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अंतिम व्यक्ति के उत्थान की सोचते थे स्वामी विवेकानंद, दीनदयाल उपाध्याय

Sun, 17 Jan 2021 01:50 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 17 Jan 2021 01:50 AM IST
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antim vyakti ke uthan ki sochte the swami vivekanand
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई ने राष्ट्रीय युवा सप्ताह के अंतर्गत शिक्षाविद डॉ. उमेश कुमार सिंह ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सपनों का भारत और ऋषि परंपरा व स्वामी विवेकानंद विषय पर एकल संगोष्ठी का आयोजन किया। इस दौरान स्वामी विवेकानंद की वर्तमान समय में आवश्यकता और भारत के विकास पर चर्चा की गई। डॉ. सिंह ने कहा कि स्वामीजी और दीनदयाल उपाध्याय दोनों लोग अंतिम व्यक्ति के उत्थान के विषय में सोचते थे।
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उन्होंने कहा कि दोनों का मानना था कि देश के अंतिम व्यक्ति के विकास के बिना देश का विकास नहीं हो सकता है। युवा किसी भी देश की अमूल्य संपत्ति होते हैं। युवाओं को अपने ज्ञान में वृद्धि के लिए निरंतर सोचना, पढ़ना व मनन करना चाहिए। युवाओं को चाहिए कि वे पुरातन पुस्तकों का अध्ययन करें और नए ज्ञान की खोज करें। यही वह मार्ग होगा, जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा दिया जा सकेगा। एनएसएस समन्वयक डॉ. मुन्ना तिवारी ने बताया कि स्वामी विवेकानंद जयंती को युवा सप्ताह के रूप में मनाया जा रहा है। इस दौरान डॉ. श्वेता पांडेय, डॉ. उमेश कुमार, डॉ. यतींद्र मिश्रा, डॉ. शुभांगी निगम, डॉ. बृजेश लोधी, डॉ. बीएस मस्तानिया, डॉ. शिल्पा मिश्रा, डॉ. प्रशांत मिश्रा मौजूद रहे।
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