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पुरातत्व विभाग ने देखी ऐतिहासिक परकोटे की बदहाली
Thu, 30 May 2019 01:13 AM IST
देवेंद्र कुमार
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Thu, 30 May 2019 01:13 AM IST
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parkota jhansi
- फोटो : amarujala
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झांसी। नाला निर्माण के लिए ढहाए गए परकोटे के एक हिस्से की जांच के लिए बुधवार को राज्य पुरातत्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जांच में सामने आया कि मनमाने ढंग से (नगर निगम द्वारा) पुरातात्विक विरासत को नुकसान पहुंचाया गया है। विभाग की ओर से इसकी रिपोर्ट मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को दी गई है। अधिकारियों से परकोटे की मरम्मत कराने का अनुरोध किया गया है।
किले का परकोटा अनूठी पुरातात्विक विरासत है। इसका निर्माण मराठा शासनकाल में दो शताब्दी पहले किया गया था। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में ये परकोटा फिरंगी सेना के सामने ढाल बनकर खड़ा रहा था। लेकिन, ये लगातार खुर्दबुर्द होता जा रहा है। इस पर जगह-जगह कब्जे कर मकान और दुकानें बना ली गईं हैं। हद तो ये हो गई कि नाला निर्माण के लिए भांडेरी गेट के पास नगर निगम ने ही इसके एक हिस्से को जमींदोज कर दिया। नगर निगम की इस करतूत को अमर उजाला के 28 मई के अंक में प्रकाशित खबर ‘अंग्रेज ने नहीं, नगर निगम ने ढहा दिया झांसी का परकोटा’ के जरिये उजागर किया गया था। इस राज्य पुरातत्व विभाग ने स्वत: संज्ञान लिया है।
बुधवार को राज्य पुरातत्व विभाग की टीम क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे के नेतृत्व में भांडेरी गेट के पास उस स्थान पर पहुंची, जहां परकोटे की दीवार ढहाई गई है। टीम ने परकोटे के दोनों ओर का जायजा लिया। क्षेत्रीय पार्षद और आसपास के लोगों से जानकारी ली। पुरातत्व अधिकारी ने बताया कि जांच में सामने आया है कि परकोटे को मनमान ढंग से ढहाया गया है। इसमें व्यापक पैमाने पर लापरवाही बरती गई है। जबकि, नाले का पानी परकोटे की दीवार के इस ओर से उस ओर ले जाने के लिए जमीन की सतह में पाइप का इस्तेमाल किया जा सकता था। दीवार ढहाने की आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने बताया कि इसकी रिपोर्ट उन्होंने मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को दी है।
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1957 के शासनादेश का दिया हवाला
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी एसके दुबे ने बताया कि मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को दी गई रिपोट में उन्होंने 1957 के शासनादेश का हवाला दिया है। इस शासनादेश में स्पष्ट है कि यदि किसी पुरातात्विक इमारत को राजकीय संरक्षण प्राप्त नहीं है, तो उसे बचाने का दायित्व जिलाधिकारी का होता है। पुरातत्व अधिकारी ने बताया कि इसी नियम के तहत पूर्व में ऐतिहासिक इमारत दिगारा की गढ़ी में हो रहे खनन कार्य पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने रोक लगाई थी।
फोटो...
साहब! परकोटा बचाओ
झांसी। बुधवार को जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। दल के बुंदेलखंड प्रभारी डॉ. मधुपाल सिंह के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में बताया गया कि रानी लक्ष्मीबाई के गौरवपूर्ण इतिहास के चलते झांसी का किला इतिहास की महत्वपूर्ण इमारतों में से एक है। परकोटा इसी का हिस्सा है। लेकिन, अनदेखी के चलते ये अपने अस्तित्व से संघर्ष करता नजर आ रहा है। ज्ञापन के जरिये परकोटे को कब्जामुक्त कराकर इसका जीर्णोद्धार कराए जाने की मांग की गई। इस मौके पर प्रदीप रायकवार, अमर सिंह गहलोत, आशीष सिंह, डीएस पटेल, संतराम कोरी आदि मौजूद रहे।
बोले जनप्रतिनिधि
----------------
नाला के लिए परकोटे के उस छोटे उस हिस्से गिराना जरूरी था। अगर उसे नीचे से काटते तो वो भरभराकर गिर सकता था, जिससे जनहानि होती। जबकि, नाला चौड़ा करना भी जरूरी था, ताकि बारिश में जल भराव न हो। हालांकि, अब परकोटे को दुबारा उसका पुराना स्वरूप लौटा जाएगा। योजना में ये पहले से शामिल था।
- रामतीर्थ सिंघल, महापौर
पूरा मामला अभी संज्ञान में नहीं है। लेकिन, ये बात जरूर है कि परकोटा इतिहास की अनूठी विरासत है। ये स्वतंत्रता के प्रथम संग्राम का साक्षी है। इतिहास की इस विरासत को संरक्षित किया जाना चाहिए। नगर निगम को इस पर ध्यान देना चाहिए।
- अनुराग शर्मा, सांसद
ऐतिहासिक इमारतों से छेड़छाड़ नगर निगम की गंभीर लापरवाही है। जबकि, सरकारी तंत्र खुद ही विरासत को नेस्तनाबूद करेगा, तो अन्य कोई इसे क्यों बचाने चला। जिस किसी ने भी किले के इस परकोटे को नुकसान पहुंचाया है, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
- डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव, राज्यसभा सांसद
पुरातात्विक धरोहर को संरक्षित किया जाना तो दूर की बात, इसे नुकसान पहुंचाने का काम किया जा रहा है। किले के साथ-साथ परकोटे को भी पुरातात्विक संरक्षण में लिया जाना चाहिए। इसे इसका पुराना स्वरूप लौटना चाहिए। ये पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।
- प्रदीप जैन, पूर्व मंत्री
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किले का परकोटा अनूठी पुरातात्विक विरासत है। इसका निर्माण मराठा शासनकाल में दो शताब्दी पहले किया गया था। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में ये परकोटा फिरंगी सेना के सामने ढाल बनकर खड़ा रहा था। लेकिन, ये लगातार खुर्दबुर्द होता जा रहा है। इस पर जगह-जगह कब्जे कर मकान और दुकानें बना ली गईं हैं। हद तो ये हो गई कि नाला निर्माण के लिए भांडेरी गेट के पास नगर निगम ने ही इसके एक हिस्से को जमींदोज कर दिया। नगर निगम की इस करतूत को अमर उजाला के 28 मई के अंक में प्रकाशित खबर ‘अंग्रेज ने नहीं, नगर निगम ने ढहा दिया झांसी का परकोटा’ के जरिये उजागर किया गया था। इस राज्य पुरातत्व विभाग ने स्वत: संज्ञान लिया है।
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बुधवार को राज्य पुरातत्व विभाग की टीम क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे के नेतृत्व में भांडेरी गेट के पास उस स्थान पर पहुंची, जहां परकोटे की दीवार ढहाई गई है। टीम ने परकोटे के दोनों ओर का जायजा लिया। क्षेत्रीय पार्षद और आसपास के लोगों से जानकारी ली। पुरातत्व अधिकारी ने बताया कि जांच में सामने आया है कि परकोटे को मनमान ढंग से ढहाया गया है। इसमें व्यापक पैमाने पर लापरवाही बरती गई है। जबकि, नाले का पानी परकोटे की दीवार के इस ओर से उस ओर ले जाने के लिए जमीन की सतह में पाइप का इस्तेमाल किया जा सकता था। दीवार ढहाने की आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने बताया कि इसकी रिपोर्ट उन्होंने मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को दी है।
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1957 के शासनादेश का दिया हवाला
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी एसके दुबे ने बताया कि मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को दी गई रिपोट में उन्होंने 1957 के शासनादेश का हवाला दिया है। इस शासनादेश में स्पष्ट है कि यदि किसी पुरातात्विक इमारत को राजकीय संरक्षण प्राप्त नहीं है, तो उसे बचाने का दायित्व जिलाधिकारी का होता है। पुरातत्व अधिकारी ने बताया कि इसी नियम के तहत पूर्व में ऐतिहासिक इमारत दिगारा की गढ़ी में हो रहे खनन कार्य पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने रोक लगाई थी।
फोटो...
साहब! परकोटा बचाओ
झांसी। बुधवार को जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। दल के बुंदेलखंड प्रभारी डॉ. मधुपाल सिंह के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में बताया गया कि रानी लक्ष्मीबाई के गौरवपूर्ण इतिहास के चलते झांसी का किला इतिहास की महत्वपूर्ण इमारतों में से एक है। परकोटा इसी का हिस्सा है। लेकिन, अनदेखी के चलते ये अपने अस्तित्व से संघर्ष करता नजर आ रहा है। ज्ञापन के जरिये परकोटे को कब्जामुक्त कराकर इसका जीर्णोद्धार कराए जाने की मांग की गई। इस मौके पर प्रदीप रायकवार, अमर सिंह गहलोत, आशीष सिंह, डीएस पटेल, संतराम कोरी आदि मौजूद रहे।
बोले जनप्रतिनिधि
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नाला के लिए परकोटे के उस छोटे उस हिस्से गिराना जरूरी था। अगर उसे नीचे से काटते तो वो भरभराकर गिर सकता था, जिससे जनहानि होती। जबकि, नाला चौड़ा करना भी जरूरी था, ताकि बारिश में जल भराव न हो। हालांकि, अब परकोटे को दुबारा उसका पुराना स्वरूप लौटा जाएगा। योजना में ये पहले से शामिल था।
- रामतीर्थ सिंघल, महापौर
पूरा मामला अभी संज्ञान में नहीं है। लेकिन, ये बात जरूर है कि परकोटा इतिहास की अनूठी विरासत है। ये स्वतंत्रता के प्रथम संग्राम का साक्षी है। इतिहास की इस विरासत को संरक्षित किया जाना चाहिए। नगर निगम को इस पर ध्यान देना चाहिए।
- अनुराग शर्मा, सांसद
ऐतिहासिक इमारतों से छेड़छाड़ नगर निगम की गंभीर लापरवाही है। जबकि, सरकारी तंत्र खुद ही विरासत को नेस्तनाबूद करेगा, तो अन्य कोई इसे क्यों बचाने चला। जिस किसी ने भी किले के इस परकोटे को नुकसान पहुंचाया है, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
- डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव, राज्यसभा सांसद
पुरातात्विक धरोहर को संरक्षित किया जाना तो दूर की बात, इसे नुकसान पहुंचाने का काम किया जा रहा है। किले के साथ-साथ परकोटे को भी पुरातात्विक संरक्षण में लिया जाना चाहिए। इसे इसका पुराना स्वरूप लौटना चाहिए। ये पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।
- प्रदीप जैन, पूर्व मंत्री