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बैंकों के ढाई अरब गए बट्टे खाते में, कोरोना काल में पड़ी बड़ी मार

Sat, 30 Oct 2021 01:15 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 30 Oct 2021 01:15 AM IST
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Banks' two and a half billion were written off, a big hit during the Corona period
झांसी। जिले में बैंकों की दो अरब 51 करोड़ 14 लाख 57 हजार रुपये की रकम बट्टे खाते में चली गई है। तमाम कोशिशों के बाद भी 34,351 कर्जदार बैंकों का ऋण नहीं चुका पा रहे हैं। इनमें से किसी ने व्यवसाय के लिए कर्ज लिया था, तो किसी ने बैंक से ऋण लेकर घर बनवाया था। ऋण अदायगी की प्रक्रिया कोरोना काल में सबसे ज्यादा बाधित हुई है।
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जनपद में बैंकों से 3,25,075 लोगों ने ऋण ले रखा है। नियमानुसार सभी ऋणधारकों को ऋण की अदायगी ब्याज समेत मासिक किस्त देकर करनी होती है। लगातार 90 दिनों तक बैंकों को रकम अदा न करने पर ऋण खाते को एनपीए (बट्टे खाते) में डाल दिया जाता है। जिले में 15 बैंकों के ऐसे 34,351 कर्जधारकों के खाते एनपीए में डाल दिए गए हैं। बैंकों पर सबसे बड़ी मार कोरोना काल में पड़ी है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि कुल एनपीए खातों में से 16,237 ऐसे हैं, जिन्हें मार्च 2020 के बाद इस सूची में डाला गया। इनमें बड़ी संख्या में व्यावसायिक ऋण हैं। इसके अलावा काफी संख्या में होम लोन, व्हीकल लोन के ऋण खाते भी बट्टे खाते में चले गए हैं। ऋण और ब्याज की वसूली के लिए बैंकों की ओर से कर्जदारों के दरवाजों पर लगातार दस्तक दी जा रही है, लेकिन हाथ खाली ही बने हुए हैं।
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केस - 1
लॉकडाउन में बंद हुई दुकान दुबारा नहीं खुली
झांसी। शहर के एक कपड़ा कारोबारी ने साल 2019 के आखिर में अपना कारोबार शुरू किया था। लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से शुरू किए गए व्यवसाय के लिए कारोबारी ने बैंक से 35 लाख रुपये का कर्ज लिया था। इससे पहले कि कारोबार जम पाता, कुछ ही महीनों बाद कोरोना की पहली लहर ने दस्तक दी, जिससे निपटने के लिए सरकारी को लंबा लॉकडाउन लागू करना पड़ा। इससे कारोबार बुरी तरह से टूट गया। लॉकडाउन में बंद हुई दुकान के दुबारा ताले नहीं खुल पाए और बैंक का कर्ज फंस गया।
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केस - 2
कमाऊ सदस्य की मौत से कर्ज की अदायगी थमी
झांसी। डढ़ियापुरा मेें रहने वाले एक व्यक्ति ने 2017 में घर बनवाने के लिए बैंक से 22 लाख रुपये का कर्ज लिया था, जिसकी उसके द्वारा नियमित रूप से अदायगी भी की जा रही थी। लेकिन, कोरोना की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई। मृतक एक निजी कंपनी में काम करता था। उसके निधन से परिवार के पास आमदनी को कई जरिया नहीं रहा। इससे जुलाई के बाद से किस्तों की अदायगी नहीं हो पाई, जिससे बैंक ने होमलोन का उसका खाता एनपीए में डाल दिया।
केस - 3
दुकान बंद हो गई, कर्जदार मिल नहीं रहा
झांसी। मऊरानीपुर में रहने वाले एक व्यक्ति ने ग्वालियर रोड पर फेब्रीकेशन का काम शुरू किया था। इसके लिए बैंक से चार लाख रुपये का कर्ज लिया था। डेढ़ साल तक कर्ज की अदायगी भी की, लेकिन इसके बाद किस्तें आना बंद हो गईं। लंबे समय तक दुकान पर ताला डला रहा। इसके बाद दुकान मालिक ने दुकान अपने कब्जे में ले ली। जबकि, बैंक में दर्ज कराए गए पते पर अब वो व्यक्ति मिल नहीं रहा है। बैंक द्वारा पता करने पर पता चला कि अब वो व्यक्ति दिल्ली जाकर बस गया है। दुकान के लिए ली गईं मशीनें व अन्य सामान उसने बेच दिया है।

ऋण की वसूली के लिए कर्जधारकों से बैंक लगातार संपर्क कर रहे हैं। बावजूद, कर्ज की नियमित रूप से अदायगी नहीं हो रही है। लगातार 90 दिनों तक ब्याज व मूल रकम वापस न होने पर खाते एनपीए में डाल दिए गए हैं। वसूली के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
- अरुण कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक
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