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ब्रिज निर्माण से औंधे मुंह गिरा सीपरी का कारोबार
अमर उजाला ब्यूरो/
Updated Sat, 09 Apr 2016 12:47 AM IST
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over birj, jhansi news
- फोटो : demopic
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झांसी। सीपरी बाजार में ओवरब्रिज का निर्माण शुरू होने के बाद से यहां का कारोबार बुरी तरह से चरमरा गया है। बाहरी ग्राहकों का आना एकदम बंद हो गया है। स्थानीय ग्राहकों के सहारे व्यवसायी अपने व्यापार की गाड़ी को किसी तरह खींच रहे हैं। ब्रिज निर्माण में हो रही देरी से उनकी मुश्किलें और भी बढ़ गईं हैं।
महानगर के व्यापार का शहर क्षेत्र के बाद दूसरा बड़ा केंद्र सीपरी बाजार को माना जाता है। सब्जी से लेकर सोने-चांदी तक के यहां अलग-अलग मार्केट हैं। जरूरत की सारी चीजें यहां उपलब्ध हैं। खासतौर पर सीपरी क्षेत्र का कपड़ा बाजार में दूर-दूर से लोग खरीदारी करने आते हैं। लेकिन, पिछले दो सालों से यहां ग्राहकों की आवाजाही आधी भी नहीं रह गई है। ओवरब्रिज निर्माण से आवागमन में होने वाली परेशानी की वजह से बाहरी ग्राहक यहां के बाजार से कन्नी काटने लगे हैं। केवल सीपरी क्षेत्र के ग्राहक ही यहां की दुकानों पर पहुंचते हैं। निर्माण तय समय पर पूरा न होने की वजह से आने वाले दिनों को लेकर भी व्यापारी चिंतित हैं।
कपड़ों पर चढ़ जाती है धूल
झांसी। शूटिंग शर्टिंग की दुकान के संचालक इकबाल सिंह कहते हैं कि ओवरब्रिज निर्माण से उड़ने वाली धूल परेशान किए है। दुकान के कपड़ों पर यह चढ़ जाती है। एक तो पहले से ही ग्राहकी पचास फीसदी भी नहीं रह गई है, उस पर धूल चढ़े कपड़े बेचना मुश्किल हो रहा है। निर्माण जल्द पूरा होना चाहिए।
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आसान नहीं ग्राहकों की वापसी
झांसी। बर्तन की दुकान के संचालक लक्ष्मीनारायण चंगानी का कहना है कि बाहरी ग्राहक सीपरी बाजार से दो साल से गायब हैं। यहां तक की रूटीन कस्टमर भी मुंह फेर चुके हैं। ब्रिज निर्माण पूरा होने के बाद बाजार फिर से गुलजार होगा, इसे लेकर भी संशय है। क्योंकि ग्राहकों की दोबारा वापसी आसान नहीं होती है।
ब्रिज ने बिगाड़ दिया व्यापार
झांसी। जनरल व कॉस्मेटिक सामग्री के विक्रेता मनीष अग्रवाल भी ब्रिज निर्माण में हो रहे विलंब से खिन्न दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि ब्रिज निर्माण से बाजार का व्यापार एकदम बिगड़ गया है। बाजार में एंट्री का एक ही विकल्प होने की वजह से कस्टमर यहां आने कतरा रहे हैं। निर्माण में देरी ठीक नहीं है।
दुकान खुलती है पर चलती नहीं
झांसी। फैंसी जूतों की दुकान के संचालक आबिद का कहना है कि ब्रिज निर्माण शुरू होने के बाद से दुकानें खुली तो रहती हैं, परंतु चल नहीं रही हैं। इक्का-दुक्का ग्राहक ही दुकानों में नजर आते हैं। जबकि, निर्माण शुरू होने के पहले ही यहां के लिए वैकल्पिक रास्ता बना लिया गया होता, तो यह स्थिति नहीं रहती।
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महानगर के व्यापार का शहर क्षेत्र के बाद दूसरा बड़ा केंद्र सीपरी बाजार को माना जाता है। सब्जी से लेकर सोने-चांदी तक के यहां अलग-अलग मार्केट हैं। जरूरत की सारी चीजें यहां उपलब्ध हैं। खासतौर पर सीपरी क्षेत्र का कपड़ा बाजार में दूर-दूर से लोग खरीदारी करने आते हैं। लेकिन, पिछले दो सालों से यहां ग्राहकों की आवाजाही आधी भी नहीं रह गई है। ओवरब्रिज निर्माण से आवागमन में होने वाली परेशानी की वजह से बाहरी ग्राहक यहां के बाजार से कन्नी काटने लगे हैं। केवल सीपरी क्षेत्र के ग्राहक ही यहां की दुकानों पर पहुंचते हैं। निर्माण तय समय पर पूरा न होने की वजह से आने वाले दिनों को लेकर भी व्यापारी चिंतित हैं।
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कपड़ों पर चढ़ जाती है धूल
झांसी। शूटिंग शर्टिंग की दुकान के संचालक इकबाल सिंह कहते हैं कि ओवरब्रिज निर्माण से उड़ने वाली धूल परेशान किए है। दुकान के कपड़ों पर यह चढ़ जाती है। एक तो पहले से ही ग्राहकी पचास फीसदी भी नहीं रह गई है, उस पर धूल चढ़े कपड़े बेचना मुश्किल हो रहा है। निर्माण जल्द पूरा होना चाहिए।
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आसान नहीं ग्राहकों की वापसी
झांसी। बर्तन की दुकान के संचालक लक्ष्मीनारायण चंगानी का कहना है कि बाहरी ग्राहक सीपरी बाजार से दो साल से गायब हैं। यहां तक की रूटीन कस्टमर भी मुंह फेर चुके हैं। ब्रिज निर्माण पूरा होने के बाद बाजार फिर से गुलजार होगा, इसे लेकर भी संशय है। क्योंकि ग्राहकों की दोबारा वापसी आसान नहीं होती है।
ब्रिज ने बिगाड़ दिया व्यापार
झांसी। जनरल व कॉस्मेटिक सामग्री के विक्रेता मनीष अग्रवाल भी ब्रिज निर्माण में हो रहे विलंब से खिन्न दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि ब्रिज निर्माण से बाजार का व्यापार एकदम बिगड़ गया है। बाजार में एंट्री का एक ही विकल्प होने की वजह से कस्टमर यहां आने कतरा रहे हैं। निर्माण में देरी ठीक नहीं है।
दुकान खुलती है पर चलती नहीं
झांसी। फैंसी जूतों की दुकान के संचालक आबिद का कहना है कि ब्रिज निर्माण शुरू होने के बाद से दुकानें खुली तो रहती हैं, परंतु चल नहीं रही हैं। इक्का-दुक्का ग्राहक ही दुकानों में नजर आते हैं। जबकि, निर्माण शुरू होने के पहले ही यहां के लिए वैकल्पिक रास्ता बना लिया गया होता, तो यह स्थिति नहीं रहती।