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परीक्षा से पहले जिंदगी की जंग हारा अश्वनी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Mar 2017 12:33 AM IST
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परीक्षा से पहले जिंदगी की जंग हारा अश्वनी
- फोटो : demo
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महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के छात्र अश्वनी कुमार पैथालॉजी की आंतरिक परीक्षा देने के पहले ही जिंदगी की जंग हार गया। पिछले साल तीन विषयों में उसे सप्लीमेंट्री लगी थी, जिससे वह परेशान था। मिलनसार स्वभाग के अश्वनी की मौत के बाद उसके साथी सदमे में हैं। यहां तक कि शिक्षकों को भी विश्वास नहीं हो पा रहा है कि वह अब उनके बीच में नहीं है। कैंपस गमगीन है।
अश्वनी के दोस्तों ने बताया कि सभी से उसके संबंध अच्छे थे। उसको देखने और बातचीत करने पर कहीं से नहीं पता चलता था कि वह आत्मघाती कदम उठा सकता है। छात्रों ने बताया कि पिछले साल हुई एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री की परीक्षाओं में सप्लीमेंट्री लग गई थी। हालांकि, बाद में उसने पास कर ली थी। बृहस्पतिवार को होने वाली पैथालॉजी की परीक्षा को लेकर वह काफी तनाव में था। सूत्रों ने बताया कि अश्वनी दो दिन से ठीक से सोया भी नहीं था। उसने अपने एक साथी से कहा था कि उसकी परीक्षा की तैयारी नहीं हो पाई है। इसीलिए वह देर रात तक दोस्तों के साथ पढ़ाई करता रहा। जिन छात्रों ने उसके साथ पढ़ाई की जब उन्हें सुबह घटना की जानकारी हुई तो सबके होश उड़ गए। वह यकीन नहीं कर पा रहे थे कि जो सात घंटे पहले साथ बैठकर पढ़ रहा था, वो दोस्त अब उनके बीच नहीं है। पोस्टमार्टम हाउस पर कई छात्र-छात्राओं की आंख से आंसू भी निकल गए। शिक्षकों ने समझाकर छात्र-छात्राओं को हॉस्टल में भेज दिया।
रात तक हुआ परिजनों का इंतजार
घटना के बाद शव को पोस्टमार्टम हाउस में पहुंचा दिया गया था। मुंबई में रह रहे अश्वनी के भाई को कॉलेज प्रशासन ने घटना की सूचना फोन पर दे दी थी। रात तक पुलिस और कॉलेज अधिकारी परिजनों के आने का इंतजार करते रहे। अश्वनी के पिता का देहांत हो चुका है। मां बनारस में रहती हैं।
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एक सप्ताह तक टाली परीक्षाएं
अश्वनी की आत्महत्या के बाद माहौल को देखते हुए बृहस्पतिवार को होने वाली परीक्षा को प्राचार्य ने स्थगित कर दी गई। साथ ही तय किया गया है कि अब परीक्षाएं एक हफ्ते बाद होंगी। नए शेड्यूल के मुताबिक अब 15 से 23 मार्च तक होंगी।
काउंसलिंग सेल बनाई है
मेडिकल कॉलेज में लगातार हो रही आत्महत्याओं की घटना के मद्देनजर प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने हर दस छात्र पर एक प्रोफेसर को मेंटर बनाया है। उन्होंने बताया कि मेंटर लगातार छात्रों से मिलकर उनसे बात करते हैं। कोई भी समस्या बताने पर उसे दूर किया जाता है। इसके अलावा वार्डन, असिस्टेंट हर सप्ताह हॉस्टल जानकर समस्याएं सुनते हैं। वह भी बीच-बीच में राउंड लेते हैं। डा. सेंगर ने बताया कि अश्वनी ने न तो किसी शिक्षक और न ही उनसे किसी तनाव का जिक्र किया या शिकायत की।
वार्षिक परीक्षा के लिए इस इम्तिहान में शामिल होना जरूरी
मेडिकल कॉलेज में वार्षिक परीक्षा के पहले होने वाली टर्मिनल परीक्षा (आंतरिक परीक्षा) एक तरह से पूर्वाभ्यास मानी जाती हैं। इस परीक्षा में छात्र का बैठना अनिवार्य होता है। टर्मिनल परीक्षा के कुछ अंक वार्षिक परीक्षा में भी जोड़े जाते हैं। अगर इस परीक्षा में छात्र फेल हो जाता है तो भी उसे वार्षिक इम्तिहान में बैठने की अनुमति मिलती है, लेकिन यदि आंतरिक परीक्षा ही नहीं दी तो फिर वह वार्षिक परीक्षा में शामिल नहीं हो सकता। कयास लगाया जा रहा है कि अश्वनी की तैयारी अच्छी नहीं होने के कारण परीक्षा को लेकर वह बहुत तनाव में आ गया होगा। उसे लग रहा था कि वह वार्षिक परीक्षा में भी अच्छे अंक हासिल नहीं कर सकेगा। इसी के चलते उसने इतना बढ़ा कदम उठा लिया।
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अश्वनी के दोस्तों ने बताया कि सभी से उसके संबंध अच्छे थे। उसको देखने और बातचीत करने पर कहीं से नहीं पता चलता था कि वह आत्मघाती कदम उठा सकता है। छात्रों ने बताया कि पिछले साल हुई एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री की परीक्षाओं में सप्लीमेंट्री लग गई थी। हालांकि, बाद में उसने पास कर ली थी। बृहस्पतिवार को होने वाली पैथालॉजी की परीक्षा को लेकर वह काफी तनाव में था। सूत्रों ने बताया कि अश्वनी दो दिन से ठीक से सोया भी नहीं था। उसने अपने एक साथी से कहा था कि उसकी परीक्षा की तैयारी नहीं हो पाई है। इसीलिए वह देर रात तक दोस्तों के साथ पढ़ाई करता रहा। जिन छात्रों ने उसके साथ पढ़ाई की जब उन्हें सुबह घटना की जानकारी हुई तो सबके होश उड़ गए। वह यकीन नहीं कर पा रहे थे कि जो सात घंटे पहले साथ बैठकर पढ़ रहा था, वो दोस्त अब उनके बीच नहीं है। पोस्टमार्टम हाउस पर कई छात्र-छात्राओं की आंख से आंसू भी निकल गए। शिक्षकों ने समझाकर छात्र-छात्राओं को हॉस्टल में भेज दिया।
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रात तक हुआ परिजनों का इंतजार
घटना के बाद शव को पोस्टमार्टम हाउस में पहुंचा दिया गया था। मुंबई में रह रहे अश्वनी के भाई को कॉलेज प्रशासन ने घटना की सूचना फोन पर दे दी थी। रात तक पुलिस और कॉलेज अधिकारी परिजनों के आने का इंतजार करते रहे। अश्वनी के पिता का देहांत हो चुका है। मां बनारस में रहती हैं।
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एक सप्ताह तक टाली परीक्षाएं
अश्वनी की आत्महत्या के बाद माहौल को देखते हुए बृहस्पतिवार को होने वाली परीक्षा को प्राचार्य ने स्थगित कर दी गई। साथ ही तय किया गया है कि अब परीक्षाएं एक हफ्ते बाद होंगी। नए शेड्यूल के मुताबिक अब 15 से 23 मार्च तक होंगी।
काउंसलिंग सेल बनाई है
मेडिकल कॉलेज में लगातार हो रही आत्महत्याओं की घटना के मद्देनजर प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने हर दस छात्र पर एक प्रोफेसर को मेंटर बनाया है। उन्होंने बताया कि मेंटर लगातार छात्रों से मिलकर उनसे बात करते हैं। कोई भी समस्या बताने पर उसे दूर किया जाता है। इसके अलावा वार्डन, असिस्टेंट हर सप्ताह हॉस्टल जानकर समस्याएं सुनते हैं। वह भी बीच-बीच में राउंड लेते हैं। डा. सेंगर ने बताया कि अश्वनी ने न तो किसी शिक्षक और न ही उनसे किसी तनाव का जिक्र किया या शिकायत की।
वार्षिक परीक्षा के लिए इस इम्तिहान में शामिल होना जरूरी
मेडिकल कॉलेज में वार्षिक परीक्षा के पहले होने वाली टर्मिनल परीक्षा (आंतरिक परीक्षा) एक तरह से पूर्वाभ्यास मानी जाती हैं। इस परीक्षा में छात्र का बैठना अनिवार्य होता है। टर्मिनल परीक्षा के कुछ अंक वार्षिक परीक्षा में भी जोड़े जाते हैं। अगर इस परीक्षा में छात्र फेल हो जाता है तो भी उसे वार्षिक इम्तिहान में बैठने की अनुमति मिलती है, लेकिन यदि आंतरिक परीक्षा ही नहीं दी तो फिर वह वार्षिक परीक्षा में शामिल नहीं हो सकता। कयास लगाया जा रहा है कि अश्वनी की तैयारी अच्छी नहीं होने के कारण परीक्षा को लेकर वह बहुत तनाव में आ गया होगा। उसे लग रहा था कि वह वार्षिक परीक्षा में भी अच्छे अंक हासिल नहीं कर सकेगा। इसी के चलते उसने इतना बढ़ा कदम उठा लिया।