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अपनी धरती अपने लोग: इंदीवर की जिंदगी में दूसरी पत्नी रेनू के आते ही लग गई रोमांटिक गीतों की झड़ी

Wed, 30 Jun 2021 03:52 PM IST
पूजा त्रिपाठी ओमप्रकाश दुबे, अमर उजाला, झांसी
ओमप्रकाश दुबे, अमर उजाला, झांसी Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 30 Jun 2021 03:52 PM IST
सार

पार्वती की जिद से हारकर इंदीवर ने मुंबई की ही एक लड़की रेनू से शादी कर ली थी। उससे एक बेटा भी हुआ पर यह शादी भी लंबी नहीं चल सकी। इसी दौर में इंदीवर ने जो गीत लिखे उन्होंने तहलका मचा दिया...

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Amar Ujala special series lyricist indeevar wife paravati pressurize for second marriage then he wrote many romantic songs
गीतकार इंदीवर का घर और उन्हें याद करते साहित्यकार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झांसी के बरुआसागर के इंटर कालेज रोड पर स्थित फिल्म गीतकार इंदीवर का पैतृक मकान पहले ही मुफलिसी के जमाने में बिक चुका था, अब उनकी पत्नी पार्वती कस्बे के खांदी मोहल्ले में एक छोटे से मकान में रहकर अपने भाई धनीराम राय के साथ एक छोटी सी परचून की दुकान चलाकर जिंदगी बसर कर रहीं थीं। उधर इंदीवर अपने गीतों से देश में धूम मचा रहे थे, पर अचानक उनकी कलम से निकलने वाले दर्द भरे गीतों की जगह रोमांटिक गीतों ने ले ली थी।

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बरुआसागर के ही साहित्यकार अजित पुरोहित बताते हैं कि अस्सी के दशक के बाद, आओ मिल जाएं हम सुगंध और सुमन की तरह, एक हो जाएं चलो जान और बदन की तरह, होंठों से छू लो तुम मेरा गीत अमर कर दो, क्या खूब लगती हो, बड़ी सुंदर दिखती हो और प्यार हमारा अमर रहेगा याद करेगा जहां, तू मुमताज है मेरे ख्वाबों की मैं तेरा शाहजहां जैसे गीत इंदीवर की कलम से निकल रहे थे। यह बदलाव यूं ही नहीं था। पार्वती की जिद से हारकर इंदीवर ने मुंबई की ही एक लड़की रेनू से शादी कर ली थी। उससे एक बेटा भी हुआ पर यह शादी भी लंबी नहीं चल सकी। इसी दौर में इंदीवर ने जो गीत लिखे उन्होंने तहलका मचा दिया। युवाओं के लिए लिखा गया गीत रंभा हो हो, हरिओम हरि और डॉन फिल्म का गीत, ये मेरा दिल प्यार का दीवाना ने लोगों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। राकेश रोशन की फिल्म कामचोर का गीत तुम संग प्रीत लगाई सजना और फिरोज खान की फिल्म का गीत तेरे चेहरे में वो जादू है बिन डोर खिंचा आता हूं के अलावा कुर्बानी फिल्म के गीत लैला ओ लैला कैसी तू लैला तथा हम तुम्हें चाहते हैं ऐसे, मरने वाला कोई जिंदगी चाहता हो जैसे, क्या देखते हो सूरत तुम्हारी, जो तुमको हो पसंद वही बात करूंगा, तुम दिन को कहो रात तो मैं रात कहूंगा भी खूब पसंद किए गए। यह सिलसिला यहीं नहीं थमा फिल्म हिम्मतवाला के गीत नैनों में सपना, सपनों में सजना, सजना पे दिल आ गया और फिल्म मवाली के गीत झोपड़ी में चारपाई मानस बिना सूनी पड़ी को भी खूब शोहरत मिली।
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मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती..
बरुआसागर निवासी साहित्यकार डा. ओमप्रकाश दीक्षित बताते हैं कि इंदीवर को सिर्फ दर्द भरे नगमों या फिर रोमांटिक गीतों के लिए नहीं बल्कि राष्ट्रभक्ति के गीतों के लिए भी याद किया जाता है। उपकार फिल्म का गीत, मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती और फिल्म हिमालय की गोद का गीत, है प्रीत जहां की रीत, मैं गीत वहां के गाता हूं, भारत का रहना वाला हूं भारत की बात सुनाता हूं। यह आज भी राष्ट्रीय पर्वों  पर सुनाई देते हैं। इंदीवर जब बरुआसागर में रहा करते थे उस समय आजादी की लड़ाई के दौरान उन्होंने एक गीत लिखा था, ओ किरायेदार कर दे मकान खाली। इस गीत पर अंग्रेज सरकार ने उन्हें जेल भेज दिया था।
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जिंदगी का सफर एक ऐसा सफर, कोई जाना नहीं कोई समझा नहीं..
इंदीवर अब उम्र के आखिरी पड़ाव की ओर बढ़ रहे थे, इसकी झलक उनके गीतों में भी दिखने लगी थी। इसी दौरान उन्होंने गीत लिखा, जिंदगी का सफर एक ऐसा सफर कोई जाना नहीं, कोई समझा नहीं। मधुवन खुश्बू देता है सागर साहिल देता है, जीवन उसका जीवन है जो औरों को जीवन देता है। उनका एक बार फिर बरुआसागर से लगाव बढ़ा, 1998 में वे अपने घर आए तथा पार्वती से मिले और उन्हें हर माह डेढ़ हजार रुपये भी भेजने लगे। बरुआसागर से जाते समय उन्होंने अपनी पारो से वादा किया था कि वह अगले वर्ष झांसी महोत्सव में शिरकत करने आएंगे तो घर जरूर आएंगे पर विधाता के सामने किसकी चली, 27 फरवरी 1999 को इंदीवर इस दुनिया को छोड़कर चले गए और रह गए सिर्फ उनके यादगार नगमे।


मुकेश से लेकर किशोर तक सभी ने गाए गाने
इंदीवर के गानों को मुकेश, मन्ना डे, किशोर, रफी सभी ने गाए लता और आशा भोंसले ने भी इनके नगमों को आवाज दी। यूं तो उनके गीतों को लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, शंकर जय किशन ने भी संगीत दिया पर सबसे ज्यादा जोड़ी उनकी कल्याण जी आनंद जी के साथ जमी।

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