{"_id":"61157d0d8ebc3e769d17b83c","slug":"biotechs-play-an-important-role-in-the-discovery-of-cures-for-diseases-jhansi-news-jhs2018209159","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीमारियों के इलाज की खोज में अहम भूमिका निभाते हैं बायोटेक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीमारियों के इलाज की खोज में अहम भूमिका निभाते हैं बायोटेक
विज्ञापन
झांसी। आधुनिक दौर में नई-नई बीमारियां जन्म ले रही हैं। दूषित खान-पान और बिगड़ती दिनचर्या से बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। कोरोना संक्रमण के दौर में बीमारियों के इलाज की खोज को लेकर प्राथमिकता दी जा रही है। इसके लिए बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई अहम है। इसमें रोजगार की अपार संभावनाएं हैं।
जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी) में विद्यार्थी कोशिकीय विज्ञान, माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, नैनोटेक इंजीनियरिंग, जेनेटिक्स, मोलिकुलर बायोलॉजी, इम्यूनोलॉजी, टिशु कल्चर में ज्ञान अर्जित कर रोजगार के अनेकों अवसर प्राप्त कर सकता है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. जोश मैथ्यूज ने बताया कि जैव प्रौद्योगिकी उत्पादों को बेहतर बनाने की कला है। इसमें जीन विकास, कृषि उत्पादन को बढ़ाना, बीमारियों की रोकथाम, उनकी दवा और वैक्सीन का उत्पादन करने की शिक्षा दी जाती है। स्वास्थ्य क्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न प्रयोगशालाओं में कार्य करने के लिए कुशल जैव वैज्ञानिक बनकर करियर बनाया जा सकता है। जैव प्रौद्योगिकी के छात्र यूजीसी, जेआरएफ एवं सीएसआईआर की फेलोशिप प्राप्त कर पीएचडी की डिग्री प्राप्त कर सकते हैं। जिससे यूएसए, यूके और ऑस्ट्रेलिया में पोस्ट डॉक्टोरल फैलोशिप प्राप्त की जा सकती है।
यहां मिल सकती है नौकरी
बायोटेक्नोलॉजी में योग्यता अनुसार सरकारी एवं गैर सरकारी नौकरी के कई बेहतर विकल्प उपलब्ध हैं। वैज्ञानिक, लेक्चरर, फ ार्मास्यूटिकल कंपनी, रिसर्च एवं डायग्नोस्टिक कंपनी, फू ड मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्री, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, मेडिकल एवं साइंटिफि क इंस्टरूमेंट कंपनी, लैब टेक्नीशियन एवं रिसर्च एसोसिएट की नौकरी मिलती है। इसके अलावा पैथोलॉजी, कंफेक्शनरी, डिस्टलरी, सीएसआईआरए रिसर्च एंड डेवलपमेंट, आईसीएआर, आईसीएमआर प्रयोगशाला आदि के क्षेत्र में भी छात्र काम कर सकते हैं।
विज्ञापन
पाठ्यक्रम
एमएससी बायोटेक्नोलॉजी
योग्यता: बीएससी (बायो) 50 अंकों के साथ।
चयन प्रक्रिया: प्रवेश परीक्षा।
अवधि= दो साल
बीएससी बायोटेक्नोलॉजी
योग्यता: 12वीं (बायो) 50 फीसदी अंकों के साथ।
चयन प्रक्रिया: 12 वीं की मेरिट के आधार पर
अवधि: तीन साल।
विज्ञापन
जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी) में विद्यार्थी कोशिकीय विज्ञान, माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, नैनोटेक इंजीनियरिंग, जेनेटिक्स, मोलिकुलर बायोलॉजी, इम्यूनोलॉजी, टिशु कल्चर में ज्ञान अर्जित कर रोजगार के अनेकों अवसर प्राप्त कर सकता है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. जोश मैथ्यूज ने बताया कि जैव प्रौद्योगिकी उत्पादों को बेहतर बनाने की कला है। इसमें जीन विकास, कृषि उत्पादन को बढ़ाना, बीमारियों की रोकथाम, उनकी दवा और वैक्सीन का उत्पादन करने की शिक्षा दी जाती है। स्वास्थ्य क्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न प्रयोगशालाओं में कार्य करने के लिए कुशल जैव वैज्ञानिक बनकर करियर बनाया जा सकता है। जैव प्रौद्योगिकी के छात्र यूजीसी, जेआरएफ एवं सीएसआईआर की फेलोशिप प्राप्त कर पीएचडी की डिग्री प्राप्त कर सकते हैं। जिससे यूएसए, यूके और ऑस्ट्रेलिया में पोस्ट डॉक्टोरल फैलोशिप प्राप्त की जा सकती है।
विज्ञापन
यहां मिल सकती है नौकरी
बायोटेक्नोलॉजी में योग्यता अनुसार सरकारी एवं गैर सरकारी नौकरी के कई बेहतर विकल्प उपलब्ध हैं। वैज्ञानिक, लेक्चरर, फ ार्मास्यूटिकल कंपनी, रिसर्च एवं डायग्नोस्टिक कंपनी, फू ड मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्री, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, मेडिकल एवं साइंटिफि क इंस्टरूमेंट कंपनी, लैब टेक्नीशियन एवं रिसर्च एसोसिएट की नौकरी मिलती है। इसके अलावा पैथोलॉजी, कंफेक्शनरी, डिस्टलरी, सीएसआईआरए रिसर्च एंड डेवलपमेंट, आईसीएआर, आईसीएमआर प्रयोगशाला आदि के क्षेत्र में भी छात्र काम कर सकते हैं।
विज्ञापन
पाठ्यक्रम
एमएससी बायोटेक्नोलॉजी
योग्यता: बीएससी (बायो) 50 अंकों के साथ।
चयन प्रक्रिया: प्रवेश परीक्षा।
अवधि= दो साल
बीएससी बायोटेक्नोलॉजी
योग्यता: 12वीं (बायो) 50 फीसदी अंकों के साथ।
चयन प्रक्रिया: 12 वीं की मेरिट के आधार पर
अवधि: तीन साल।