{"_id":"5f73839d8ebc3e74f561f53c","slug":"branded-medicine-many-profit-reporters-news-jhs1774592196","type":"story","status":"publish","title_hn":"ब्रांडेड दवाओं से होती खूब कमाई, मरीजों की खर्च हो जाती पाई-पाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ब्रांडेड दवाओं से होती खूब कमाई, मरीजों की खर्च हो जाती पाई-पाई
विज्ञापन
झांसी। ब्रांडेड दवाओं के जरिए भी नर्सिंगहोम मरीजों से खूब कमाई करते हैं। सस्ती होने के बावजूद जेनरिक दवाएं मरीजों को नहीं लिखी जाती हैं। कई नर्सिंगहोमों ने अपने यहां ही मेडिकल स्टोर खोल रखा है, वो ऐसी दवाएं लिखते हैं जो सिर्फ उनके यहां ही मिलें। कोरोना वायरस के दौर के पहले के आंकड़ों पर गौर करें तो झांसी के बाशिंदे एक महीने में 15.5 करोड़ से अधिक की दवा खाते रहे, इनमें जेनरिक दवाओं का हिस्सा मात्र 50 लाख रुपये था।
आम आदमी को सस्ता इलाज उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने भारतीय जन औषधि परियोजना शुरू की। इसके तहत जन औषधि केंद्र खोलने के लिए लाइसेंस दिए गए। यहां पर जेनरिक दवाएं बेहद सस्ते दामों पर मिलनी शुरू हो गईं। जिले में दो साल में लोगों ने 14 लाइसेंस भी लिए। इन दवाओं में डॉक्टरों को कमीशन नहीं मिलता है, इसलिए डॉक्टरों ने जेनरिक दवाएं लिखना शुरू ही नहीं किया। उल्टा सांठगांठ या फिर अस्पताल में खुले मेडिकल स्टोर पर मौजूद ब्रांडेड दवाएं ही मरीजों को लिखते हैं। बिक्री न होने पर तीन जन औषधि केंद्र बंद हो गए हैं। जो खुले भी हैं, उनमें भी गिनी-चुनी दवाएं ही बिकती हैं।
कंपनी की मुहर लगते ही कई गुनी हो जाती कीमत
मर्ज के हिसाब से दवाइयों का सॉल्ट तैयार किया जाता है। जेनरिक दवाइयों में इस्तेमाल में लाया जाने वाला सॉल्ट लगभग एक जैसा ही होता है। इसके बाद कंपनियों द्वारा उस सॉल्ट की खरीदकर थोड़ी तब्दीली के बाद अपनी मुहर लगा दी जाती है। फिर सॉल्ट की कीमत में काफी बढ़ोत्तरी हो जाती है। इसके बाद एक्साइज ड्यूटी आदि लगने के बाद वह दवा कई गुना महंगी हो जाती है।
विज्ञापन
झांसी में 70-80 कंपनियों के स्टॉपेज
झांसी में करीब 70-80 दवा कंपनियों के स्टॉपेज हैं। यह सभी बड़ी कंपनियां हैं, जो बड़ी मात्रा में विभिन्न मर्जों की दवाएं बेच रही हैं। इन कंपनियों के कर्मचारियों द्वारा डॉक्टरों, मेडिकल स्टोरों से सेटिंग कर महंगी दवाइयां बेची जा रही हैं।
यदि कोई नर्सिंगहोम ऐसी दवाएं लिखता है, जो कि सिर्फ उसी के अस्पताल में मिलती है तो मरीज आकर शिकायत दर्ज कराएं। मामले की जांच की जाएगी। यदि शिकायत सही मिलती है तो तत्काल नर्सिंगहोम के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - उमेश भारती, औषधि निरीक्षक।
मरीज के जेनरिक दवा खरीदने पर डॉक्टर कोई आपत्ति नहीं दर्ज कराते हैं। बस दवा कारगर होनी चाहिए। मरीज कहीं भी जांच कराए, उसे कोई रोक नहीं है। अब झांसी में स्वास्थ सुविधाएं काफी बेहतर हो गई हैं। कई बाहर के मरीज अपना उपचार कराने झांसी आते हैं। कई बड़े महानगरों की तुलना में झांसी में सस्ता और बेहतर इलाज उपलब्ध है। यदि कोई नर्सिंगहोम गलत तरीके से मरीजों से पैसा लेता है, तो एसोसिएशन उसके खिलाफ है। - डॉ. एके सांवल, अध्यक्ष, नर्सिंगहोम एसोसिएशन झांसी।
विज्ञापन
आम आदमी को सस्ता इलाज उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने भारतीय जन औषधि परियोजना शुरू की। इसके तहत जन औषधि केंद्र खोलने के लिए लाइसेंस दिए गए। यहां पर जेनरिक दवाएं बेहद सस्ते दामों पर मिलनी शुरू हो गईं। जिले में दो साल में लोगों ने 14 लाइसेंस भी लिए। इन दवाओं में डॉक्टरों को कमीशन नहीं मिलता है, इसलिए डॉक्टरों ने जेनरिक दवाएं लिखना शुरू ही नहीं किया। उल्टा सांठगांठ या फिर अस्पताल में खुले मेडिकल स्टोर पर मौजूद ब्रांडेड दवाएं ही मरीजों को लिखते हैं। बिक्री न होने पर तीन जन औषधि केंद्र बंद हो गए हैं। जो खुले भी हैं, उनमें भी गिनी-चुनी दवाएं ही बिकती हैं।
विज्ञापन
कंपनी की मुहर लगते ही कई गुनी हो जाती कीमत
मर्ज के हिसाब से दवाइयों का सॉल्ट तैयार किया जाता है। जेनरिक दवाइयों में इस्तेमाल में लाया जाने वाला सॉल्ट लगभग एक जैसा ही होता है। इसके बाद कंपनियों द्वारा उस सॉल्ट की खरीदकर थोड़ी तब्दीली के बाद अपनी मुहर लगा दी जाती है। फिर सॉल्ट की कीमत में काफी बढ़ोत्तरी हो जाती है। इसके बाद एक्साइज ड्यूटी आदि लगने के बाद वह दवा कई गुना महंगी हो जाती है।
विज्ञापन
झांसी में 70-80 कंपनियों के स्टॉपेज
झांसी में करीब 70-80 दवा कंपनियों के स्टॉपेज हैं। यह सभी बड़ी कंपनियां हैं, जो बड़ी मात्रा में विभिन्न मर्जों की दवाएं बेच रही हैं। इन कंपनियों के कर्मचारियों द्वारा डॉक्टरों, मेडिकल स्टोरों से सेटिंग कर महंगी दवाइयां बेची जा रही हैं।
यदि कोई नर्सिंगहोम ऐसी दवाएं लिखता है, जो कि सिर्फ उसी के अस्पताल में मिलती है तो मरीज आकर शिकायत दर्ज कराएं। मामले की जांच की जाएगी। यदि शिकायत सही मिलती है तो तत्काल नर्सिंगहोम के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - उमेश भारती, औषधि निरीक्षक।
मरीज के जेनरिक दवा खरीदने पर डॉक्टर कोई आपत्ति नहीं दर्ज कराते हैं। बस दवा कारगर होनी चाहिए। मरीज कहीं भी जांच कराए, उसे कोई रोक नहीं है। अब झांसी में स्वास्थ सुविधाएं काफी बेहतर हो गई हैं। कई बाहर के मरीज अपना उपचार कराने झांसी आते हैं। कई बड़े महानगरों की तुलना में झांसी में सस्ता और बेहतर इलाज उपलब्ध है। यदि कोई नर्सिंगहोम गलत तरीके से मरीजों से पैसा लेता है, तो एसोसिएशन उसके खिलाफ है। - डॉ. एके सांवल, अध्यक्ष, नर्सिंगहोम एसोसिएशन झांसी।