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बदलेगा जमाना आज का नौजवान
Thu, 28 Mar 2019 01:09 AM IST
देवेंद्र कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Thu, 28 Mar 2019 01:09 AM IST
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nukkad natak, in jhansi
- फोटो : amar ujala, jhansi news
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विश्व रंगमंच दिवस पर भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) की ओर से रानी लक्ष्मीबाई पार्क में नुक्कड़ नाटक बदलेगा जमाना आज का नौजवान का मंचन हुआ। इसमें कलाकारों ने सामाजिक बदलाव के लिए देश की राजनीतिक स्थितियों को बेहतर बनाने पर जोर दिया।
कलाकारों ने मंचन में युवा बेरोजगारी की कठिन परिस्थितियों को भावुक तरीके से दिखाया। किस प्रकार से नौजवानों को मोबाइल और फिल्मों में फंसाकर उन्हें मौलिक जरूरतों से भटका दिया जाता है। ऐसे में नौजवान बेकारी और हताशा के शिकार होकर आत्महत्या कर लेते हैं। कलाकारों में अंशुल नामदेव, अमन नायक, शिवम कुमार वर्मा, अभिषेक कुमार अहिरवार, देव नामदेव, प्रियांशु गुप्ता ने नाटक के माध्यम से सभी दर्शकों को शपथ दिलाई कि वह लोकसभा चुनाव में साफ सुथरे प्रत्याशी को चुने। देश के भविष्य के लिए बाहुबल व जनबल से प्रभावित न हो। इस अवसर पर इप्टा के संरक्षक अर्जुन सिंह चांद और वरिष्ठ रंगकर्मी आदित्य रायकवार ने कहा कि जो संतुष्टि रंगमंच से मिलती है, वह फिल्मों से नहीं मिल पाती। रंगकर्मी बृजेश मौर्य और डॉ. शिव प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि रंग कर्मी आवाज की आवाज बने।
इप्टा के महासचिव डॉ. मुहम्मद नईम ने कहा कि रंगमंच ने भारतीय संस्कृति को जोड़ने का काम किया है। सभी धर्मों के कलाकारों ने अपना खून और पसीना से इसे सींचा है। इस अवसर पर अजय दुबे, संजय सतोइया, आशीष द्विवेदी, डॉ. उमेश कुमार मौजूद रहे।
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कलाकारों ने मंचन में युवा बेरोजगारी की कठिन परिस्थितियों को भावुक तरीके से दिखाया। किस प्रकार से नौजवानों को मोबाइल और फिल्मों में फंसाकर उन्हें मौलिक जरूरतों से भटका दिया जाता है। ऐसे में नौजवान बेकारी और हताशा के शिकार होकर आत्महत्या कर लेते हैं। कलाकारों में अंशुल नामदेव, अमन नायक, शिवम कुमार वर्मा, अभिषेक कुमार अहिरवार, देव नामदेव, प्रियांशु गुप्ता ने नाटक के माध्यम से सभी दर्शकों को शपथ दिलाई कि वह लोकसभा चुनाव में साफ सुथरे प्रत्याशी को चुने। देश के भविष्य के लिए बाहुबल व जनबल से प्रभावित न हो। इस अवसर पर इप्टा के संरक्षक अर्जुन सिंह चांद और वरिष्ठ रंगकर्मी आदित्य रायकवार ने कहा कि जो संतुष्टि रंगमंच से मिलती है, वह फिल्मों से नहीं मिल पाती। रंगकर्मी बृजेश मौर्य और डॉ. शिव प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि रंग कर्मी आवाज की आवाज बने।
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इप्टा के महासचिव डॉ. मुहम्मद नईम ने कहा कि रंगमंच ने भारतीय संस्कृति को जोड़ने का काम किया है। सभी धर्मों के कलाकारों ने अपना खून और पसीना से इसे सींचा है। इस अवसर पर अजय दुबे, संजय सतोइया, आशीष द्विवेदी, डॉ. उमेश कुमार मौजूद रहे।
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