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आयुर्वेद कॉलेज : पंच की जगह सिर्फ तीन ही कर्म

Tue, 04 Feb 2025 02:03 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 04 Feb 2025 02:03 AM IST
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Ayurveda College: Only three actions instead of punch

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अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। आयुर्वेद कॉलेज में पंचकर्म की ओपीडी रोजाना चलती है। इसमें औसतन 50 मरीज पंचकर्म के लिए आते हैं। संसाधनों के अभाव में रोगी के पांच कर्म की जगह तीन कर्म ही होते हैं। इसकी वजह टेक्निकल स्टॉफ और जरूरी संसाधनों का अभाव है।

आयुर्वेद चिकित्सा बताते हैं कि जब शरीर में वात, पित्त और कफ का असंतुलन होता है तो बीमारियां होती हैं। पेट साफ रहने से और टॉक्सिक (दोषों) के बाहर निकलने से बीमारी नहीं होती है। इसी वजह से कई गंभीर रोगियों को आयुर्वेद चिकित्सक पंचकर्म (वमन, विरेचन, निरूहवस्ती, अनुवासनवस्ती, नस्य) की सलाह दी जाती है। पंचकर्म से त्वचा रोग, मस्कुलर और मनोवैज्ञानिक समस्या, मधुमेह, पाचन विकार जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। यहां तीन कर्म वमन, विरेचन व नस्य ही कराए जाते हैं।
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रोग के हिसाब से पंचकर्म सात से 21 दिन में होता है। पंचकर्म से पहले स्नेहन-स्वेदन (स्नेहन में पसीना निकलता है। औषधियुक्त काढ़े से भाप दी जाती है। स्वेदन में कपड़े, पत्थर या रेत से गर्मी दी जाती है) होता है। चूंकि पंचकर्म से दोषों को (टॉक्सिक) शरीर से निकालते हैं, इसलिए सावधानी की जरूरत होती है।
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0- ये होते हैं पंचकर्म

0- वमन: विशेष औषधियों का सेवन कराकर मुंह से दोषों को बाहर निकाला जाता है।



0-विरेचन : गुदा मार्ग से दोषों को बाहर निकाला जाता है।

0- नस्य : नाक के रास्ते औषधियों का प्रयोग किया जाता है।



0-निरूहवस्ती व अनुवासनवस्ती : यह कर्म गुदा द्वार से होता है। दोषों को बाहर निकाला जाता है।

0- वर्जन



आयुर्वेद कॉलेज में पंचकर्म से पहले स्नेहन-स्वेदन कराने की अच्छी व्यवस्था है। पंचकर्म का टेक्निकल स्टॉफ और पर्याप्त संसाधन न होने से तीन ही कर्म कराए जाते हैं। पांचों कर्म कराने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है, जिसका एस्टीमेट बनाकर शासन को भेज दिया है। शासन से स्वीकृति होने के बाद व्यवस्थाएं जुटाकर पूरा पंचकर्म कराया जाएगा। - डाॅ. रामकृष्ण राठौर, प्रधानाचार्य आयुर्वेद कॉलेज
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