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गोवंश के लिए भूसा, पानी का इंतजाम किया जाए : एसडीएम
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गोवंश के लिए भूसा, पानी का इंतजाम किया जाए : एसडीएम
मोंठ। मंगलवार को नवीन तहसील सभागार में उपजिलाधिकारी राजकुमार ने गो संरक्षण समिति की बैैठक ली। गोशालाओं की दुर्दशा और गोवंश के खानपान में चल रही लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगर एक सप्ताह के अंदर गोशालाओं की व्यवस्था नहीं सुधरी तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी दंडित किए जाएंगे। गोवंश के लिए समुचित मात्रा में भूसा का इंतजाम हो। एसडीएम ने कहा कि गोशालाओं में भूसा. चारा, पानी की समुचित व्यवस्था, गोवंश को बैठने के लिए टीन सेट की व्यवस्था इंतजाम करने की जिम्मेदारी ग्राम के ग्राम पंचायत अधिकारी की है।
अगर इसमें लापरवाही बरती गई तो दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। ग्राम पंचायत अधिकारियों को निर्देशित दिए और कहा कि गोशालाओं में कोई भी जानवर भूखा एवं प्यासा ना रहे। जल्द गोशालाओं में भूसा और चारा का प्रबंध किया जाए। पशु चिकित्सा अधिकारी मोंठ ने बताया कि गो शालाओं का निरीक्षण करने जाते समय ना तो कोई रजिस्टर आदि बनाया जाता है और ना ही कोई मौके पर मिलता है। ग्रामों में किसी गोशालाओ में टीन सेट ही नहीं है। ग्राम चितगुवां, बुढेरा घाट और बेलमा में टीन सेट नहीं बना है। एसडीएम ने कहा कि खंड विकास अधिकारी नियमित रूप से गोशालाओं की मॉनिटरिंग करेंगे । इसके अलावा राजस्व कर्मियों को भी घरौनी को लेकर कार्य में तेजी लाने को कहा। घरौनी में सही तरीके से मिलान करें एवं घरौनी में मकान संख्या को सही दर्ज कर जांच करें। एसडीएम ने कहा कि कोविड-19 निगरानी समिति द्वारा घर-घर सत्यापन में सभी लोग सहयोग करे। बैठक में प्रशिक्षु एसडीएम सुनील कुमार गंगवार, तहसीलदार डॉक्टर लालकृष्ण, नायब तहसीलदार रोशनी सोलंकी, डॉ. राजीव, डॉ. राघवेंद्र सिंह, डॉ. आशीष गुप्ता, राममिलन शर्मा लिपिक नगर पालिका चिरगांव, राजीव कुमार यादव लिपिक नगर पंचायत मोंठ, संतोष कुमार ईओ समथर, श्रीराम शर्मा नगर पालिका समथर, राजस्व निरीक्षक हेमंत पटेल, लेखपाल जय हिंद सिंह यादव, मेराज अहमद, रोहित राज, मुक्तेश्वर पटेल, मयंक द्विवेदी, दामोदर, कृष्ण कुमार, दिव्यांशु मिश्रा, राघवेंद्र यादव मौजूद रहे।
ग्राम पंचायतों में बनाईं गई गोशालाएं खाली, सड़क पर गोवंश
लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी नहीं सुधर रहे हालात
अमर उजाला ब्यूरो
पूंछ। गोवंश के संरक्षण के लिए सरकार रुपये पानी की तरह बहा रही है लेकिन कर्मचारी सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। मोंठ ब्लॉक के पूँछ क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत चितगुवा, सिकंदरा, फतेहपुर स्टेट आदि ग्राम पंचायतों में गोशालाओं का हाल बुरा है। तार फेंसिंग पानी की व्यवस्था गोशालाओं में तो है लेकिन छाया के लिए टीन शेड का हाल बुरा है । खाने पीने की व्यवस्था नहीं है। गोवंशों को छुट्टा छोड़ दिया गया है, जबकि कागजों में सब कुछ ओके चल रहा है।
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पंचायत चुनाव के बाद गांव में नई सरकार बन गई है लेकिन गोशालाओं की हालत नहीं सुधरी है। गोवंश भूखे, प्यासे सड़क पर घूम रहे हैं जिसके कारण दुर्घटनाएं हो रही हैं जिनमें गोवंश की जान चली जाती है या गंभीर रूप से घायल होकर तड़प तड़प कर प्राण त्याग देती हैं। क्षेत्र के अंदर चार स्थाई गोशाला बनी हुई है। इसके अलावा एक दर्जन से अधिक अस्थाई गोशाला भी चल रही हैं लेकिन धरातल पर सब कुछ शून्य हैं। भूखे गोवंश लोगों के खेतों में घुस जाते हैं। गोवंश के लिए गोशालाओं में भूसे की व्यवस्था नहीं है। बरसात का सीजन प्रारंभ होने को है। खंड विकास अधिकारी के निर्देश के बाद भी ग्राम विकास अधिकारी एवं ग्राम प्रधान गोशालाओं के ऊपर ध्यान नहीं दे रहे हैं जबकि सरकार प्रत्येक गोवंश पर 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 900 रुपये माह खर्च करती है। लाखों रुपये ग्राम प्रधान एवं ग्राम विकास अधिकारी मिलकर जानवरों का भूसा खा रहे हैं। शीघ्र ही प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कड़े कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और बिगड़ सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों की लापरवाही कारण जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है जिन लोगों के पास गोशाला का जिम्मा है उनकी जांच कर कड़ी कार्रवाई करनी होगी तभी स्थिति सुधरेगी।
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मोंठ। मंगलवार को नवीन तहसील सभागार में उपजिलाधिकारी राजकुमार ने गो संरक्षण समिति की बैैठक ली। गोशालाओं की दुर्दशा और गोवंश के खानपान में चल रही लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगर एक सप्ताह के अंदर गोशालाओं की व्यवस्था नहीं सुधरी तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी दंडित किए जाएंगे। गोवंश के लिए समुचित मात्रा में भूसा का इंतजाम हो। एसडीएम ने कहा कि गोशालाओं में भूसा. चारा, पानी की समुचित व्यवस्था, गोवंश को बैठने के लिए टीन सेट की व्यवस्था इंतजाम करने की जिम्मेदारी ग्राम के ग्राम पंचायत अधिकारी की है।
अगर इसमें लापरवाही बरती गई तो दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। ग्राम पंचायत अधिकारियों को निर्देशित दिए और कहा कि गोशालाओं में कोई भी जानवर भूखा एवं प्यासा ना रहे। जल्द गोशालाओं में भूसा और चारा का प्रबंध किया जाए। पशु चिकित्सा अधिकारी मोंठ ने बताया कि गो शालाओं का निरीक्षण करने जाते समय ना तो कोई रजिस्टर आदि बनाया जाता है और ना ही कोई मौके पर मिलता है। ग्रामों में किसी गोशालाओ में टीन सेट ही नहीं है। ग्राम चितगुवां, बुढेरा घाट और बेलमा में टीन सेट नहीं बना है। एसडीएम ने कहा कि खंड विकास अधिकारी नियमित रूप से गोशालाओं की मॉनिटरिंग करेंगे । इसके अलावा राजस्व कर्मियों को भी घरौनी को लेकर कार्य में तेजी लाने को कहा। घरौनी में सही तरीके से मिलान करें एवं घरौनी में मकान संख्या को सही दर्ज कर जांच करें। एसडीएम ने कहा कि कोविड-19 निगरानी समिति द्वारा घर-घर सत्यापन में सभी लोग सहयोग करे। बैठक में प्रशिक्षु एसडीएम सुनील कुमार गंगवार, तहसीलदार डॉक्टर लालकृष्ण, नायब तहसीलदार रोशनी सोलंकी, डॉ. राजीव, डॉ. राघवेंद्र सिंह, डॉ. आशीष गुप्ता, राममिलन शर्मा लिपिक नगर पालिका चिरगांव, राजीव कुमार यादव लिपिक नगर पंचायत मोंठ, संतोष कुमार ईओ समथर, श्रीराम शर्मा नगर पालिका समथर, राजस्व निरीक्षक हेमंत पटेल, लेखपाल जय हिंद सिंह यादव, मेराज अहमद, रोहित राज, मुक्तेश्वर पटेल, मयंक द्विवेदी, दामोदर, कृष्ण कुमार, दिव्यांशु मिश्रा, राघवेंद्र यादव मौजूद रहे।
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ग्राम पंचायतों में बनाईं गई गोशालाएं खाली, सड़क पर गोवंश
लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी नहीं सुधर रहे हालात
अमर उजाला ब्यूरो
पूंछ। गोवंश के संरक्षण के लिए सरकार रुपये पानी की तरह बहा रही है लेकिन कर्मचारी सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। मोंठ ब्लॉक के पूँछ क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत चितगुवा, सिकंदरा, फतेहपुर स्टेट आदि ग्राम पंचायतों में गोशालाओं का हाल बुरा है। तार फेंसिंग पानी की व्यवस्था गोशालाओं में तो है लेकिन छाया के लिए टीन शेड का हाल बुरा है । खाने पीने की व्यवस्था नहीं है। गोवंशों को छुट्टा छोड़ दिया गया है, जबकि कागजों में सब कुछ ओके चल रहा है।
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पंचायत चुनाव के बाद गांव में नई सरकार बन गई है लेकिन गोशालाओं की हालत नहीं सुधरी है। गोवंश भूखे, प्यासे सड़क पर घूम रहे हैं जिसके कारण दुर्घटनाएं हो रही हैं जिनमें गोवंश की जान चली जाती है या गंभीर रूप से घायल होकर तड़प तड़प कर प्राण त्याग देती हैं। क्षेत्र के अंदर चार स्थाई गोशाला बनी हुई है। इसके अलावा एक दर्जन से अधिक अस्थाई गोशाला भी चल रही हैं लेकिन धरातल पर सब कुछ शून्य हैं। भूखे गोवंश लोगों के खेतों में घुस जाते हैं। गोवंश के लिए गोशालाओं में भूसे की व्यवस्था नहीं है। बरसात का सीजन प्रारंभ होने को है। खंड विकास अधिकारी के निर्देश के बाद भी ग्राम विकास अधिकारी एवं ग्राम प्रधान गोशालाओं के ऊपर ध्यान नहीं दे रहे हैं जबकि सरकार प्रत्येक गोवंश पर 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 900 रुपये माह खर्च करती है। लाखों रुपये ग्राम प्रधान एवं ग्राम विकास अधिकारी मिलकर जानवरों का भूसा खा रहे हैं। शीघ्र ही प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कड़े कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और बिगड़ सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों की लापरवाही कारण जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है जिन लोगों के पास गोशाला का जिम्मा है उनकी जांच कर कड़ी कार्रवाई करनी होगी तभी स्थिति सुधरेगी।