के बीच हस्तशिल्प मेला का आगाज
ब्यूरो
Updated Sat, 19 Dec 2015 12:07 AM IST
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झांसी। बुंदेलखंड की विविध लोक कलाओं के बीच शुक्रवार को झांसी जन महोत्सव - 2015 ‘परंपरा’ के तहत आयोजित हस्तशिल्प मेले का शुभारंभ हुआ।
वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के ऐतिहासिक दुर्ग की तलहटी में स्थित क्राफ्ट मेला ग्राउंड में मेले का शुभारंभ मुख्य अतिथि मंडलायुक्त के राम मोहनराव ने फीता काटकर किया। तदुपरांत, उन्होंने रानी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके साथ ही प्राचीन बुंदेली वाद्य रमतूले बज उठे और नगाड़े की थाप पर कलाकारों ने शहनाई की धुन छेड़ी।
मेला परिसर में बने मंच पर लोकमान्य तिलक बालिका इंटर कॉलेज की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया तथा लोक संस्कृति की छठा बिखेरी। युवाओं की टीम ने अनूठे अंदाज में बैंड पर वंदेमातरम् गाया। रानी की शौर्य गाथा पर आधारित गीत की प्रस्तुति हुई। निशिकांत भदौरिया एवं उनके साथियों ने पारंपरिक परिवेश में राई नृत्य व लोक गीतों की प्रस्तुति दी।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने कहा कि टेलीविजन व इंटरनेट के इस युग में प्राचीन परंपराओं व संस्कृति का संरक्षण किसी चुनौती से कम नहीं है। झांसी जन महोत्सव के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी विरासत को जानने का मौका मिलेगा। उन्होंने आयोजन में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। महापौर किरन राजू बुक सेलर ने कहा कि नगर निगम महोत्सव को पूरा सहयोग प्रदान करेगा।
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पूर्व मंत्री हरगोविंद कुशवाहा ने बुंदेली संस्कृति को भारतीय सभ्यता का अहम अंग बताते हुए कहा कि बुंदेलखंड में गरीबी है, लेकिन यहां के वासियों में उत्साह व उमंग की कमी नहीं है। इस मौके पर उन्होंने लोक कवि ईसुरी की रचनाएं एवं बुंदेली वैवाहिक गीत सुनाए। बसपा नेत्री अनुराधा शर्मा ने कहा कि मेला-महोत्सव हमेशा ही आम जनता के प्रिय रहे हैं। इससे पूर्व महोत्सव के मुख्य संयोजक राजीव राय ने स्वागत भाषण में कहा कि इस वर्ष का महोत्सव विशेष होगा। उन्होंने मुख्य अतिथि को स्मृति चिह्न भेंट किया।
मेला प्रभारी दिनेश भार्गव ने बताया कि मेले में डेढ़ सौ दुकानें देश के विभिन्न हिस्सों से आए हस्तशिल्पियों को नि:शुल्क प्रदान की गईं हैं। इस दौरान आयोजन समिति के अध्यक्ष मुकुंद मेहरोत्रा, संजय कुमार, विजय जैन, राजीव बब्बर, राहुल राय, दीपक राय, विशाल राय आदि ने भी विचार प्रकट किए।
कुलियों की मौजूदगी रही खास
झांसी। नाम के अनुरूप झांसी जन महोत्सव में समाज के विभिन्न वर्गों के जन-जन की सहभागिता सुनिश्चित करनी की कोशिश की गई है। इसी कड़ी में मेला के उद्घाटन के अवसर पर डेढ़ दर्जन कुलियों ने अपनी आमद दर्ज कराई। उनके प्रतिनिधि गोलू सिंह ठाकुर ने मुख्य अतिथि का माल्यार्पण किया।
जुटे हस्तशिल्पी, सजने लगीं दुकानें
झांसी क्राफ्ट मेले में उप्र के विभिन्न हिस्सों से हस्तशिल्पी आए हैं। मेले में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों की खास शिल्प कलाएं एक ही स्थान पर इकट्ठा हुई हैं। शिल्पी दुकानों को सजाने में जुटे हुए हैं।
मेले में खुर्जा के मुदस्सिर सेरेमिक से निर्मित खास सिगरेट एस्ट्रे, पेन बॉक्स, टी सेट, केतलियां, तुलसी पॉड समेत 500 प्रकार के डोंगा सेट, टी कप आदि लेकर आए हैं। वह उत्साहित हैं और व्यापार अच्छा चलने की उम्मीद जता रहे हैं। भदोही के कालीन विक्रेता कपिल सौ से अधिक रंगों व डिजाइनों में कारपेट लेकर आए हैं। ललितपुर के शिवम सोनी की दुकान पर पीतल की आकर्षक मूर्तियों का संग्रह है।
बरगद एवं कदंब के पेड़ के तले रास रचाते राधा कृष्ण तो, जगन्नाथ जी के रथ को खींचते गजराज के जोड़ा हस्तशिल्प कलाकारी का बखान कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि हस्त शिल्प मेले में शिल्पियों को नि:शुल्क डेढ़ सौ दुकानें आवंटित की गई हैं, जिनमें देर रात्रि तक यह शिल्पी अपना माल सजाते रहे।
रानी के वंशजों का होगा सम्मान
झांसी जन महोत्सव परंपरा में 27 दिसंबर को सायं सात बजे मुक्ताकाशी मंच पर महारानी लक्ष्मीबाई के वंशज श्रीमंत अरुण कृष्ण राव एवं उनके सुपुत्र योगेश अरुण राव का सम्मान किया जाएगा। दोनों विभूतियों को शॉल एवं बुंदेली पगड़ी पहनाई जाएगी। इसके अलावा रानी के शौर्य से परिपूरित अभिनंदन पत्र एवं बाई साब का चित्र प्रदान किया जाएगा। यह जानकारी कार्यक्रम प्रभारी मोहन नेपाली ने दी है।
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वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के ऐतिहासिक दुर्ग की तलहटी में स्थित क्राफ्ट मेला ग्राउंड में मेले का शुभारंभ मुख्य अतिथि मंडलायुक्त के राम मोहनराव ने फीता काटकर किया। तदुपरांत, उन्होंने रानी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके साथ ही प्राचीन बुंदेली वाद्य रमतूले बज उठे और नगाड़े की थाप पर कलाकारों ने शहनाई की धुन छेड़ी।
मेला परिसर में बने मंच पर लोकमान्य तिलक बालिका इंटर कॉलेज की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया तथा लोक संस्कृति की छठा बिखेरी। युवाओं की टीम ने अनूठे अंदाज में बैंड पर वंदेमातरम् गाया। रानी की शौर्य गाथा पर आधारित गीत की प्रस्तुति हुई। निशिकांत भदौरिया एवं उनके साथियों ने पारंपरिक परिवेश में राई नृत्य व लोक गीतों की प्रस्तुति दी।
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इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने कहा कि टेलीविजन व इंटरनेट के इस युग में प्राचीन परंपराओं व संस्कृति का संरक्षण किसी चुनौती से कम नहीं है। झांसी जन महोत्सव के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी विरासत को जानने का मौका मिलेगा। उन्होंने आयोजन में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। महापौर किरन राजू बुक सेलर ने कहा कि नगर निगम महोत्सव को पूरा सहयोग प्रदान करेगा।
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पूर्व मंत्री हरगोविंद कुशवाहा ने बुंदेली संस्कृति को भारतीय सभ्यता का अहम अंग बताते हुए कहा कि बुंदेलखंड में गरीबी है, लेकिन यहां के वासियों में उत्साह व उमंग की कमी नहीं है। इस मौके पर उन्होंने लोक कवि ईसुरी की रचनाएं एवं बुंदेली वैवाहिक गीत सुनाए। बसपा नेत्री अनुराधा शर्मा ने कहा कि मेला-महोत्सव हमेशा ही आम जनता के प्रिय रहे हैं। इससे पूर्व महोत्सव के मुख्य संयोजक राजीव राय ने स्वागत भाषण में कहा कि इस वर्ष का महोत्सव विशेष होगा। उन्होंने मुख्य अतिथि को स्मृति चिह्न भेंट किया।
मेला प्रभारी दिनेश भार्गव ने बताया कि मेले में डेढ़ सौ दुकानें देश के विभिन्न हिस्सों से आए हस्तशिल्पियों को नि:शुल्क प्रदान की गईं हैं। इस दौरान आयोजन समिति के अध्यक्ष मुकुंद मेहरोत्रा, संजय कुमार, विजय जैन, राजीव बब्बर, राहुल राय, दीपक राय, विशाल राय आदि ने भी विचार प्रकट किए।
कुलियों की मौजूदगी रही खास
झांसी। नाम के अनुरूप झांसी जन महोत्सव में समाज के विभिन्न वर्गों के जन-जन की सहभागिता सुनिश्चित करनी की कोशिश की गई है। इसी कड़ी में मेला के उद्घाटन के अवसर पर डेढ़ दर्जन कुलियों ने अपनी आमद दर्ज कराई। उनके प्रतिनिधि गोलू सिंह ठाकुर ने मुख्य अतिथि का माल्यार्पण किया।
जुटे हस्तशिल्पी, सजने लगीं दुकानें
झांसी क्राफ्ट मेले में उप्र के विभिन्न हिस्सों से हस्तशिल्पी आए हैं। मेले में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों की खास शिल्प कलाएं एक ही स्थान पर इकट्ठा हुई हैं। शिल्पी दुकानों को सजाने में जुटे हुए हैं।
मेले में खुर्जा के मुदस्सिर सेरेमिक से निर्मित खास सिगरेट एस्ट्रे, पेन बॉक्स, टी सेट, केतलियां, तुलसी पॉड समेत 500 प्रकार के डोंगा सेट, टी कप आदि लेकर आए हैं। वह उत्साहित हैं और व्यापार अच्छा चलने की उम्मीद जता रहे हैं। भदोही के कालीन विक्रेता कपिल सौ से अधिक रंगों व डिजाइनों में कारपेट लेकर आए हैं। ललितपुर के शिवम सोनी की दुकान पर पीतल की आकर्षक मूर्तियों का संग्रह है।
बरगद एवं कदंब के पेड़ के तले रास रचाते राधा कृष्ण तो, जगन्नाथ जी के रथ को खींचते गजराज के जोड़ा हस्तशिल्प कलाकारी का बखान कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि हस्त शिल्प मेले में शिल्पियों को नि:शुल्क डेढ़ सौ दुकानें आवंटित की गई हैं, जिनमें देर रात्रि तक यह शिल्पी अपना माल सजाते रहे।
रानी के वंशजों का होगा सम्मान
झांसी जन महोत्सव परंपरा में 27 दिसंबर को सायं सात बजे मुक्ताकाशी मंच पर महारानी लक्ष्मीबाई के वंशज श्रीमंत अरुण कृष्ण राव एवं उनके सुपुत्र योगेश अरुण राव का सम्मान किया जाएगा। दोनों विभूतियों को शॉल एवं बुंदेली पगड़ी पहनाई जाएगी। इसके अलावा रानी के शौर्य से परिपूरित अभिनंदन पत्र एवं बाई साब का चित्र प्रदान किया जाएगा। यह जानकारी कार्यक्रम प्रभारी मोहन नेपाली ने दी है।