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एक ही एजेंसी को दे दिया पूरे ब्लॉक में सप्लाई का ठेका
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All block contract covid kin only one egency
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झांसी। बहुचर्चित कोरोना किट घोटाले में रोजना नए तथ्य सामने आ रहे हैं। एसआईटी की जांच में इन बिंदुओं के आने से घपलेबाजों की गर्दन फंसनी तय है। जिन कोरोना किट उपकरणों की आपूर्ति हुई उससे साफ मालूम चलता है कि न सिर्फ बाजार से ऊंचे दाम पर उपकरण खरीदे गए बल्कि उनकी केंद्रीय खरीद भी कराई गई। एक ही एजेंसी ने पूरे ब्लॉक में शामिल ग्राम पंचायतों तक किट की आपूर्ति की है।
कोरोना किट घपला उजागर होने के बाद इस मामले की जांच एसआईटी कर रही है। उपकरणों की खरीद के बाद जो सूची सामने आई है उसके मुताबिक झांसी की 496 ग्राम पंचायतों को कोविड उपकरणों की आपूर्ति के लिए आठ एजेंसियां बनाई गईं। इनमें से प्रत्येक एजेंसी को ब्लॉक वार ग्राम पंचायतें बांट दी गईं। अमर उजाला के हाथ आई सूची के मुताबिक नई दिल्ली स्थित फर्म को बामौर ब्लॉक के 66 ग्राम पंचायतों में उपकरण देने को कहा गया। इसी तरह नोएडा के पते पर पंजीकृत एजेंसी ने बड़ागांव ब्लॉक के सभी 47 ग्राम पंचायतों तक उपकरण पहुंचाए। नोयडा की ही दूसरी एजेंसी ने चिरगांव के 63, नई दिल्ली लाजपत नगर की एजेंसी ने बबीना के 56, ओखला नई दिल्ली की एजेंसी ने बंगरा के 59, दयानंद कॉलोनी, नई दिल्ली की एजेंसी ने गुरसराय के 72, नोयडा सेक्टर 63 में पंजीकृत एजेंसी ने मऊरानीपुर में 49 जबकि ईस्ट ऑफ कैलाश में पंजीकृत एजेंसी ने मोंठ ब्लॉक के सभी 67 ग्राम पंचायतों को यह किट सप्लाई की। एक एजेंसी के एक ब्लॉक के सभी ग्राम सभाओं में आपूर्ति करने से यह पूरी प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ गई जबकि प्रमुख सचिव की ओर से जारी शासनादेश में यह साफ लिखा गया था कि ग्राम पंचायतें इन उपकरणों की खरीद खुद के स्तर से करेंगी। इन एजेंसियों ने पूरे ब्लॉक में न सिर्फ एक साथ आपूर्ति करने का ठेका हथियाया बल्कि बाजार से तीन-चार गुने अधिक कीमत के बिल-वाउचर भी थमा दिए। बता दें, बड़ी संख्या में प्रवासी मजूदरों के वापस लौटने पर सरकार ने सभी ग्राम पंचायतों को कोविड किट खरीदने के निर्देश दिए थे लेकिन, कई जगहों पर मनमाने दाम पर इनकी खरीद की गई। पूरे प्रदेश में झांसी में सबसे अधिक कीमत पर इस किट की खरीद की गई। इस पूरे मामले की जांच एसआईटी की ओर से की जा रही है।
सवालों के घेरे में आला अफसर
बहुचर्चित कोविड किट घोटाले में पंचायती राज विभाग के अफसरों के साथ ही जनपद के एक आला अफसर भी सवालों के घेरे में हैं। प्रशासनिक अमले के बीच यह चर्चा तेजी से चल रही है। चर्चा के मुताबिक इतने बड़े घोटाले का अंजाम देना सिर्फ पंचायती राज विभाग के अधिकारी के बस की बात नहीं बल्कि उसके पीछे आला अफसर का भी संरक्षण हासिल है हालांकि उनके नाम को लेकर प्रशासनिक अफसर भी चुप्पी साध जा रहे हैं।
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कोरोना किट घपला उजागर होने के बाद इस मामले की जांच एसआईटी कर रही है। उपकरणों की खरीद के बाद जो सूची सामने आई है उसके मुताबिक झांसी की 496 ग्राम पंचायतों को कोविड उपकरणों की आपूर्ति के लिए आठ एजेंसियां बनाई गईं। इनमें से प्रत्येक एजेंसी को ब्लॉक वार ग्राम पंचायतें बांट दी गईं। अमर उजाला के हाथ आई सूची के मुताबिक नई दिल्ली स्थित फर्म को बामौर ब्लॉक के 66 ग्राम पंचायतों में उपकरण देने को कहा गया। इसी तरह नोएडा के पते पर पंजीकृत एजेंसी ने बड़ागांव ब्लॉक के सभी 47 ग्राम पंचायतों तक उपकरण पहुंचाए। नोयडा की ही दूसरी एजेंसी ने चिरगांव के 63, नई दिल्ली लाजपत नगर की एजेंसी ने बबीना के 56, ओखला नई दिल्ली की एजेंसी ने बंगरा के 59, दयानंद कॉलोनी, नई दिल्ली की एजेंसी ने गुरसराय के 72, नोयडा सेक्टर 63 में पंजीकृत एजेंसी ने मऊरानीपुर में 49 जबकि ईस्ट ऑफ कैलाश में पंजीकृत एजेंसी ने मोंठ ब्लॉक के सभी 67 ग्राम पंचायतों को यह किट सप्लाई की। एक एजेंसी के एक ब्लॉक के सभी ग्राम सभाओं में आपूर्ति करने से यह पूरी प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ गई जबकि प्रमुख सचिव की ओर से जारी शासनादेश में यह साफ लिखा गया था कि ग्राम पंचायतें इन उपकरणों की खरीद खुद के स्तर से करेंगी। इन एजेंसियों ने पूरे ब्लॉक में न सिर्फ एक साथ आपूर्ति करने का ठेका हथियाया बल्कि बाजार से तीन-चार गुने अधिक कीमत के बिल-वाउचर भी थमा दिए। बता दें, बड़ी संख्या में प्रवासी मजूदरों के वापस लौटने पर सरकार ने सभी ग्राम पंचायतों को कोविड किट खरीदने के निर्देश दिए थे लेकिन, कई जगहों पर मनमाने दाम पर इनकी खरीद की गई। पूरे प्रदेश में झांसी में सबसे अधिक कीमत पर इस किट की खरीद की गई। इस पूरे मामले की जांच एसआईटी की ओर से की जा रही है।
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सवालों के घेरे में आला अफसर
बहुचर्चित कोविड किट घोटाले में पंचायती राज विभाग के अफसरों के साथ ही जनपद के एक आला अफसर भी सवालों के घेरे में हैं। प्रशासनिक अमले के बीच यह चर्चा तेजी से चल रही है। चर्चा के मुताबिक इतने बड़े घोटाले का अंजाम देना सिर्फ पंचायती राज विभाग के अधिकारी के बस की बात नहीं बल्कि उसके पीछे आला अफसर का भी संरक्षण हासिल है हालांकि उनके नाम को लेकर प्रशासनिक अफसर भी चुप्पी साध जा रहे हैं।
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