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Jhansi News: असाध्य रोग का बजट खत्म, रोगियों की जेब हो रही ढीली

Fri, 16 Oct 2026 03:07 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2026 03:07 AM IST
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Budget for incurable diseases exhausted, patients forced to pay from their own pockets
झांसी। मेडिकल कॉलेज में असाध्य रोग का बजट खत्म हो गया है। इससे इन रोगियों का उपचार कराने में जेब ढीली हो रही है। पूर्व प्राचार्यों की ढिलाई से गत वित्तीय वर्ष में बजट नहीं मिला। अब असाध्य रोगियों के उपचार में वित्तीय संकट होने पर 3.50 करोड़ रुपये का बजट शासन से मांगा है।
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मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने बताया प्रदेश सरकार ने पार्किंसंस, अल्झाइमर, एड्स/एचआईवी, रेबीज, इबोला, हेपेटाइटिस बी एवं सी, कैंसर, मेलानोमा, मल्टीपल स्केलेरोसिस, क्रोनिक किडनी रोग, हार्ट फेलियर, गंभीर लिवर सिरोसिस को असाध्य मानते हुए निशुल्क उपचार की व्यवस्था की है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज को स्पेशल बजट जारी किया जाता है ताकि हर रोगी को बेहतर उपचार मिले।
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सूत्रों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में मेडिकल कॉलेज को असाध्य रोगियों के उपचार के लिए 1.50 करोड़ रुपये मिले थे। इसकी अधिकांश राशि किडनी रोगियों के उपचार में इस्तेमाल की गई। वित्तीय वर्ष 2025-26 में तत्कालीन प्राचार्यों ने थोड़ा बजट बचने के बाद भी शासन से मांग नहीं की। अब बजट खत्म होने की वजह से असाध्य रोगों के उपचार में दिक्कत आने पर जिम्मेदार जागे हैं। जिसके तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शासन से 3.50 करोड़ रुपये का बजट मांगा गया है। ऐसे में शासन से बजट आने के बाद ही असाध्य रोगों से पीड़ित रोगियों का उपचार होगा। प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार ने बताया गत वित्तीय वर्ष में असाध्य रोग का बजट नहीं मांगा गया था। अब बजट खत्म होने पर शासन से 3.50 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव भेजा है।
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शासन ने नियम किए शिथिल
अब तक असाध्य बजट से उपचार का उन्हीं लोगों को लाभ मिलता था, जिनके पास बीपीएल राशन कार्ड था। अब नियमों को शिथिल कर दिया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभ मिल सके। प्राचार्य डाॅ. सुधीर कुमार ने बताया अब रोगी का उत्तर प्रदेश का निवासी होना अनिवार्य है। हार्ट की गंभीर दिक्कत होने पर 24 घंटे तक उपचार असाध्य रोग बजट से ही होगा।
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