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भितराघात की आशंका ने उड़ाई दिग्गजों की नींद

Fri, 02 Apr 2021 01:34 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 02 Apr 2021 01:34 AM IST
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big leader are worry about sabotage
झांसी। जिला पंचायत सदस्य सीट की उम्मीदवारी को लेकर सभी राजनीतिक दलों में इन दिनों जमकर घमासान छिड़ा है। सत्तारूढ़ दल भाजपा समेत सपा, बसपा, कांग्रेस पूरे दमखम के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं लेकिन, भितरघात की आशंका ने सभी दलों के दिग्गजों की नींद उड़ा रखी है। इसी वजह से सभी दल फूंक-फूंककर कदम उठा रहे हैं। उम्मीदवारी घोषित करने में भी देरी हो रही है।
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सियासी रसूख तय होने से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर सभी राजनीतिक दलों की निगाह है। इसका रास्ता जिपं सदस्यों की जीत से होकर जाएगा। राजनीतिक दल सिर्फ जिपं चुनाव में ही शिरकत कर रहे हैं, इस लिहाज से उनके लिए इसे अगामी विधानसभा का सेमीफाइनल भी माना जा रहा। समर्थित उम्मीदवार चुनने की जिम्मेदारी पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों को सौंपी गई है। भाजपा में स्थानीय पदाधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधियों को भी दायित्व दिया गया है। चुनाव में प्रदर्शन के लिहाज से उनका राजनीतिक कद तय होगा लेकिन, बेहद छोटा चुनाव होने के नाते एक-एक सीट पर 20-20 पार्टी कार्यकर्ता दावेदारी जता रहे हैं। सत्तारूढ़ दल भाजपा के अलावा सपा, बसपा, कांग्रेस में भी कार्यकर्ताओं के बीच समर्थन के लिए मारामारी है।
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पार्टी निशान के साथ कोई भी उम्मीदवार चुनावी मैदान में नहीं होगा लेकिन, समर्थन हासिल करने के लिए भी कार्यकर्ता एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं। समर्थित उम्मीदवार चुनने में सबसे अधिक संकट भाजपा के सामने है। कुछ समय बाद विधानसभा चुनाव होने को हैं। ऐसे में यहां विधायक भी पशोपेश में फंसे हैं। जिसका नाम तय होगा, उसे छोड़ अधिकांश के बागी हो जाने का खतरा है। ऐसे में उम्मीदवार जिता पाना भी सरल नहीं होगा। वहीं, विधानसभा चुनाव के दौरान भी यह बागी अलग चुनौती पेश कर सकते हैं। भितरघात की आशंका से सभी सहमे हुए हैं। वहीं, झांसी जिपं अध्यक्ष सीट के अनुसूचित जाति में आरक्षित होने से भी नए समीकरण तेजी से बने हैं। नए आरक्षण की वजह से जिला पंचायत की राजनीति के कई पुराने खिलाड़ी पहले ही बाहर हो गए। मोंठ ब्लॉक की तीनों सीटें ही अनुसूचित जाति के खाते में चली गईं। इन सबके चलते अब ज्यादातर खेल परदे के पीछे चला गया है।
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