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बुंदेलखंड के छात्रों को उद्यमी के रूप में तैयार करेगा बीयू
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को बुंदेलखंड में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एमएसएमई मंत्रालय से 21.5 लाख रुपये अनुदान मिला है। अब बीयू कॉलेजों को नोडल सेंटर बनाकर स्टार्ट अप, एंटरप्रोन्योरशिप को बढ़ावा देने के लिए काम करेगा।
बीयू बुंदेलखंड के सातों जिलों में पर्यटन, फूड प्रोसेसिंग, कृषि, वेब डिजाइनिंग पर 50 से अधिक कार्यशाला आयोजित करेगा। पहले छात्र-छात्राओं के लिए एंटरप्रोन्योरशिप एवेयरनेस (ईएपी) प्रोग्राम कराए जाएंगे। बीयू के एंटरप्रोन्योरशिप विकास प्रोग्राम के नोडल ऑफिसर प्रो. सुनील काबिया ने बताया कि जो छात्र-छात्राएं स्टार्ट अप, उद्यमिता के लिए रुचि दिखाएंगे, उनके लिए एंटरप्रोन्योरशिप एंड स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम कराया जाएगा। बीयू और बाहर से विशेषज्ञ आकर छात्र-छात्राओं को स्टार्ट अप, उद्यम शुरू करने के टिप्स देंगे। फंड आदि के बारे में भी जानकारी देंगे। छात्रों को बताया जाएगा कि मटर, अमरूद, अदरक को लंबे समय तक प्रिजर्व करके कैसे मुनाफा बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा खेती-किसानी में रेशम पालन, मधुमक्खी पालन से कैसे उद्यमी बन सकते हैं। वहीं, कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने कहा कि एमएसएमई के मंत्रालय से अनुदान मिलने से पहले बीयू ने तीन बार प्रस्तुतीकरण दिया था। ये प्रोजेक्ट बीयू को मिलना गौरव की बात है।
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बीयू बुंदेलखंड के सातों जिलों में पर्यटन, फूड प्रोसेसिंग, कृषि, वेब डिजाइनिंग पर 50 से अधिक कार्यशाला आयोजित करेगा। पहले छात्र-छात्राओं के लिए एंटरप्रोन्योरशिप एवेयरनेस (ईएपी) प्रोग्राम कराए जाएंगे। बीयू के एंटरप्रोन्योरशिप विकास प्रोग्राम के नोडल ऑफिसर प्रो. सुनील काबिया ने बताया कि जो छात्र-छात्राएं स्टार्ट अप, उद्यमिता के लिए रुचि दिखाएंगे, उनके लिए एंटरप्रोन्योरशिप एंड स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम कराया जाएगा। बीयू और बाहर से विशेषज्ञ आकर छात्र-छात्राओं को स्टार्ट अप, उद्यम शुरू करने के टिप्स देंगे। फंड आदि के बारे में भी जानकारी देंगे। छात्रों को बताया जाएगा कि मटर, अमरूद, अदरक को लंबे समय तक प्रिजर्व करके कैसे मुनाफा बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा खेती-किसानी में रेशम पालन, मधुमक्खी पालन से कैसे उद्यमी बन सकते हैं। वहीं, कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने कहा कि एमएसएमई के मंत्रालय से अनुदान मिलने से पहले बीयू ने तीन बार प्रस्तुतीकरण दिया था। ये प्रोजेक्ट बीयू को मिलना गौरव की बात है।
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