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Jhansi News: मनमर्जी की किताबें, मनमानी कीमतें... मजबूर अभिभावक
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में अधिकतर निजी स्कूल मनमानी कर रहे हैं। मनमर्जी से किताबें चुनी जा रहीं हैं। कक्षा एक में ही किसी स्कूल में सात तो किसी में 10 पुस्तकें पढ़ाई जा रही हैं। किताबों की कीमतों में भी डेढ़ गुना तक अंतर है। अभिभावक महंगी पढ़ाई कराने के लिए मजबूर हैं।
वार्षिक परीक्षाएं खत्म होने के बाद अब स्कूल परीक्षा परिणाम जारी कर रहे हैं। अगली कक्षा में प्रवेश प्रक्रिया भी जारी है। विद्यार्थियों पर किताबों का बोझ है, अभिभावकों पर उनकी बढ़ती कीमतों का। हर साल किताबों की कीमतों में इजाफा हो जाता है।
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शुक्रवार को अमर उजाला ने पड़ताल की तो पता चला कि अलग-अलग स्कूलों की पुस्तकों की कीमतों में काफी अंतर है। कुछ स्कूल भी अपनी तरफ से कोर्स में किताबें बढ़ा देते हैं। बताया गया कि सारा खेल कमीशन का है। झांसी के कई स्कूल ऐसे हैं जिन्हें जो पुस्तक विक्रेता ज्यादा कमीशन देता है, उसी से किताबें खरीदने के लिए कहते हैं। स्कूल की तरफ से ही पुस्तक विक्रेता के नाम की पर्ची भी अभिभावक को दी जाती है। कहा जाता है कि कोर्स की किताबें वहीं मिलेंगी। कई पुस्तक विक्रेताओं ने भी दुकानों के बाहर स्कूलों के नामों की सूची लगा रखी है।
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मूल्य में अंतर
कक्षा एक दुकान दूसरी दुकान
नर्सरी 950 रुपये 1315 रुपये
1, 2, 3 2000 रुपये 3300 रुपये
4, 5 3500 रुपये 4080 रुपये
6, 7, 8 4000 रुपये 5250 रुपये
बोले अभिभावक
महंगी होती बच्चों की पढ़ाई पर अंकुश लगे। हर साल किताबों की कीमत बढ़ जाती है। स्कूल भी मनमर्जी से किताबें बढ़ा देते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। - निधि अग्रवाल।
इस साल बच्चे का 11वीं में प्रवेश करवाया है। हर साल काफी पैसा बच्चे की पढ़ाई में ही खर्च हो जाता है। किताबें भी लगातार महंगी हो रही हैं। - नेहा गुप्ता
इस बार कागज की कीमत न बढ़ने से पुस्तकों की कीमतों में भी इजाफा नहीं हुआ है। पिछले साल की दर पर ही पुस्तकों की बिक्री की जा रही है। - यज्ञ पाल अरोरा, पुस्तक विक्रेता
वर्जन..
अगर कोई स्कूल किसी भी अभिभावक को किसी खास पुस्तक विक्रेता के यहां से ही किताब खरीदने के लिए कहेगा और शिकायत मिलेगी तो जांच कराकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। - रती वर्मा, डीआईओएस।