{"_id":"64b97a356de651688803a897","slug":"batteries-of-all-vande-bharat-trains-will-be-tested-jhansi-news-c-11-1-jhs1002-138415-2023-07-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhansi News: सभी वंदे भारत ट्रेनों की बैटरियों की होगी जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhansi News: सभी वंदे भारत ट्रेनों की बैटरियों की होगी जांच
विज्ञापन
- तीन दिन पहले रानी कमलापति स्टेशन से झांसी आ रही वंदे भारत में लग गई थी आग
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। भोपाल के रानी कमलापति स्टेशन से चलकर झांसी आ रही वंदे भारत की बैटरी में आग लगने की घटना के बाद अब सभी वंदे भारत ट्रेनों में लगी बैटरियों की जांच की जाएगी। इस संबंध में रेलवे बोर्ड की ओर से निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
सोमवार को रानी कमलापति स्टेशन से चलकर झांसी आ रही मध्य प्रदेश की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस के कोच सी-14 में आग लग गई थी। आग कोच में नीचे लगी बैटरी में लगी थी। ट्रेन को बीना जंक्शन से पहले कुरवाई कैथोरा स्टेशन पर रोककर आग बुझाई गई थी। घटना की जांच रेलवे की छह सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी कर रही है। इसके अलावा टेक्निकल सेफ्टी ऑडिट भी जारी है। शुरुआती में जांच में घटना की वजह से शॉर्ट सर्किट या बैटरी की तकनीकी खामी को माना जा रहा है। इसके चलते रेलवे बोर्ड की ओर से सभी जोनों को देश में चलने वालीं सभी वंदे भारत ट्रेनों की बैटरी की जांच के निर्देश जारी किए गए हैं।
वंदे भारत के लिए अलग से बनाई गई है बैटरी
झांसी। लीथियम आयरन फॉस्फेट बैटरी खासतौर पर वंदे भारत के लिए डिजाइन की गई है। इसे मेधा नाम की कंपनी बनाती है। जबकि, अन्य ट्रेनों में लेड एसिड की बैटरी का इस्तेमाल किया जाता है। वंदे भारत के हर चार कोचों के बीच एक बैटरी लगी होती है। आकस्मिक स्थिति में वंदे भारत के किसी एक कोच को अलग नहीं किया जा सकता है। इसमें चार-चार कोच के ब्लॉक होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। भोपाल के रानी कमलापति स्टेशन से चलकर झांसी आ रही वंदे भारत की बैटरी में आग लगने की घटना के बाद अब सभी वंदे भारत ट्रेनों में लगी बैटरियों की जांच की जाएगी। इस संबंध में रेलवे बोर्ड की ओर से निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
सोमवार को रानी कमलापति स्टेशन से चलकर झांसी आ रही मध्य प्रदेश की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस के कोच सी-14 में आग लग गई थी। आग कोच में नीचे लगी बैटरी में लगी थी। ट्रेन को बीना जंक्शन से पहले कुरवाई कैथोरा स्टेशन पर रोककर आग बुझाई गई थी। घटना की जांच रेलवे की छह सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी कर रही है। इसके अलावा टेक्निकल सेफ्टी ऑडिट भी जारी है। शुरुआती में जांच में घटना की वजह से शॉर्ट सर्किट या बैटरी की तकनीकी खामी को माना जा रहा है। इसके चलते रेलवे बोर्ड की ओर से सभी जोनों को देश में चलने वालीं सभी वंदे भारत ट्रेनों की बैटरी की जांच के निर्देश जारी किए गए हैं।
विज्ञापन
वंदे भारत के लिए अलग से बनाई गई है बैटरी
झांसी। लीथियम आयरन फॉस्फेट बैटरी खासतौर पर वंदे भारत के लिए डिजाइन की गई है। इसे मेधा नाम की कंपनी बनाती है। जबकि, अन्य ट्रेनों में लेड एसिड की बैटरी का इस्तेमाल किया जाता है। वंदे भारत के हर चार कोचों के बीच एक बैटरी लगी होती है। आकस्मिक स्थिति में वंदे भारत के किसी एक कोच को अलग नहीं किया जा सकता है। इसमें चार-चार कोच के ब्लॉक होते हैं।
विज्ञापन