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बिना कोविड जांच के रेमडेसिवीर लगाने के संदेह में प्रशासन ने मेडिकल स्टोरों से तलब किया ब्योरा, गलती मिलने पर नर्सिंगहोम पर होगी कार्रवाई
Tue, 05 Jan 2021 02:08 AM IST
झांसी ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 05 Jan 2021 02:08 AM IST
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रेमडेसिविर दवा
- फोटो : social media
कोविड मरीज की मौत के बाद मेडिकल कॉलेज निजी अस्पताल कटघरे में है। बिना कोरोना वायरस की जांच के रेमडेसिविर लगाने के संदेह में प्रशासन ने मेडिकल स्टोरों से ब्योरा तलब किया गया है। यदि गलती मिली तो नर्सिंगहोम पर कार्रवाई तय है।
मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित निजी अस्पताल में बीते 22 दिसंबर को एक मरीज भर्ती किया गया। निजी अस्पताल ने पांच दिन बाद यानी 27 दिसंबर को मरीज को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। लगभग एक सप्ताह तक पॉजिटिव होने और मरीज की हालत बेहद खराब होने के बावजूद अस्पताल की तरफ से मरीज की कोरोना की जांच तक नहीं कराई।
जिला प्रशासन की तरफ से जारी कार्यालय आदेश में इसका जिक्र करते हुए कहा गया है कि शासन द्वारा पूर्व में सभी निजी अस्पतालों में भर्ती गंभीर मरीजों का शत-प्रतिशत आरटीपीसीआर अथवा एंटीजन सैंपल अनिवार्य रूप से कराने के निर्देश दिए गए हैं मगर उक्त अस्पताल प्रबंधन द्वारा ऐसा नहीं किया गया है। यह कृत्य बेहद गंभीर प्रकृति के हैं। इसकी जांच कराना जरूरी है। इस प्रकरण में अस्पताल द्वारा की गई लापरवाही के संबंध में जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है।
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इसी बीच, अधिकारियों को यह भी संदेह हुआ कि नर्सिंगहोम ने मरीज को रेमडेसिविर का इंजेक्शन भी लगाया है। ऐसे में झांसी के चार नर्सिंगहोम समेत थोक विक्रेताओं से भी इंजेक्शन की बिक्री के संबंध में ब्योरा मांग गया है। रिकॉर्ड में यदि उक्त नर्सिंगहोम में भर्ती रहे मरीज का नाम सामने आता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
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मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित निजी अस्पताल में बीते 22 दिसंबर को एक मरीज भर्ती किया गया। निजी अस्पताल ने पांच दिन बाद यानी 27 दिसंबर को मरीज को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। लगभग एक सप्ताह तक पॉजिटिव होने और मरीज की हालत बेहद खराब होने के बावजूद अस्पताल की तरफ से मरीज की कोरोना की जांच तक नहीं कराई।
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जिला प्रशासन की तरफ से जारी कार्यालय आदेश में इसका जिक्र करते हुए कहा गया है कि शासन द्वारा पूर्व में सभी निजी अस्पतालों में भर्ती गंभीर मरीजों का शत-प्रतिशत आरटीपीसीआर अथवा एंटीजन सैंपल अनिवार्य रूप से कराने के निर्देश दिए गए हैं मगर उक्त अस्पताल प्रबंधन द्वारा ऐसा नहीं किया गया है। यह कृत्य बेहद गंभीर प्रकृति के हैं। इसकी जांच कराना जरूरी है। इस प्रकरण में अस्पताल द्वारा की गई लापरवाही के संबंध में जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है।
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इसी बीच, अधिकारियों को यह भी संदेह हुआ कि नर्सिंगहोम ने मरीज को रेमडेसिविर का इंजेक्शन भी लगाया है। ऐसे में झांसी के चार नर्सिंगहोम समेत थोक विक्रेताओं से भी इंजेक्शन की बिक्री के संबंध में ब्योरा मांग गया है। रिकॉर्ड में यदि उक्त नर्सिंगहोम में भर्ती रहे मरीज का नाम सामने आता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।