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बुंदेलखंड के डेढ़ लाख छात्र- छात्राएं फिर हो सकते हैं प्रमोट
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बुंदेलखंड के डेढ़ लाख छात्र- छात्राएं फिर हो सकते हैं प्रमोट
- शासन की तरफ से गठित कमेटी दे चुकी रिपोर्ट, शासनादेश का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं को लेकर शासन की तरफ से गठित की गई कुलपतियों की समिति ने कोरोना महामारी के चलते इस बार भी स्नातक और परास्नातक के प्रथम और द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को प्रमोट करने की सिफारिश की है। यदि ऐसा होता है तो बुंदेलखंड के डेढ़ लाख छात्र- छात्राएं बिना परीक्षा दिए फिर प्रमोट हो सकते हैं। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को शासनादेश का इंतजार है।
कोरोना महामारी की पहली लहर में विश्वविद्यालयों की वार्षिक प्रणाली की परीक्षा के बीच में ही लॉकडाउन लग गया था। इस कारण कई विषयों की परीक्षाएं नहीं हो सकीं। लॉकडाउन खुला तो कोरोना के मामले तेजी से बढ़े। इस कारण अंतिम वर्ष को छोड़कर सभी छात्र-छात्राओं को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया गया। सिर्फ फाइनल इयर वाले विद्यार्थियों की परीक्षा कराई गई। इस दौरान बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने 1.40 लाख विद्यार्थियों को प्रमोट किया। इस बार की परीक्षाओं को लेकर शासन की तरफ से तीन कुलपतियों की कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी ने अपनी सिफारिश में अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की ही परीक्षा कराने की बात कही है। बाकी कक्षाओं के विद्यार्थियों को प्रमोट करने की सिफारिश की है। यदि शासन इस पर मुहर लगा देता है तो बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के वार्षिक प्रणाली वाले लगभग डेढ़ लाख छात्र- छात्राएं प्रमोट किए जा सकते हैं।
एक साल की मेहनत पर तिगुना फायदा
पिछले साल स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी दूसरी साल के लिए प्रमोट कर दिए गए। अब यदि अंतिम वर्ष को छोड़कर बाकी सभी को फिर प्रमोट कर दिया जाता है तो दूसरे साल के विद्यार्थी तीसरे वर्ष में पहुंच जाएंगे। ऐसे में वह एक साल की मेहनत कर तीन वर्षों का रिजल्ट सुधार सकते हैं।
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वर्जन..
परीक्षाओं को लेकर शासन की तरफ से गठित कमेटी ने क्या रिपोर्ट सौंपी है, इसकी जानकारी नहीं है। जैसा शासनादेश आएगा, उसी हिसाब से परीक्षाएं कराई जाएंगी। - प्रो. जेवी वैशम्पायन, कुलपति, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय।
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- शासन की तरफ से गठित कमेटी दे चुकी रिपोर्ट, शासनादेश का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं को लेकर शासन की तरफ से गठित की गई कुलपतियों की समिति ने कोरोना महामारी के चलते इस बार भी स्नातक और परास्नातक के प्रथम और द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को प्रमोट करने की सिफारिश की है। यदि ऐसा होता है तो बुंदेलखंड के डेढ़ लाख छात्र- छात्राएं बिना परीक्षा दिए फिर प्रमोट हो सकते हैं। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को शासनादेश का इंतजार है।
कोरोना महामारी की पहली लहर में विश्वविद्यालयों की वार्षिक प्रणाली की परीक्षा के बीच में ही लॉकडाउन लग गया था। इस कारण कई विषयों की परीक्षाएं नहीं हो सकीं। लॉकडाउन खुला तो कोरोना के मामले तेजी से बढ़े। इस कारण अंतिम वर्ष को छोड़कर सभी छात्र-छात्राओं को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया गया। सिर्फ फाइनल इयर वाले विद्यार्थियों की परीक्षा कराई गई। इस दौरान बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने 1.40 लाख विद्यार्थियों को प्रमोट किया। इस बार की परीक्षाओं को लेकर शासन की तरफ से तीन कुलपतियों की कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी ने अपनी सिफारिश में अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की ही परीक्षा कराने की बात कही है। बाकी कक्षाओं के विद्यार्थियों को प्रमोट करने की सिफारिश की है। यदि शासन इस पर मुहर लगा देता है तो बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के वार्षिक प्रणाली वाले लगभग डेढ़ लाख छात्र- छात्राएं प्रमोट किए जा सकते हैं।
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एक साल की मेहनत पर तिगुना फायदा
पिछले साल स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी दूसरी साल के लिए प्रमोट कर दिए गए। अब यदि अंतिम वर्ष को छोड़कर बाकी सभी को फिर प्रमोट कर दिया जाता है तो दूसरे साल के विद्यार्थी तीसरे वर्ष में पहुंच जाएंगे। ऐसे में वह एक साल की मेहनत कर तीन वर्षों का रिजल्ट सुधार सकते हैं।
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वर्जन..
परीक्षाओं को लेकर शासन की तरफ से गठित कमेटी ने क्या रिपोर्ट सौंपी है, इसकी जानकारी नहीं है। जैसा शासनादेश आएगा, उसी हिसाब से परीक्षाएं कराई जाएंगी। - प्रो. जेवी वैशम्पायन, कुलपति, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय।