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कोविड ने बढ़ाया बुदेलखंड में तुलसी, गिलोय और औषधीय पौधों की खेती का रकबा

Wed, 05 Aug 2020 11:47 AM IST
झांसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Wed, 05 Aug 2020 11:47 AM IST
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CoronaVirus cases leads to increase in ayurveda farming such as tulsi giloy in Bundelkhand
तुलसी की खेती - फोटो : सोशल मीडिया

कोविड प्रकोप के बाद जिस तेजी से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में तुलसी, अश्वगंधा, गिलोय जैसे औषधीय पौधों का इस्तेमाल शुरू हुआ है, उसका असर इनकी खेती पर भी देखने को मिल रहा है। 

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बुंदेलखंड, खास तौर से झांसी में तुलसी की खेती करने वाले किसानों के साथ ही रकबे में भी इजाफा हुआ है। तुलसी के साथ ही यहां मेंथी, एलोवेरा जैसी औषधीय महत्व के पौधे भी बड़ी मात्रा में उगाए जा रहे हैं। इनको बड़ी कंपनियां सीधे किसानों से अच्छी कीमत पर खरीद रही हैं।
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पिछले करीब छह माह से पूरा देश कोविड महामारी की चपेट में है। इस दौरान प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर खास जोर दिया जा रहा है। आयुर्वेद में तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा आदि को प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला माना गया है। 
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इस वजह से बाजार में इनकी मांग भी बढ़ी है। पिछले वर्ष ब्लॉक बंगरा, मऊरानीपुर, गौराठा में 400 किसानों ने तुलसी रोपी थी लेकिन अबकी बार इनकी संख्या बढ़ गई। 

उद्यान अधीक्षक भैरम सिंह के मुताबिक इस बार किसानों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। पिछले वर्ष करीब 600 हेक्टेयर में तुलसी लगाई गई थी लेकिन, इस बार यह रकबा करीब बीस फीसदी बढ़ गया।

बाहर की कई कंपनियां भी अपने स्तर पर इनका उत्पादन करा रही हैं। तुलसी की श्यामा एवं रामा प्रजाति की मांग सबसे अधिक है। तीन माह में इसकी फसल तैयार हो जाती है। इन दिनों जुलाई-सिंतबर के बीच फसल लगाई गई है। 

बुंदेलखंड में रामा प्रजाति की तुलसी की बोवाई अधिक हो रही। तुलसी का पत्ता समेत बीज, जड़, तना काफी उपयोगी होता है, इसलिए व्यवसायी किसानों को पूरे पौधे का दाम देते हैं। 

लागत के मुकाबले फायदा अधिक होने से किसान भी तुलसी लगाने में दिलचस्पी दिखाते हैं। अन्ना जानवर भी इस पौधे को नुकसान नहीं पहुंचाते, इस वजह से इनकी देखभाल की भी अधिक आवश्यकता नहीं पड़ती। 

इसी तरह अश्वगंधा, एलोवेरा एवं गिलोय का भी पिछले वर्ष के मुकाबले उत्पादन बढ़ गया है। इसी तरह मोंठ, चिरगांव में किसान पिपरमेंट अथवा मेंथा का भी व्यापक पैमाने पर उत्पादन कर रहे हैं।

औषधीय खेती के लिए सरकार भी करती है मदद

बुंदेलखंड में तुलसी एवं एलोवेरा के लिए किसानों की मदद की जाती है। उद्यान अधीक्षक भैरम सिंह के मुताबिक तुलसी उत्पादन के लिए किसानों को 13278 रुपये प्रति हेक्टेयर जबकि एलोवेरा के लिए 18 हजार रुपये की मदद की जाती है। उत्पादन के बाद कई कंपनियां किसानों से सीधे उत्पाद खरीदतीं हैं।

जैविक तुलसी पर अधिक जोर
महामारी के चलते तुलसी की बोवाई कंपनियों की ओर से भी अधिक कराई गई है। झांसी में कुछ जाने-माने ब्रांड की कंपनियां किसानों से सीधा संपर्क करके बोवाई कराती हैं। 
किसानों को कंपनियां ही बीज आदि उपलब्ध कराती हैं। किसानों का कहना है कि कंपनियों की ओर से जैविक तुलसी की मांग काफी अधिक बढ़ गई है। खेत में किसी प्रकार की खाद नहीं डाली जाती। तुलसी लगाने वाले किसानों को करीब 40 हजार रुपये प्रति एकड़ तक की कमाई हो जाती है।

बबीना ब्लॉक में बन रहा मॉडल गांव
औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए बबीना ब्लॉक के सरबो गांव को मॉडल गांव के तौर पर बनाया जा रहा। यहां किसानों को सिर्फ औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा। 

उद्यान विभाग की योजना के मुताबिक अधिक उत्पादन के बाद कंपनियों को सीधा किसान सीधा अपना उत्पाद बेचकर अधिक आय हासिल कर सकेगा। झांसी स्थित आयुर्वेद कंपनी ने इसके लिए अपनी दिलचस्पी दिखाई है। उद्वान अधीक्षक के मुताबिक अभी तक 60 किसानों ने अपना नामांकन कराया है।

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