{"_id":"5f495ecd8ebc3e3d0f45a363","slug":"bharat-ratan-for-major-dhayanchand-jhansi-news-jhs1749301161","type":"story","status":"publish","title_hn":"हॉकी के जादूगर दद्दा ध्यानचंद को मिले भारत रत्न","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हॉकी के जादूगर दद्दा ध्यानचंद को मिले भारत रत्न
विज्ञापन
मेजर ध्यानचंद के पुत्र अशोक ध्यानचंद
- फोटो : REPORTERS
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। खेल दिवस के मौके पर हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की कर्मभूमि झांसी में गजब का उत्साह है। कोरोना काल में भी यहां के युवा हॉकी समेत अन्य खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए अपने स्तर पर तैयारी कर रहे हैं। उधर, पूर्व ओलंपियन तथा हॉकी के दिग्गज खिलाड़ी अशोक ध्यानचंद ने कहा कि मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न मिले, यह इस देश की जनता की मांग है। उन्होंने कहा कि आज देश-विदेश के खेल प्रेमी मेजर ध्यानचंद के खेल के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना चाहते हैं।
मेजर ध्यानचंद के सुपुत्र अशोक ध्यानचंद ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि आज सभी खेल प्रेमी मेजर ध्यानचंद और उनकी हॉकी को उत्सुकता से जान रहे हैं। इस संबंध में शोध भी हो चुके हैं। उनके अनुसार हॉकी जादूगर को भारत रत्न मिले। यह इस देश की जनता की मांग है। देश के चार खेल मंत्रियों अजय माकन, जितेंद्र सिंह, विजय गोयल और राज्यवर्धन सिंह राठौर अनुमोदन कर चुके हैं। राज्यसभा में भारत रत्न को लेकर प्रस्ताव भी पारित हो चुका है। यह भी जनता की आवाज है। पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी ने हीरोज मैदान पर एस्ट्रोटर्फ तैयार करने का सुझाव दिया। उनके अनुसार जेडीए ने उनसे दद्दा ध्यानचंद की अष्टधातु की प्रतिमा लगाने को लेकर सहमति मांगी है।
इसलिए महान हैं दद्दा
... मेजर ध्यानचंद के नाम पर भारत सरकार लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड तथा अन्य राज्य सरकारें खिलाड़ियों को सम्मान प्रदान करती हैं।
... ओलंपिक में 39 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 400 और घरेलू मैचों में 1000 से अधिक गोल किए हैं।
.... दद्दा ध्यानचंद भारत की एकमात्र वह खिलाड़ी है जिन्होंने लगातार तीन ओलंपिक खेलों में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया।
.. भारत सरकार ने मेजर ध्यानचंद पर डाक टिकट भी जारी किया हुआ है।
.... दद्दा ध्यानचंद की जयंती देश में खेल दिवस के रूप में मनाई जाती है।
- जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर और क्रिकेट के जादूगर डॉन ब्रैडमैन भी इनके खेल के मुरीद थे।
.... 1936 के बर्लिन ओलंपिक में मेजर ध्यानचंद ने फाइनल मैच में तिरंगा और वंदे मातरम की संकल्प ली थी।
... मेजर ध्यानचंद दुनिया के ऐसे खिलाड़ी थे, जिन्होंने ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय कैरियर में कोई मैच नहीं आ रहा।
... मेजर ध्यानचंद का जन्म इलाहाबाद में हुआ था। इनके भाई रूप सिंह भी देश के महान खिलाड़ी रहे हैं।
... 1956 को देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मेजर ध्यानचंद को पदम भूषण से सम्मानित किया था।
विज्ञापन
मेजर ध्यानचंद के सुपुत्र अशोक ध्यानचंद ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि आज सभी खेल प्रेमी मेजर ध्यानचंद और उनकी हॉकी को उत्सुकता से जान रहे हैं। इस संबंध में शोध भी हो चुके हैं। उनके अनुसार हॉकी जादूगर को भारत रत्न मिले। यह इस देश की जनता की मांग है। देश के चार खेल मंत्रियों अजय माकन, जितेंद्र सिंह, विजय गोयल और राज्यवर्धन सिंह राठौर अनुमोदन कर चुके हैं। राज्यसभा में भारत रत्न को लेकर प्रस्ताव भी पारित हो चुका है। यह भी जनता की आवाज है। पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी ने हीरोज मैदान पर एस्ट्रोटर्फ तैयार करने का सुझाव दिया। उनके अनुसार जेडीए ने उनसे दद्दा ध्यानचंद की अष्टधातु की प्रतिमा लगाने को लेकर सहमति मांगी है।
विज्ञापन
इसलिए महान हैं दद्दा
... मेजर ध्यानचंद के नाम पर भारत सरकार लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड तथा अन्य राज्य सरकारें खिलाड़ियों को सम्मान प्रदान करती हैं।
... ओलंपिक में 39 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 400 और घरेलू मैचों में 1000 से अधिक गोल किए हैं।
.... दद्दा ध्यानचंद भारत की एकमात्र वह खिलाड़ी है जिन्होंने लगातार तीन ओलंपिक खेलों में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया।
.. भारत सरकार ने मेजर ध्यानचंद पर डाक टिकट भी जारी किया हुआ है।
.... दद्दा ध्यानचंद की जयंती देश में खेल दिवस के रूप में मनाई जाती है।
- जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर और क्रिकेट के जादूगर डॉन ब्रैडमैन भी इनके खेल के मुरीद थे।
.... 1936 के बर्लिन ओलंपिक में मेजर ध्यानचंद ने फाइनल मैच में तिरंगा और वंदे मातरम की संकल्प ली थी।
... मेजर ध्यानचंद दुनिया के ऐसे खिलाड़ी थे, जिन्होंने ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय कैरियर में कोई मैच नहीं आ रहा।
... मेजर ध्यानचंद का जन्म इलाहाबाद में हुआ था। इनके भाई रूप सिंह भी देश के महान खिलाड़ी रहे हैं।
... 1956 को देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मेजर ध्यानचंद को पदम भूषण से सम्मानित किया था।