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मनकुआं गांव में सेना ने जेसीबी से मकान को तोड़ा
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बबीना। शुक्रवार को सुबह सात बजे ग्राम मनकुआं में सेना के जवानों ने जेसीबी से आदिवासी परिवार के मकान और सरकारी शौचालय को तोड़ दिया है। एकत्रित हुए ग्रामीणों के विरोध के बाद जवानों को कार्रवाई को रोकना पड़ा। सेना के अधिकारियों का कहना था कि जमीन का मुआवजा पहले ही कर दिया गया है। उधर, ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें सिर्फ खेत की जमीन का मुआवजा मिला था न कि घरों का।
दरअसल, सेना के द्वारा पिछले सप्ताह 12 परिवारों को जमीन खाली करने के लिए मकानों पर नोटिस चस्पा कर दिए थे। जिस पर ग्रामीणों ने जिले के आला अधिकारियों से मदद की गुहार भी लगाई थी। इस पर अधिकारियों द्वारा मामले की जांच कराने की बात कही गई थी। शुक्रवार को सुबह 7 बजे सेना के लगभग डेढ़ सौ जवान जेसीबी और गाड़ियां लेकर गांव में पहुंचे एवं मकानों का सामान बाहर फेंक कर जेसीबी चलाने लगे। इस दौरान ग्रामीण श्रीपथ सहारिया का मकान पल भर में टूट गया। इसी के साथ सरकारी शौचालय एवं बाउंड्रीवाल को भी तोड़ दिया गया। यह देखते हुए ग्रामीणों ने एकत्रित होकर सेना के खिलाफ नारेबाजी की और मकानों को घेर कर खड़े हो गए। तब सेना के जवानों को पीछे हटना पड़ा और सेना के अधिकारियों ने कुछ दिन का समय और जवान वापस चले गए। इसके बाद ग्रामीणों ने जिले के अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की लेकिन किसी भी अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका।
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दरअसल, सेना के द्वारा पिछले सप्ताह 12 परिवारों को जमीन खाली करने के लिए मकानों पर नोटिस चस्पा कर दिए थे। जिस पर ग्रामीणों ने जिले के आला अधिकारियों से मदद की गुहार भी लगाई थी। इस पर अधिकारियों द्वारा मामले की जांच कराने की बात कही गई थी। शुक्रवार को सुबह 7 बजे सेना के लगभग डेढ़ सौ जवान जेसीबी और गाड़ियां लेकर गांव में पहुंचे एवं मकानों का सामान बाहर फेंक कर जेसीबी चलाने लगे। इस दौरान ग्रामीण श्रीपथ सहारिया का मकान पल भर में टूट गया। इसी के साथ सरकारी शौचालय एवं बाउंड्रीवाल को भी तोड़ दिया गया। यह देखते हुए ग्रामीणों ने एकत्रित होकर सेना के खिलाफ नारेबाजी की और मकानों को घेर कर खड़े हो गए। तब सेना के जवानों को पीछे हटना पड़ा और सेना के अधिकारियों ने कुछ दिन का समय और जवान वापस चले गए। इसके बाद ग्रामीणों ने जिले के अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की लेकिन किसी भी अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका।
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