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ठप रहा पांच सौ करोड़ का लेनदेन
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झांसी। बैंककर्मियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दूसरे दिन शनिवार को भी बैंक शाखाओं में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। बैंकों में कामकाज न होने से करीब पांच सौ करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। इस दौरान बैंककर्मियों ने सभा करके सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।
सभी बैंक शाखाओं में ताले लटके रहे। किसी भी शाखा में कोई वित्तीय कामकाज नहीं हुआ। वित्तीय कामकाज ठप होने से व्यापारियों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। उधर, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बैनर तले आंदोलित बैंककर्मियों ने सेंट्रल बैंक परिसर के बाहर सभा की। संयोजक अशोक महावर ने कहा कि सरकार वेतन समझौता लागू करने से हिचक रही है। 30 जनवरी को साढ़े तेरह प्रतिशत बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव दिया लेकिन यह कर्मचारियों की मांग के मुताबिक नहीं है। कर्मचारियों ने सरकार की भूमिका पर रोष जताते हुए पूर्व की शर्तो को लागू न करने का आरोप लगाया। जिला मंत्री भान सिंह कुशवाहा ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि दो दिनी हड़ताल में करीब पांच सौ करोड़ का नुकसान हो चुका। जिला सचिव मान सिंह कुशवाहा ने कर्मचारियों के उत्पीड़न का आरोप लगाया। सहसंयोजक ज्ञानेंद्र मोहन ने सरकार पर एनपीए को कम करने के लिए कॉर्पोरेट घरानों पर रोक लगाने की मांग की। अध्यक्ष जेपी किलेदार ने कहा बैंक की शाखाएं बढ़ाई जा रहीं लेकिन नियुक्तियां नहीं हो रहीं। इस दौरान कर्मचारियों ने हड़ताल को सफल बनाने के लिए संकल्प लिया। सभा के दौरान सीपी सरावगी, राजेश सोनकर, बृजेंद्र श्रीवास्तव, वीरेंद्र कुशवाहा, अंकित सेठ, अजय कुशवाहा, प्रिया निगम, अंतरा घोष, निहारिका, अंजली, रतनलाल, रौनक जैन, रामानुज, वीरेंद्र, सुंदर राजन समेत अन्य उपस्थित रहे।
नकदी के लिए भटकते रहे लोग, व्यापारियों को भी परेशानी
हड़ताल के दूसरे दिन अधिकांश एटीएम मशीन खाली रहे। फिलिंग एजेंसी को करेंसी चेस्ट से पर्याप्त नोट न मिलने की वजह से कई एटीएम भरे ही नहीं गए। कुछ जगहों पर काम चलाने के लिए उनकी क्षमता से कम नोट डाले गए। इस वजह से नकदी के लिए लोगों को काफी परेशान होना पड़ा। बीकेडी चौराहे पर सेंट्रल बैंक, पीएनबी, एसबीआई के एटीएम बूथ समेत अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर एटीएम में पैसा नहीं मिला। उधर, व्यापारियों को भी नकदी समेत अपने दूसरे वित्तीय कामकाज के लिए परेशान होना पड़ा। तमाम सारे चेक क्लियर न होने की वजह से कई जगह माल भी फंसा हुआ है।
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सभी बैंक शाखाओं में ताले लटके रहे। किसी भी शाखा में कोई वित्तीय कामकाज नहीं हुआ। वित्तीय कामकाज ठप होने से व्यापारियों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। उधर, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बैनर तले आंदोलित बैंककर्मियों ने सेंट्रल बैंक परिसर के बाहर सभा की। संयोजक अशोक महावर ने कहा कि सरकार वेतन समझौता लागू करने से हिचक रही है। 30 जनवरी को साढ़े तेरह प्रतिशत बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव दिया लेकिन यह कर्मचारियों की मांग के मुताबिक नहीं है। कर्मचारियों ने सरकार की भूमिका पर रोष जताते हुए पूर्व की शर्तो को लागू न करने का आरोप लगाया। जिला मंत्री भान सिंह कुशवाहा ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि दो दिनी हड़ताल में करीब पांच सौ करोड़ का नुकसान हो चुका। जिला सचिव मान सिंह कुशवाहा ने कर्मचारियों के उत्पीड़न का आरोप लगाया। सहसंयोजक ज्ञानेंद्र मोहन ने सरकार पर एनपीए को कम करने के लिए कॉर्पोरेट घरानों पर रोक लगाने की मांग की। अध्यक्ष जेपी किलेदार ने कहा बैंक की शाखाएं बढ़ाई जा रहीं लेकिन नियुक्तियां नहीं हो रहीं। इस दौरान कर्मचारियों ने हड़ताल को सफल बनाने के लिए संकल्प लिया। सभा के दौरान सीपी सरावगी, राजेश सोनकर, बृजेंद्र श्रीवास्तव, वीरेंद्र कुशवाहा, अंकित सेठ, अजय कुशवाहा, प्रिया निगम, अंतरा घोष, निहारिका, अंजली, रतनलाल, रौनक जैन, रामानुज, वीरेंद्र, सुंदर राजन समेत अन्य उपस्थित रहे।
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नकदी के लिए भटकते रहे लोग, व्यापारियों को भी परेशानी
हड़ताल के दूसरे दिन अधिकांश एटीएम मशीन खाली रहे। फिलिंग एजेंसी को करेंसी चेस्ट से पर्याप्त नोट न मिलने की वजह से कई एटीएम भरे ही नहीं गए। कुछ जगहों पर काम चलाने के लिए उनकी क्षमता से कम नोट डाले गए। इस वजह से नकदी के लिए लोगों को काफी परेशान होना पड़ा। बीकेडी चौराहे पर सेंट्रल बैंक, पीएनबी, एसबीआई के एटीएम बूथ समेत अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर एटीएम में पैसा नहीं मिला। उधर, व्यापारियों को भी नकदी समेत अपने दूसरे वित्तीय कामकाज के लिए परेशान होना पड़ा। तमाम सारे चेक क्लियर न होने की वजह से कई जगह माल भी फंसा हुआ है।
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