फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   bhootnath temple jhansi

काशी में विश्वनाथ, तो झांसी में हैं भूतनाथ

Mon, 17 Feb 2020 12:00 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 17 Feb 2020 12:00 PM IST
विज्ञापन
bhootnath temple jhansi
बाबा भूतनाथ का प्राचीन मंदिर - फोटो : अमर उजाला

शहर के श्रद्धालुओं में भूतनाथ मंदिर का प्रमुख स्थान है। कहते हैं, कि काशी में विश्वनाथ, तो झांसी में हैं भूतनाथ। मान्यता है, कि यह मंदिर लगभग चार सौ वर्ष पुराना है। साथ ही, महाशिवरात्रि के पर्व पर दो सौ वर्षों से लगातार भगवान शिव की बरात निकाली जा रही है। इस साल भी भगवान भूतनाथ की भव्य बरात निकाली जाएगी। इसमें ब्रह्मा, विष्णु सहित सभी देवी देवता व भूत, गण के स्वरूप बराती होेंगे।

विज्ञापन


लक्ष्मी तालाब के तट पर स्थित भूतनाथ मंदिर कई मान्यताएं हैं। पुजारी राजकुमार मकड़ारिया ने बताया कि इस मंदिर की स्थापना कब हुई, यह पता नहीं है। लेकिन मान्यता है, कि यह लगभग चार सौ वर्ष पुराना मंदिर है। यहां नंदी जोड़ी में है और भगवान गणेश की प्रतिमाएं भी दो हैं, जिनकी सूढ़ अलग -अलग दिशाओं में है। शिवलिंग की जल लहरी चौकोर है, जबकि अन्य सभी मंदिरों में गोलाकार होती है। साथ ही सिद्ध बाबा की गुफा भी है। नागपंचमी पर श्रद्धालु विशेष पूजा अर्चना करते हैं। उनके अनुसार स्वास्थ्य लाभ के लिए श्रद्धालुओं द्वारा कई अनुष्ठान मंदिर में कराए जाते हैं। 11 सोमवार दर्शन करने की भी मान्यता है।

विज्ञापन

बनारस के विद्वान कराएंगे विवाह

21 फरवरी को भूतनाथ मंदिर से भव्य बरात दोपहर में पूजा अर्चना के बाद निकाली जाएगी। इसमें देवता, गण, भूत आदि के स्वरूप बाराती होंगे। रात में भगवान शिव व पार्वती के विवाह के मंत्र बनारस के विद्वान पढे़ंगे। रात्रि के चार प्रहर में पूजा आरती होगी। विवाह के सात वचनों के आह्वान के बाद विवाह कार्यक्रम का समापन होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

श्मशान की भस्म चढ़ाई जाती थी

कभी भगवान भूतनाथ को श्मशान की भस्म चढ़ाई जाती थी। श्मशान मंदिर से ही कुछ दूरी पर था। लेकिन अब यह धार्मिक परंपरा लगभग कुछ महत्वपूर्ण अवसरों पर सिमट कर रह गई है। पुजारी राजकुमार के अनुसार अब अभिषेक दूध, दही, शहद, गंगाजल आदि से अर्पित होता है। मंदिर के मुख्य द्वार से लगे बरगद के वृक्ष पर आज भी कई लोग मनुष्य की मृत्यु के उपरांत संस्कार करते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed