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अनार में तितली, फल बेधक का प्रकोप ज्यादा

Tue, 11 Aug 2020 12:48 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 11 Aug 2020 12:48 AM IST
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Anar me titali fruit bedak prakop
झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में अनार की फसलों में होने वाली बीमारियों की रोकथाम के उपाए पर चर्चा हुई। कृषि विशेषज्ञ डॉ. सुंदर पाल व डॉ. प्रशांत जाम्भुलकर ने बताया कि अनार की फसल में तितली, फल बेधक, आटेदार कीड़ा, सफेद मक्खी, माहू कीट बहुत क्षति पहुंचाते हैं। इसमें तितली और फल बेधक का प्रकोप सबसे ज्यादा होता है।
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उन्होंने बताया कि इसकी तितलिया नील भूरे रंग की होती हैं और इनकी सुंडिया गहरे भूरे रंग की और शरीर छोटे-छोटे बालों से ढका होता है। सुंडिया से ये नए फलों में छेद बनाकर अंदर घुस जाती हैं और दानों को खाकर नष्ट कर देती हैं। अंतत: प्रभावित फल सड़कर नीचे गिर जाते हैं। फल बेधक कीट भी इसी तरह नुकसार पहुंचाते हैं। इनकी रोकथाम के लिए क्षतिग्रस्त फलों को एकत्रत्र करके मिट्टी में गहरा दबा देना चाहिए। बगीचे को खरपतवार रहित रखना चाहिए। फलों के बचाव के लिए पन्नी या कागज के छोटे थैलों में बांधना चाहिए। तीन से चार प्रकाश प्रपंच प्रति हेक्टेयर लगाने चाहिए। अनार में फूल बनते समय नीम के तेल का पांच प्रतिशत घोल बनाकर छिड़काव करें। डाईमेथोयट को पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
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