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प्रत्याशी को लेकर बसपा में जातीय समीकरण पर मंथन
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झांसी। विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी सत्ता में दोबारा लौटने के लिए अबकी बार फूंक- फूंक कर कदम रख रही है। यही कारण है कि अबकी बार पार्टी ने प्रत्याशी अब तक घोषित नहीं किए हैं। चुनाव में फतह हासिल करने के लिए ऐसे उम्मीदवार पर दांव लगाएगी, जो जातीय समीकरणों में फिट बैठे और पार्टी की झोली में सीटें डाल दे।
बुंदेलखंड में बसपा दोबारा वापसी करने के लिए हर उस रणनीति पर काम कर रही है, जो चुनाव में उसे फतह दिला सके। पार्टी ने पहले प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन करके ब्राह्मण समाज पर डोरे डाले। सम्मेलनों में जुटी भीड़ से पार्टी उत्साहित है। यही कारण है कि पार्टी ने अगली रणनीति के तहत विधानसभा क्षेत्र में जातीय समीकरणों को लक्ष्य बनाया है। इसके अंतर्गत किस विधानसभा में किस जाति की बहुलता है अथवा कौन सी जाति के लोग राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं या किस जाति के लोगों की भागीदारी राजनीति में कम है, जबकि यदि उन्हें मौका दिया जाए तो वह चुनाव जीत सकते हैं। इसी रणनीति के आधार पर पार्टी कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार पार्टी का मानना है कि झांसी विधानसभा क्षेत्र में दो जातियों का यदि समन्वय हो जाए और किसी सर्वमान्य व्यक्ति को टिकट दे दिया जाए तो फिर से बसपा का परचम फहराया जा सकता है। गरौठा विधानसभा क्षेत्र में पिछड़ी जाति में राजनीति के हाशिये पर रहने वाले एक समाज के व्यक्ति को यदि मैदान में उतारा जाए, तो काफी कड़ा मुकाबला हो सकता हैै। क्योंकि, लगभग सभी राजनीतिक दल यहां पर पिछड़ों पर दांव लगाएंगे। मऊरानीपुर विधानसभा क्षेत्र सुरक्षित है। यहां पर एक जाति विशेष के लोगों का वर्चस्व है और लगभग हर पार्टी यहां से इसी जाति के व्यक्ति को चुनाव मैदान में उतारती है। जबकि, पार्टी की रणनीति है कि अगर यहां बदलाव किया गया तो अच्छे परिणाम आएंगे। बबीना विधानसभा क्षेत्र में किसी ऐसे प्रत्याशी की तलाश है जो अन्य दलों प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर दे सके।
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बुंदेलखंड में बसपा दोबारा वापसी करने के लिए हर उस रणनीति पर काम कर रही है, जो चुनाव में उसे फतह दिला सके। पार्टी ने पहले प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन करके ब्राह्मण समाज पर डोरे डाले। सम्मेलनों में जुटी भीड़ से पार्टी उत्साहित है। यही कारण है कि पार्टी ने अगली रणनीति के तहत विधानसभा क्षेत्र में जातीय समीकरणों को लक्ष्य बनाया है। इसके अंतर्गत किस विधानसभा में किस जाति की बहुलता है अथवा कौन सी जाति के लोग राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं या किस जाति के लोगों की भागीदारी राजनीति में कम है, जबकि यदि उन्हें मौका दिया जाए तो वह चुनाव जीत सकते हैं। इसी रणनीति के आधार पर पार्टी कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया जा रहा है।
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सूत्रों के अनुसार पार्टी का मानना है कि झांसी विधानसभा क्षेत्र में दो जातियों का यदि समन्वय हो जाए और किसी सर्वमान्य व्यक्ति को टिकट दे दिया जाए तो फिर से बसपा का परचम फहराया जा सकता है। गरौठा विधानसभा क्षेत्र में पिछड़ी जाति में राजनीति के हाशिये पर रहने वाले एक समाज के व्यक्ति को यदि मैदान में उतारा जाए, तो काफी कड़ा मुकाबला हो सकता हैै। क्योंकि, लगभग सभी राजनीतिक दल यहां पर पिछड़ों पर दांव लगाएंगे। मऊरानीपुर विधानसभा क्षेत्र सुरक्षित है। यहां पर एक जाति विशेष के लोगों का वर्चस्व है और लगभग हर पार्टी यहां से इसी जाति के व्यक्ति को चुनाव मैदान में उतारती है। जबकि, पार्टी की रणनीति है कि अगर यहां बदलाव किया गया तो अच्छे परिणाम आएंगे। बबीना विधानसभा क्षेत्र में किसी ऐसे प्रत्याशी की तलाश है जो अन्य दलों प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर दे सके।
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