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Jhansi: रीजेंट आने के इंतजार में कटा दिन, नहीं हुईं रोगियों की जांचें; जिला अस्पताल में मरीज हो रहे परेशान
Fri, 08 Aug 2025 05:22 PM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: विजय पुंडीर
Updated Fri, 08 Aug 2025 05:22 PM IST
सार
आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि सेंट्रल लैब में खून की जांच करने वाली मशीनों में प्रयुक्त होने वाला रीजेंट खत्म हो गया है, जिसकी वजह से जांचें बंद हो गई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
झांसी जिला अस्पताल की सेंट्रल पैथोलॉजी में खून की जांच कई दिनों से बंद हैं। जिसकी वजह जांच में इस्तेमाल होने वाले रीजेंट (कैमिकल्स) का खत्म होना है। इससे न सिर्फ ओपीडी बल्कि भर्ती रोगियों की जांचें नहीं हो पा रही हैं। उम्मीद थी कि शुक्रवार को रीजेंट आ जाएंगे मगर इंतजार में पूरा दिन कट गया। अफसरों का कहना है कि जब तक रीजेंट नहीं आएगा तब तक जांच शुरू होना संभव नहीं है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना औसतन एक हजार और इमरजेंसी में 145 रोगी उपचार के लिए आते हैं। यही नहीं, रोजाना 60-70 रोगियों को उपचार के लिए भर्ती किया जाता है। रोगियों के प्राथमिक परीक्षण के बाद डॉक्टर खून-पेशाब की जांच या एक्सरे, अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन लिखते हैं। अधिकांश रोगियों के खून की जांच कराई जाती है, जो पिछले करीब 10 दिन से बंद है। जांच बंद होने की वजह से रोगियों को काफी परेशान होना पड़ रहा है। कोई रोगी निजी लैब में जांच कराने के लिए मजबूर है तो कोई महिला जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में जांच करवा रहा है।
आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि सेंट्रल लैब में खून की जांच करने वाली मशीनों में प्रयुक्त होने वाला रीजेंट खत्म हो गया है, जिसकी वजह से जांचें बंद हो गई है। चूंकि इन मशीनों में खास रीजेंट ही प्रयोग होता है, इसलिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्था नहीं हो सकती है। जांचें बंद होने के बाद जिला अस्पताल प्रशासन ने उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर हकीकत से अवगत करावा दिया है।
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एसआईसी डॉ. प्रमोद कटियार ने बताया कि बजट नहीं मिलने की वजह से रीजेंट की आपूर्ति नहीं हो पा रही है जिसकी वजह से जांचें बंद हैं। उच्चाधिकारियों से संपर्क करने से पता चला है कि शनिवार तक रीजेंट आ जाएगा और सोमवार से समुचित रूप से जांच शुरू हो जाएंगी।
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जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना औसतन एक हजार और इमरजेंसी में 145 रोगी उपचार के लिए आते हैं। यही नहीं, रोजाना 60-70 रोगियों को उपचार के लिए भर्ती किया जाता है। रोगियों के प्राथमिक परीक्षण के बाद डॉक्टर खून-पेशाब की जांच या एक्सरे, अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन लिखते हैं। अधिकांश रोगियों के खून की जांच कराई जाती है, जो पिछले करीब 10 दिन से बंद है। जांच बंद होने की वजह से रोगियों को काफी परेशान होना पड़ रहा है। कोई रोगी निजी लैब में जांच कराने के लिए मजबूर है तो कोई महिला जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में जांच करवा रहा है।
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आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि सेंट्रल लैब में खून की जांच करने वाली मशीनों में प्रयुक्त होने वाला रीजेंट खत्म हो गया है, जिसकी वजह से जांचें बंद हो गई है। चूंकि इन मशीनों में खास रीजेंट ही प्रयोग होता है, इसलिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्था नहीं हो सकती है। जांचें बंद होने के बाद जिला अस्पताल प्रशासन ने उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर हकीकत से अवगत करावा दिया है।
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एसआईसी डॉ. प्रमोद कटियार ने बताया कि बजट नहीं मिलने की वजह से रीजेंट की आपूर्ति नहीं हो पा रही है जिसकी वजह से जांचें बंद हैं। उच्चाधिकारियों से संपर्क करने से पता चला है कि शनिवार तक रीजेंट आ जाएगा और सोमवार से समुचित रूप से जांच शुरू हो जाएंगी।