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कोरोना काल में रक्त का अकाल
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Blood short in during corona time
झांसी। कोरोना वायरस के इस दौर में सरकारी अस्पतालों की ब्लड बैंकों में रक्त का अकाल पड़ गया है। चाहें मेडिकल कॉलेज हो या जिला अस्पताल दोनों की ही ब्लड बैंकों में इमरजेंसी यूनिट ब्लड बचा हुआ है। यहां आने वाले कई गंभीर रोगियों को ब्लड न होने की वजह से लौटना पड़ रहा है। इससे मरीजों की जान को भी खतरा बना हुआ है।
कोरोना के चलते लगाए गए लॉकडाउन के पहले जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में हर दिन 50 से 60 यूनिट ब्लड की उपलब्धता रहती थी। पिछले दो महीने से लॉकडाउन होने के कारण कोई भी जांच के लिए नहीं जा पा रहा है। इसके अलावा अस्पतालों की तरफ से भी रक्तदान शिविरों का आयोजन नहीं किया जा पा रहा है। इन वजहों से ब्लड बैंकों में रक्त का टोटा हो गया है। मौजूदा समय में जिला अस्पताल की ब्लड बैंक में सिर्फ आठ यूनिट रक्त बचा हुआ है। जबकि, मेडिकल कॉलेज में दस यूनिट ब्लड है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. एमएस राजपूत और मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. मुरारीलाल आर्य ने लोगों से अपील की है कि मरीजों की जान बचाने के लिए रक्तदान करने के लिए आएं। जिस कक्ष में रक्तदान कराया जाता है, वहां पर लगातार सैनिटाइजेशन के साथ-साथ कोविड-19 के सभी प्रोटोकॉल का पालन होता है। ऐसे में किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है।
इन ग्रुप का रक्त बमुश्किल मिलता
ब्लड के आठ ग्रुप होते हैं। इसमें ओ निगेटिव, ए निगेटिव, बी निगेटिव, एबी निगेटिव ग्रुप के लोग कम होते हैं। ऐसे में इन ग्रुपों का रक्त बहुत मुश्किल से मिल पाता है। इसमें एबी निगेटिव तो बहुत ही मुश्किल से मिलता है। ऐसे में इमरजेंसी में जरूरत पड़ जाए तो डोनर ढूंढे नहीं मिलता। इसलिए ब्लड बैंक में रक्त होने से लोगों की जान बचाई जा सकती है।
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झांसी के बच्चों से बड़ों तक में खून की कमी
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 के अनुसार झांसी में 15 से 49 वर्ष की लगभग 55 प्रतिशत से अधिक महिलाएं खून की कमी से ग्रसित हैं और 6 से 59 माह के लगभग 77 प्रतिशत बच्चे और 15 से 49 वर्ष के लगभग 13 प्रतिशत पुरुष खून की कमी से जूझ रहे है।
ये भी जानें
- अप्रैल से नवंबर 2019 तक 34,603 में 23864 गर्भवती महिलाओं में खून की कमी पाई गई। 1189 में गंभीर खून की कमी मिली।
- अप्रैल 2019 में दिसंबर 2019 तक जनपद में 28 मातृ मृत्यु हो चुकी है। इसमें 11 प्रसव के बाद अधिक रक्तस्त्राव से हुई है।
- डब्ल्यूएचओ की वर्ष 2014 की रिपोर्ट के अनुसार प्रसव के बाद रक्तस्त्राव से 29.6 और एनीमिया से 19 प्रतिशत मातृ मृत्यु का संबंध गर्भावस्था में खून की कमी है।
जिला अस्पताल में 14 को रक्तदान शिविर
- अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस पर जिला अस्पताल में सुबह आठ बजे से स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। हर बार की तरह इस बार भी झांसी वासी शिविर में हिस्सा लेकर लोगों की जान बचाने के लिए रक्तदान कर सकते हैं।
रक्त की हर बूंद बहुत कीमती होती है। रक्त बनाया नहीं जा सकता, इसे सिर्फ दान किया जा सकता है। ऐसे में एक यूनिट रक्तदान कर चार लोगों की जान बचाई जा सकती है। अमर उजाला फाउंडेशन हर साल विश्व रक्तदान दिवस पर जिला अस्पताल में रक्तदान शिविर का आयोजन करता रहा है। इस बार भी 14 जून को सुबह आठ बजे से जिला अस्पताल में रक्तदान शिविर लगेगा। इस शिविर में कोई भी व्यक्ति शामिल होकर रक्तदान कर सकता है। चूंकि, इस समय ब्लड बैंक भी लगभग खाली होने को हैं, ऐसे में रक्तदान करना बहुत जरूरी है। ताकि, रक्त की कमी से किसी की जान न जा पाए।
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कोरोना के चलते लगाए गए लॉकडाउन के पहले जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में हर दिन 50 से 60 यूनिट ब्लड की उपलब्धता रहती थी। पिछले दो महीने से लॉकडाउन होने के कारण कोई भी जांच के लिए नहीं जा पा रहा है। इसके अलावा अस्पतालों की तरफ से भी रक्तदान शिविरों का आयोजन नहीं किया जा पा रहा है। इन वजहों से ब्लड बैंकों में रक्त का टोटा हो गया है। मौजूदा समय में जिला अस्पताल की ब्लड बैंक में सिर्फ आठ यूनिट रक्त बचा हुआ है। जबकि, मेडिकल कॉलेज में दस यूनिट ब्लड है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. एमएस राजपूत और मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. मुरारीलाल आर्य ने लोगों से अपील की है कि मरीजों की जान बचाने के लिए रक्तदान करने के लिए आएं। जिस कक्ष में रक्तदान कराया जाता है, वहां पर लगातार सैनिटाइजेशन के साथ-साथ कोविड-19 के सभी प्रोटोकॉल का पालन होता है। ऐसे में किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है।
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इन ग्रुप का रक्त बमुश्किल मिलता
ब्लड के आठ ग्रुप होते हैं। इसमें ओ निगेटिव, ए निगेटिव, बी निगेटिव, एबी निगेटिव ग्रुप के लोग कम होते हैं। ऐसे में इन ग्रुपों का रक्त बहुत मुश्किल से मिल पाता है। इसमें एबी निगेटिव तो बहुत ही मुश्किल से मिलता है। ऐसे में इमरजेंसी में जरूरत पड़ जाए तो डोनर ढूंढे नहीं मिलता। इसलिए ब्लड बैंक में रक्त होने से लोगों की जान बचाई जा सकती है।
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झांसी के बच्चों से बड़ों तक में खून की कमी
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 के अनुसार झांसी में 15 से 49 वर्ष की लगभग 55 प्रतिशत से अधिक महिलाएं खून की कमी से ग्रसित हैं और 6 से 59 माह के लगभग 77 प्रतिशत बच्चे और 15 से 49 वर्ष के लगभग 13 प्रतिशत पुरुष खून की कमी से जूझ रहे है।
ये भी जानें
- अप्रैल से नवंबर 2019 तक 34,603 में 23864 गर्भवती महिलाओं में खून की कमी पाई गई। 1189 में गंभीर खून की कमी मिली।
- अप्रैल 2019 में दिसंबर 2019 तक जनपद में 28 मातृ मृत्यु हो चुकी है। इसमें 11 प्रसव के बाद अधिक रक्तस्त्राव से हुई है।
- डब्ल्यूएचओ की वर्ष 2014 की रिपोर्ट के अनुसार प्रसव के बाद रक्तस्त्राव से 29.6 और एनीमिया से 19 प्रतिशत मातृ मृत्यु का संबंध गर्भावस्था में खून की कमी है।
जिला अस्पताल में 14 को रक्तदान शिविर
- अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस पर जिला अस्पताल में सुबह आठ बजे से स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। हर बार की तरह इस बार भी झांसी वासी शिविर में हिस्सा लेकर लोगों की जान बचाने के लिए रक्तदान कर सकते हैं।
रक्त की हर बूंद बहुत कीमती होती है। रक्त बनाया नहीं जा सकता, इसे सिर्फ दान किया जा सकता है। ऐसे में एक यूनिट रक्तदान कर चार लोगों की जान बचाई जा सकती है। अमर उजाला फाउंडेशन हर साल विश्व रक्तदान दिवस पर जिला अस्पताल में रक्तदान शिविर का आयोजन करता रहा है। इस बार भी 14 जून को सुबह आठ बजे से जिला अस्पताल में रक्तदान शिविर लगेगा। इस शिविर में कोई भी व्यक्ति शामिल होकर रक्तदान कर सकता है। चूंकि, इस समय ब्लड बैंक भी लगभग खाली होने को हैं, ऐसे में रक्तदान करना बहुत जरूरी है। ताकि, रक्त की कमी से किसी की जान न जा पाए।