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शिक्षक भर्ती में पहले भी पकड़ा जा चुका है बड़ा फर्जीवाड़ा

Sun, 21 Aug 2022 12:29 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 21 Aug 2022 12:29 AM IST
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Big fraud has already been caught in teacher recruitment
झांसी। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती में चार साल पहले भी बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा गया था। फर्जी नियुक्ति पत्रों के सहारे 100 लोगों ने नौकरी हासिल कर ली थी। तब शुरुआत में खुलासा मथुरा से हुआ था और इसके बाद सूबे के कई जनपदों में नेटवर्क पकड़ा गया था। इसी तरह से झांसी में पांच फर्जी शिक्षक पकड़े जाने के बाद इसके तार अन्य जनपदों से जुड़े होने की भी संभावनाएं जताई जा रहीं हैं। सभी जनपदों में रिकॉर्ड खंगाले जाने लगे हैं।
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झांसी के तीन राजकीय हाईस्कूलों में पांच शिक्षक ऐसे पकड़े गए हैं, जिन्होंने फर्जी नियुक्ति पत्रों के आधार पर नौकरी हासिल कर ली थी। ये शिक्षक पिछले एक महीने से विद्यालयों में धड़ल्ले से अध्यापन कार्य भी करते आ रहे थे। इसके साथ ही माध्यमिक शिक्षा विभाग ने अपनी जांच का दायरा प्रदेश के अन्य जनपदों में भी फैला दिया है। खासतौर पर छह जनवरी 2022 के बाद तैनाती पाने वाले शिक्षकों को तलाशा जा रहा है। क्योंकि, विभाग ने इस तिथि के बाद प्रदेश के किसी भी राजकीय स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती नहीं की है। इतना ही नहीं, चार साल पहले 2018 में सामने आए थे शिक्षक भर्ती घोटाले को ध्यान में रखकर इसके पूरे नेटवर्क को खंगालना शुरू कर दिया गया है। तब सबसे पहले मथुरा में फर्जी नियुक्ति पत्रों के सहारे स्कूलों में नौकरी हासिल करने वालों को पकड़ा गया था। एसटीएफ द्वारा जांच का दायरा बढ़ाने पर इस फर्जीबाड़े के तार हाथरस, अलीगढ़, एटा, मैनपुरी आदि जनपदों तक पहुंच गए थे। 110 फर्जी नियुक्ति पत्र पाए गए थे, जिनके सहारे 100 ने नौकरी भी हासिल कर ली थी। इस पूरे मामले में 24 की गिरफ्तारी हुई थी। ऐसा ही फर्जीवाड़ा माध्यमिक शिक्षकों की तैनाती में सामने आने की संभावनाएं जताई जा रहीं हैं। इसकी पड़ताल तेजी से की जाने लगी है।
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गैंग ने निदेशालय नहीं पहुंचने दी चार की रिपोर्ट
झांसी। जिले में फर्जी नियुक्ति पत्र के सहारे पांच शिक्षकों ने नौकरी हासिल की थी। शिक्षा विभाग के नियमों के मुताबिक ज्वाइनिंग के बाद शिक्षकों की रिपोर्ट माध्यमिक शिक्षा निदेशालय भेजी जाती है। लेकिन, झांसी में तैनात हुए पांच में से महज एक शिक्षक की ही रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय पहुंची। माना जा रहा है कि बाकी चार की रिपोर्ट इस फर्जीवाड़े में शामिल गैंग ने दबवा दी थी। गलती से एक रिपोर्ट निदेशालय पहुंची, जिससे फर्जीवाड़ा खुल गया। इस मामले में डीआईओएस आफिस से लेकर निदेशालय तक के बाबू शक के दायरे में हैं। इनकी भी जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस पड़ताल कर रही है कि कौन कौन इसमें शामिल हैं।
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