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फ्रंट पर काम करने के बाद भी फ्रंटलाइन पर नहीं आ सके बैंककर्मी

Fri, 21 May 2021 01:52 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 21 May 2021 01:52 AM IST
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bank employees not come in frant line workers
झांसी। किसानों के हाथों तक सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली किसान सम्मान निधि पहुंचाना हो या मनरेगा मजदूरों को उनकी मजदूरी का भुगतान करना हो, आपदा के इस दौर में ये सभी मोर्चा बैंक कर्मचारी संभालते चले आ रहे हैं। इतना ही नहीं, अपने सामान्य ग्राहकों को भी वे सुचारु रूप से सेवाएं मुहैया करा रहे हैं। जिले के चार बैंक कर्मचारी कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आकर अपनी जान गवां चुके हैं, जबकि 200 से अधिक बैंक कर्मी संक्रमित हो चुके हैं। इसके बाद भी वे अपनी सेवाएं जारी रखे हुए हैं।
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कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रसार के लिए पिछले साल 25 मार्च से सरकार ने लॉकडाउन लागू किया था। ऐसे में बेरोजगार हुए लोगों के लिए सरकार की ओर एक हजार रुपये प्रतिमाह स्व निधि उपलब्ध कराई थी। साथ ही विधवा, वृद्धा पेंशन धारकों के बैंक खातों में भी पैसा पहुंचाया था। इसे लेने के लिए बैंक शाखाओं पर भीड़ उमड़ पड़ी थी। लंबी-लंबी कतारें नजर आने लगी थीं। आपदा के दौर में बैंक कर्मचारियों ने हर जरूरतमंद के हाथों में रकम पहुंचाई। अपनी ये सेवाएं वे लगातार देते आ रहे हैं। दो सौ से अधिक कर्मचारी व उनके परिवार के सदस्य संक्रमण की चपेट में आ चुके है। संक्रमण से मुक्त होते ही वे फिर से अपने काम में जुट जाते हैं। बावजूद इसके बैंक कर्मचारियों को फ्रंट लाइन वर्कर नहीं माना गया है। ज्यादातर बैंक कर्मचारियों को वैक्सीनेशन का इंतजार है। बैंक कर्मचारी संगठनों द्वारा लगातार प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन लगाने की मांग की जा रही है।
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आपदा के दौर में बैंक कर्मचारियों ने फ्रंट पर रहकर काम किया, परंतु उन्हें फ्रंटलाइन वर्कर नहीं माना गया। अलग से वैक्सीनेशन की व्यवस्था भी नहीं की गई। बैंक कर्मचारियों की सेवाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
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- अशोक कुमार महावर, संयोजक - यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस
सरकार को शुरुआत में ही शत- प्रतिशत बैंक कर्मचारियों के वैक्सीनेशन की व्यवस्था सुनिश्चित कर देनी थी, जिससे उनमें संक्रमण का खतरा नहीं रहता। वे और भी बेहतर ढंग से अपनी सेवाएं देते पाते।
- सुंदर राजन
बैंक कर्मचारियों का हर वर्ग के ग्राहकों से सीधा संवाद होता है। तमाम सावधानियां बरतने के बाद भी हर समय संक्रमण की चपेट में आने का खतरा बना रहता है। बैंकों में कैंप लगाकर वैक्सीनेशन किया जाना चाहिए।
- अखिलेश कुमार
सरकार की हर योजना को बैंक कर्मचारी पूर्ण पारदर्शी ढंग से अंजाम तक पहुंचाते आ रहे हैं। लेकिन, जब वैक्सीनेशन की बारी आई तो बैंक कर्मियों को भुला दिया गया। सरकार की ये नीति गलत है।
- मानवेंद्र सिंह
आए दिन बैंक कर्मचारियों के कोरोना संक्रमित होने के मामले सामने आते रहते हैं। कई की मौत भी हो चुकी है। कर्मचारियों में दहशत है। बावजूद, सभी कर्मचारी आपदा में भी अपनी सेवाएं सुचारु रूप से दे रहे हैं।
- अनुराग पाठक
ग्रामीण इलाकों में कोरोना बुरी तरह से फैला हुआ है। बगैर किसी डर के हमारे साथी ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित बैंक शाखाओं में काम सुचारु बनाए हुए हैं। सरकार की योजनाओं को आमजन तक पहुंचा रहे हैं।
- भानुप्रताप सिंह
फोटो...
बैंक कर्मचारियों की मुस्तैदी की वजह से लॉकडाउन में भी वित्तीय व्यवस्थाएं सुचारु रूप से चल रही हैं। खतरे के बाद भी बैंक कर्मचारी बखूबी अपने काम को अंजाम देते आ रहे हैं। लेकिन, सरकार ध्यान नहीं दे रही है।
- उमेश कुशवाहा
वैक्सीनेशन में बैंक कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी, ताकि सुरक्षा कवच के साथ वे अपने काम को अंजाम देते। हालांकि, अब भी सरकार अलग से योजना बनाकर बैंक कर्मियों का वैक्सीनेशन कराए।
- आम्रपाली
बैंक यूनियनों द्वारा सरकार से बैंक कर्मचारियों के शत प्रतिशत वैक्सीनेशन की मांग की जा रही है। लेकिन, अभी तक ये मांग अनसुनी ही की जाती रही है। जबकि, सरकार को इसे प्राथमिकता पर लेना चाहिए।

- अनिल कुमार
संक्रमण की चपेट में आकर कई बैंक कर्मचारियों की असमय मृत्यु हो चुकी है। तमाम बैंक कर्मी परिवार के साथ संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इस त्रासदी को ध्यान में रखते हुए सरकार को वैक्सीनेशन कराना चाहिए।
- एमके प्रजापति
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