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Jhansi News: वर्षा ऋतु के आगमन का शुभ संदेश लेकर आया आषाढ़
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संवाद न्यूज एजेंसी
कोछाभांवर। गुरु की वंदना और वर्षा ऋतु के आगमन का शुभ संदेश लेकर आया आषाढ़ माह बृहस्पतिवार से प्रारंभ हो गया है। मां दुर्गा, भगवान जगन्नाथ जी की पूजा एवं गुरु की सेवा का आषाढ़ माह में विशेष महत्व है। पंचांग का चौथा महीना आषाढ़ का आध्यात्मिक एवं ज्योतिष शास्त्रों में बड़ा महत्व है। भगवान विष्णु की आराधना एवं गुप्त नवरात्र के व्रत तथा अनुष्ठान किए जाते हैं। धार्मिक विद्वानों के अनुसार आषाढ़ भगवान विष्णु का प्रिय महीना है। पौराणिक महत्व के मंदिरों और प्राचीन तीर्थों के दर्शन आषाढ़ में करना चाहिए। साथ ही जल, फल और अन्न का दान तथा माता पिता एवं गुरु की सेवा करने से जीवन में सुख समृद्धि में वृद्धि होती है। आषाढ़ माह में गुप्त नवरात्र, भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा, देवशयनी एकादशी, गुरु पूर्णिमा सहित कई अन्य त्योहार श्रद्धा एवं उल्लास से मनाएं जाएंगे। देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्षीरसागर में योग निंद्रा को चले जाएंगे और चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। एक स्थान पर रहकर साधु एवं संत स्वाध्याय तथा तप साधना करेंगे।
कोछाभांवर। गुरु की वंदना और वर्षा ऋतु के आगमन का शुभ संदेश लेकर आया आषाढ़ माह बृहस्पतिवार से प्रारंभ हो गया है। मां दुर्गा, भगवान जगन्नाथ जी की पूजा एवं गुरु की सेवा का आषाढ़ माह में विशेष महत्व है। पंचांग का चौथा महीना आषाढ़ का आध्यात्मिक एवं ज्योतिष शास्त्रों में बड़ा महत्व है। भगवान विष्णु की आराधना एवं गुप्त नवरात्र के व्रत तथा अनुष्ठान किए जाते हैं। धार्मिक विद्वानों के अनुसार आषाढ़ भगवान विष्णु का प्रिय महीना है। पौराणिक महत्व के मंदिरों और प्राचीन तीर्थों के दर्शन आषाढ़ में करना चाहिए। साथ ही जल, फल और अन्न का दान तथा माता पिता एवं गुरु की सेवा करने से जीवन में सुख समृद्धि में वृद्धि होती है। आषाढ़ माह में गुप्त नवरात्र, भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा, देवशयनी एकादशी, गुरु पूर्णिमा सहित कई अन्य त्योहार श्रद्धा एवं उल्लास से मनाएं जाएंगे। देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्षीरसागर में योग निंद्रा को चले जाएंगे और चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। एक स्थान पर रहकर साधु एवं संत स्वाध्याय तथा तप साधना करेंगे।