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Jhansi News: रहना सावधान...गाज ने एक साल में ले ली 192 लोगों की जान
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बारिश के मौसम में बुंदेलखंड के ग्रामीण क्षेत्रों से सर्वाधिक सामने आती हैं घटनाएं
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड में गाज गिरने से एक साल में 192 लोगों की जान चली गई। इसके अलावा न जाने कितने जानवर मर गए। बारिश का मौसम फिर से शुरू हो गया है। ऐसे में सतर्कता से ही इस दैवीय आपदा से जान बचाई जा सकती है।
मऊरानीपुर का किसान किशोरी पाल दिन में अपने खेत पर काम कर रहा था। इसी दरम्यान बारिश शुरू हो गई, जिससे बचने के लिए वह खेत की मेड़ पर लगे पेड़ के नीचे खड़ा हो गया। इसी बीच तेज गरज के साथ आसमान में बिजली चमकने लगी। इससे पहले कि वह कुछ समझा पाता, गाज पेड़ पर आकर गिर गई, जिसकी चपेट में आकर किशोरी पाल की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि, पेड़ भी बुरी तरह से झुलस गया था।
बारिश के मौसम में बुंदेलखंड में गाज गिरने की घटनाएं बेहद आम हैं। पिछले एक साल के दरम्यान ही क्षेत्र के सात जिलों में 192 लोग गाज की चपेट में आकर अपनी जान गवां चुके हैं। इनमें ललितपुर में 22, झांसी में 13, जालौन में 31, बांदा में 29, हमीरपुर में 33, चित्रकूट में 30 और महोबा जनपद में 34 लोगों की जान गई। बारिश का मौसम शुरू होने के साथ ही एक बार फिर इस आसमानी आफत का खतरा मंडराने लगा है।
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गाज गिरने से बचने के लिए यह करें उपाय
- पेड़, खिड़की के कांच, टिन की छत, गीले सामान व लोहे के हैंडलों से दूर रहें।
- तरणताल, नदी या तालाब में नहा रहे हों तो तत्काल बाहर निकल जाएं।
- यात्रा के दरम्यान अपने वाहन के शीशे चढ़ाकर रखें।
-बिजली कड़कते समय खुली छत वाले वाहनों में सवारी न करें।
- बारिश के समय खेतों, खुले मैदानों या पेड़ों के पास न जाएं, क्योंकि इनके आसपास गाज गिरने की सबसे ज्यादा संभावना होती है।
- आकाश में बिजली चमकने के दौरान सिर के बाल खड़े हो जाएं या त्वचा में झुनझुनी होने लगे तो समझ जाएं कि पास में गाज गिरने वाली है। ऐसे में उस स्थान से तुरंत हट जाएं।
चार लाख का मिलता है मुआवजा
झांसी। गाज गिरने से मृत व्यक्ति के आश्रितों को सरकार की ओर से चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। लेकिन, इसके लिए घटना के बाद तहसील प्रशासन को सूचना देना जरूरी होता है। साथ ही शव का पोस्टमार्टम भी अनिवार्य रूप से कराना पड़ता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गाज से मौत होने का कारण स्पष्ट होने पर मृतक के आश्रित के खाते में पैसा हस्तांतरित कर दिया जाता है।
गाज गिरने से मौत होने पर संबंधित व्यक्ति के आश्रितों को सरकार की ओर से चार लाख रुपये का मुआवजा उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए पोस्टमार्टम कराना जरूरी होता है। साथ ही संबंधित तहसील की रिपोर्ट भी ली जाती है। - आरएस वर्मा, अपर जिलाधिकारी
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड में गाज गिरने से एक साल में 192 लोगों की जान चली गई। इसके अलावा न जाने कितने जानवर मर गए। बारिश का मौसम फिर से शुरू हो गया है। ऐसे में सतर्कता से ही इस दैवीय आपदा से जान बचाई जा सकती है।
मऊरानीपुर का किसान किशोरी पाल दिन में अपने खेत पर काम कर रहा था। इसी दरम्यान बारिश शुरू हो गई, जिससे बचने के लिए वह खेत की मेड़ पर लगे पेड़ के नीचे खड़ा हो गया। इसी बीच तेज गरज के साथ आसमान में बिजली चमकने लगी। इससे पहले कि वह कुछ समझा पाता, गाज पेड़ पर आकर गिर गई, जिसकी चपेट में आकर किशोरी पाल की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि, पेड़ भी बुरी तरह से झुलस गया था।
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बारिश के मौसम में बुंदेलखंड में गाज गिरने की घटनाएं बेहद आम हैं। पिछले एक साल के दरम्यान ही क्षेत्र के सात जिलों में 192 लोग गाज की चपेट में आकर अपनी जान गवां चुके हैं। इनमें ललितपुर में 22, झांसी में 13, जालौन में 31, बांदा में 29, हमीरपुर में 33, चित्रकूट में 30 और महोबा जनपद में 34 लोगों की जान गई। बारिश का मौसम शुरू होने के साथ ही एक बार फिर इस आसमानी आफत का खतरा मंडराने लगा है।
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गाज गिरने से बचने के लिए यह करें उपाय
- पेड़, खिड़की के कांच, टिन की छत, गीले सामान व लोहे के हैंडलों से दूर रहें।
- तरणताल, नदी या तालाब में नहा रहे हों तो तत्काल बाहर निकल जाएं।
- यात्रा के दरम्यान अपने वाहन के शीशे चढ़ाकर रखें।
-बिजली कड़कते समय खुली छत वाले वाहनों में सवारी न करें।
- बारिश के समय खेतों, खुले मैदानों या पेड़ों के पास न जाएं, क्योंकि इनके आसपास गाज गिरने की सबसे ज्यादा संभावना होती है।
- आकाश में बिजली चमकने के दौरान सिर के बाल खड़े हो जाएं या त्वचा में झुनझुनी होने लगे तो समझ जाएं कि पास में गाज गिरने वाली है। ऐसे में उस स्थान से तुरंत हट जाएं।
चार लाख का मिलता है मुआवजा
झांसी। गाज गिरने से मृत व्यक्ति के आश्रितों को सरकार की ओर से चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। लेकिन, इसके लिए घटना के बाद तहसील प्रशासन को सूचना देना जरूरी होता है। साथ ही शव का पोस्टमार्टम भी अनिवार्य रूप से कराना पड़ता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गाज से मौत होने का कारण स्पष्ट होने पर मृतक के आश्रित के खाते में पैसा हस्तांतरित कर दिया जाता है।
गाज गिरने से मौत होने पर संबंधित व्यक्ति के आश्रितों को सरकार की ओर से चार लाख रुपये का मुआवजा उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए पोस्टमार्टम कराना जरूरी होता है। साथ ही संबंधित तहसील की रिपोर्ट भी ली जाती है। - आरएस वर्मा, अपर जिलाधिकारी