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सावधान! कानपुर में पांव पसार रहा जीका वायरस, झांसी पर मंडराया खतरा
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झांसी। कानपुर में तेजी से पांव पसार रहे जीका वायरस को लेकर झांसी में भी अलर्ट हो गया है। अब यहां के संदिग्ध मरीजों के नमूने जांच के लिए पुणे भेजे जाएंगे। इस संबंध में शासन ने भी निर्देश दिए हैं। वायरस से सबसे ज्यादा खतरा गर्भवती महिलाओं को है। यदि वह संक्रमित हो जाती हैं तो बच्चे पर गंभीर असर पड़ सकता है।
जीका वायरस मुख्य रूप से एक संक्रमित मच्छर (एडीज इजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस) के काटने से लोगों में फैलता है। आमतौर पर बीमारी लक्षणों के साथ एक सप्ताह तक चलती है। यह हल्की होती है। कई लोगों में इसके लक्षण दिखाई भी नहीं देते हैं। लेकिन, अगर कोई गर्भवती महिला इससे संक्रमित हो जाती है तो उसके होने वाले बच्चे पर गंभीर असर पड़ सकता है। बच्चे को दिमागी बीमारी भी हो सकती है। इसके अलावा गर्भपात और मृत बच्चे के पैदा होने का भी खतरा रहता है। कई मामलों में संक्रमित को गुलियन बैरे सिंड्रोम भी होने का खतरा रहता है। अभी तक जीका वायरस का कोई इलाज नहीं है। सिर्फ डॉक्टरों की देखभाल में ही ठीक हुआ जा सकता है। साथ ही मच्छरों के काटने से बचकर और मच्छरों के प्रसार को रोककर इससे बचा जा सकता है। वहीं, कानपुर में लगातार सामने आ रहे जीका वायरस के मरीजों के बाद अब झांसी के सैंपल जांच के लिए पुणे भेजे जाएंगे।
इस तरह दूसरा व्यक्ति हो सकता संक्रमित
- जीका से संक्रमित से संबंध बनाने पर
- ब्लड ट्रांसफ्यूजन के जरिए
इनके लिए चिंताजनक
- किसी बीमारी से ग्रसित
- जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम है
- गर्भवती महिलाओं को
ये हैं लक्षण
- बुखार, सिरदर्द
- मांसपेशियों, जोड़ों में दर्द
- आंख का रंग लाल होना
- शरीर पर चकत्ते
ऐसे करें बचाव
- मच्छरों से बचें
- खूब पानी पीएं
- पूरी बाजू के कपड़े पहनें
- खुले में सोते हैं तो मच्छरदानी लगाएं
- बुखार, सिरदर्द होने पर जांच कराएं
जीका वायरस को लेकर स्वास्थ्य विभाग की तैयारी पूरी है। अब तक कोई भी संदिग्ध मरीज इस बीमारी का नहीं मिला है। लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत है। इसके जरिए जीका वायरस समेत डेंगू, मलेरिया से भी बचाव किया जा सकता है। - डॉ. विनोद यादव, जेडी हेल्थ।
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झांसी में अब तक जीका वायरस का कोई मरीज सामने नहीं आया है। अब संदिग्ध मरीजों के सैंपल भेजकर जीका वायरस की जांच कराई जाएगी। इस सीजन में डेंगू, मलेरिया भी फैला है। ऐसे में मच्छरों से बचाव कर कई बीमारियों से लोग बच सकते हैं। - डॉ. अनिल कुमार, सीएमओ।
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जीका वायरस मुख्य रूप से एक संक्रमित मच्छर (एडीज इजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस) के काटने से लोगों में फैलता है। आमतौर पर बीमारी लक्षणों के साथ एक सप्ताह तक चलती है। यह हल्की होती है। कई लोगों में इसके लक्षण दिखाई भी नहीं देते हैं। लेकिन, अगर कोई गर्भवती महिला इससे संक्रमित हो जाती है तो उसके होने वाले बच्चे पर गंभीर असर पड़ सकता है। बच्चे को दिमागी बीमारी भी हो सकती है। इसके अलावा गर्भपात और मृत बच्चे के पैदा होने का भी खतरा रहता है। कई मामलों में संक्रमित को गुलियन बैरे सिंड्रोम भी होने का खतरा रहता है। अभी तक जीका वायरस का कोई इलाज नहीं है। सिर्फ डॉक्टरों की देखभाल में ही ठीक हुआ जा सकता है। साथ ही मच्छरों के काटने से बचकर और मच्छरों के प्रसार को रोककर इससे बचा जा सकता है। वहीं, कानपुर में लगातार सामने आ रहे जीका वायरस के मरीजों के बाद अब झांसी के सैंपल जांच के लिए पुणे भेजे जाएंगे।
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इस तरह दूसरा व्यक्ति हो सकता संक्रमित
- जीका से संक्रमित से संबंध बनाने पर
- ब्लड ट्रांसफ्यूजन के जरिए
इनके लिए चिंताजनक
- किसी बीमारी से ग्रसित
- जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम है
- गर्भवती महिलाओं को
ये हैं लक्षण
- बुखार, सिरदर्द
- मांसपेशियों, जोड़ों में दर्द
- आंख का रंग लाल होना
- शरीर पर चकत्ते
ऐसे करें बचाव
- मच्छरों से बचें
- खूब पानी पीएं
- पूरी बाजू के कपड़े पहनें
- खुले में सोते हैं तो मच्छरदानी लगाएं
- बुखार, सिरदर्द होने पर जांच कराएं
जीका वायरस को लेकर स्वास्थ्य विभाग की तैयारी पूरी है। अब तक कोई भी संदिग्ध मरीज इस बीमारी का नहीं मिला है। लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत है। इसके जरिए जीका वायरस समेत डेंगू, मलेरिया से भी बचाव किया जा सकता है। - डॉ. विनोद यादव, जेडी हेल्थ।
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झांसी में अब तक जीका वायरस का कोई मरीज सामने नहीं आया है। अब संदिग्ध मरीजों के सैंपल भेजकर जीका वायरस की जांच कराई जाएगी। इस सीजन में डेंगू, मलेरिया भी फैला है। ऐसे में मच्छरों से बचाव कर कई बीमारियों से लोग बच सकते हैं। - डॉ. अनिल कुमार, सीएमओ।