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दो दिनों से बृजेंद्र ने नहीं खाई रोटी, पैसे उधार लेकर दिया बस का किराया
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झांसी। यूक्रेन के युद्ध प्रभावित इलाके में फंसा शहर का बृजेंद्र तमाम परेशानियों से जूझ रहा है। खाने-पीने का सामान खत्म हो जाने से उसने दो दिन से रोटी नहीं खाई है। हालांकि, बचे हुए फल के सहारे पिछले दो दिन काटे। यही नहीं, बैंक, एटीएम बंद होने से पैसे नहीं निकाल पाया। पूरे रुपये खत्म हो गए तो सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के लिए बस के किराए का पैसा दोस्तों से उधार लेकर चुकाना पड़ा।
महाराणा प्रताप नगर के बृजेंद्र राजपूत डिनिप्रो स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। भाई अरविंद ने बताया कि वह युद्ध प्रभावित डेनीप्रो शहर में है। शुरूआत में तो शहर पर हमलों की रफ्तार कम थी मगर मंगलवार आते-आते हमले और तेज हो गए हैं। साइरन की शुरूआत होते ही युद्ध शुरू हो जाता है और फिर बस हमलों की गूंज सुनाई देती है। इस कारण उनका भाई कई दिनों तक बाहर नहीं निकला। खाने का सामान भी खत्म हो गया तो फल खाकर समय बिता रहा है। किसी तरह कुछ दोस्तों की मदद से वह मंगलवार को बस से हंगरी बॉर्डर के लिए निकला है। चूंकि, बैंक, एटीएम बंद होने की वजह से वो पैसा नहीं निकाल सका, इसलिए दोस्तों ने बस के टिकट के लिए पैसे उधार दिए। एंबेसी के अधिकारियों के संपर्क में हैं। भारत लौटने में तीन से चार दिन लग सकते हैं। जब तक उनका भाई नहीं लौटता, तब तक हर पल घबराहट महसूस हो रही है।
झांसी पहुंचा शिवांश, आज आएगा अक्षेंद्र
शिवाजी नगर का शिवांश यादव मंगलवार को झांसी पहुंच गया है। उसके आने पर परिजनों ने राहत की सांस ली है। वहीं, आशिक चौराहा के पास रहने वाला अक्षेंद्र बादल बुधवार तड़के झांसी पहुंच जाएगा। पिता डॉ. धर्मेंद्र बादल ने बताया कि नई दिल्ली पहुंचने के बाद अधिकारी उसे यूपी भवन लेकर पहुंचे। वहां से कार कराई गई, जो अलीगढ़, आगरा के छात्रों को उतारते हुए झांसी आएगी।
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ऋतिक हंगरी तो श्रेया रोमानिया एयरपोर्ट पर
यूक्रेन की उजहोरोड नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ रहा नझाई बाजार का ऋतिक पटेल मंगलवार को हंगरी पहुंच गया। हालांकि, अभी ये तय नहीं हो पाया है कि कब तक उसे भारत के लिए फ्लाइट मिलेगी। वहीं, मास्टर कॉलोनी की श्रेया गुप्ता देर शाम रोमानिया एयरपोर्ट में दाखिल हो गईं। पिता प्रमोद गुप्ता ने बताया कि बुधवार तक फ्लाइट मिलने की संभावना है। सिविल लाइन का अखिल सिंह रोमानिया के सिरेट जिले के बास्केटबॉल कोर्ट में दूसरे छात्रों के साथ रुका हुआ है। पिता डॉ. एसएस सिंह ने बताया कि वहां पर एंबेसी के अधिकारियों ने खानपान की व्यवस्था की है। साथ ही परिजनों से बात करने के लिए एक सिम भी दिया गया है।
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महाराणा प्रताप नगर के बृजेंद्र राजपूत डिनिप्रो स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। भाई अरविंद ने बताया कि वह युद्ध प्रभावित डेनीप्रो शहर में है। शुरूआत में तो शहर पर हमलों की रफ्तार कम थी मगर मंगलवार आते-आते हमले और तेज हो गए हैं। साइरन की शुरूआत होते ही युद्ध शुरू हो जाता है और फिर बस हमलों की गूंज सुनाई देती है। इस कारण उनका भाई कई दिनों तक बाहर नहीं निकला। खाने का सामान भी खत्म हो गया तो फल खाकर समय बिता रहा है। किसी तरह कुछ दोस्तों की मदद से वह मंगलवार को बस से हंगरी बॉर्डर के लिए निकला है। चूंकि, बैंक, एटीएम बंद होने की वजह से वो पैसा नहीं निकाल सका, इसलिए दोस्तों ने बस के टिकट के लिए पैसे उधार दिए। एंबेसी के अधिकारियों के संपर्क में हैं। भारत लौटने में तीन से चार दिन लग सकते हैं। जब तक उनका भाई नहीं लौटता, तब तक हर पल घबराहट महसूस हो रही है।
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झांसी पहुंचा शिवांश, आज आएगा अक्षेंद्र
शिवाजी नगर का शिवांश यादव मंगलवार को झांसी पहुंच गया है। उसके आने पर परिजनों ने राहत की सांस ली है। वहीं, आशिक चौराहा के पास रहने वाला अक्षेंद्र बादल बुधवार तड़के झांसी पहुंच जाएगा। पिता डॉ. धर्मेंद्र बादल ने बताया कि नई दिल्ली पहुंचने के बाद अधिकारी उसे यूपी भवन लेकर पहुंचे। वहां से कार कराई गई, जो अलीगढ़, आगरा के छात्रों को उतारते हुए झांसी आएगी।
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ऋतिक हंगरी तो श्रेया रोमानिया एयरपोर्ट पर
यूक्रेन की उजहोरोड नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ रहा नझाई बाजार का ऋतिक पटेल मंगलवार को हंगरी पहुंच गया। हालांकि, अभी ये तय नहीं हो पाया है कि कब तक उसे भारत के लिए फ्लाइट मिलेगी। वहीं, मास्टर कॉलोनी की श्रेया गुप्ता देर शाम रोमानिया एयरपोर्ट में दाखिल हो गईं। पिता प्रमोद गुप्ता ने बताया कि बुधवार तक फ्लाइट मिलने की संभावना है। सिविल लाइन का अखिल सिंह रोमानिया के सिरेट जिले के बास्केटबॉल कोर्ट में दूसरे छात्रों के साथ रुका हुआ है। पिता डॉ. एसएस सिंह ने बताया कि वहां पर एंबेसी के अधिकारियों ने खानपान की व्यवस्था की है। साथ ही परिजनों से बात करने के लिए एक सिम भी दिया गया है।