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यूपी में टैक्स देने में सबसे आगे हैं बुंदेलखंड के व्यापारी

Fri, 14 Feb 2020 01:27 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 14 Feb 2020 01:27 AM IST
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bundeli businessman highest tax pair in up
bundeli businessman highest tax pair in up
मुकेश साहू
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झांसी। उत्तर प्रदेश में वाणिज्य कर देने में बुंदेलखंड के सातों जिले के व्यापारी सबसे आगे हैं। यह स्थिति तबहै जब यहां उद्योग धंधे व कल कारखानों की संख्या कम है। अप्रैल 2018 से व्यापारी लगातार आगे रह रहे हैं। यहां के 99 फीसदी व्यापारी हर माह कर भर रहे हैं। टैक्स की उगाही भी लक्ष्य से अधिक हो रही है।
वाणिज्य कर झांसी जोन के अंतर्गत बुंदेलखंड के झांसी के अलावा जालौन, ललितपुर, महोबा, हमीरपुर, बांदा व चित्रकूट आते हैं। बुंदेलखंड में कल कारखानों और बड़े उद्योगों की कमी होने के बाद भी यहां के व्यापारी टैक्स देने में सबसे आगे हैं। झांसी जोन में 34500 व्यापारी जीएसटी में पंजीकृत हैं। इनमें 23000 के करीब हर महीने रिटर्न जमा करते हैं। जबकि, बाकी व्यापारी तीन महीने में रिटर्न दाखिल करते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि 23000 में 99 फीसदी से अधिक व्यापारी हर महीने रिटर्न जमा कर रहे हैं। यह प्रतिशत यूपी के सभी 15 जोन में सबसे अधिक है।
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साथ ही, ये व्यापारी टैक्स से भी सरकार की झोली लक्ष्य से ज्यादा भर रहे हैं। अप्रैल 2019 से जनवरी 2020 तक झांसी जोन को 718.87 करोड़ का लक्ष्य दिया गया था, जिसके सापेक्ष 801.05 करोड़ राजस्व अर्जित किया गया। यह लक्ष्य से 11 प्रतिशत अधिक है। जोन को वित्तीय सत्र 2019- 2020 में कुल 872.93 करोड़ का लक्ष्य दिया गया है। कमिश्नर वाणिज्य की अध्यक्षता में लखनऊ मुख्यालय पर आयोजित बैठक में झांसी के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन प्रदीप कुमार सिंह की प्रशंसा की गई।
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बुंदेलखंड में बड़ी फैक्टरियां जरूर नहीं हैं, लेकिन यहां के कारोबारी रिटर्न और टैक्स देने में यूपी में सबसे आगे चल रहे हैं। यहां के व्यापारियों की हर सहूलियत का ध्यान रखा जाता है।
प्रदीप कुमार सिंह, एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन।
इनसे मिलता है सबसे अधिक राजस्व
झांसी जोन में उद्योग और बड़ी फैक्टरियों का अभाव है। इसके बाद भी डायमंड सीमेंट से हर महीने 16 से 17 करोड़, सड़क बनाने वाली कंपनी गायत्री प्रोजेक्ट लिमिटेड से चार से पांच करोड़, जीएमआर इंफ्रास्ट्रेक्चर से एक करोड़, जेएमके ऑटो मोबाइल्स से पांच से छह करोड़ व सूरी ऑटोमोबाइल्स से दो से ढाई करोड़ रुपये टैक्स मिलता है।

बड़े करदाता छीने
वाणिज्य कर विभाग को पहले भेल, पारीछा थर्मल पावर प्लांट, रेलवे से करोड़ों रुपये का टैक्स मिलता था, लेकिन अब भेल सीजीएसटी से जुड़ गया है। रेलवे का टैक्स इलाहाबाद मुख्यालय में जमा होने लगा है। पारीछा थर्मल पावर प्लांट का टैक्स लखनऊ में जमा हो रहा है।
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