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बुंदेलखंड में फूलों की खेती कराएगा कृषि विश्वविद्यालय
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झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय बुंदेलखंड में सजावटी पौधों की पौध तैयार करेगा। प्रदेश सरकार की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत प्रोजेक्ट के लिए 65 लाख रुपये मिले हैं। इससे बुंदेलखंड में फूलों की संरक्षित खेती को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही किसानों को अतिरिक्त आय कमाने का भी मौका मिलेगा।
बुंदेलखंड में ज्यादातर फूलों की खेती खुले में की जाती है। जैसे गेंदा, गैलारडिया, देसी गुलाब आदि। यहां पर फूलों की संरक्षित खेती की काफी संभावनाएं हैं। इससे उच्च गुणवत्ता वाले फूलों का उत्पादन किया जाता है, जिससे अधिक मुनाफा मिलता है। प्रोजेक्ट की प्रभारी पुष्प विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रियंका शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय में हाईटेक पौली हाउस बनाए जाएंगे। इनमें महंगे फूलों जैसे जरबेरा, लिलियम, गुलाब, गुलदाउदी आदि की संरक्षित खेती होगी। किसानों को भी इस संबंध में जानकारी दी जाएगी। इसे बुंदेलखंड में एक मॉडल की तरह विकसित करेंगे। कट फ्लावर (फूलों की कलियां, जो सजावट में इस्तेमाल होतीं) के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले फूल बुंदेलखंड में ज्यादातर दिल्ली, भोपाल, इंदौर की फूल मंडियों से मंगवाए जाते हैं। मगर जल्द ही कृषि विश्वविद्यालय इसमें इस्तेमाल होने वाले गुलाब, जरबेरा, लिलियम, गुलदाउदी, करेन, मोगरा आदि फूल की नई किस्में झांसी में ही विकसित करेगा। डॉ. प्रियंका के मुताबिक संरक्षित खेती से किसान लगभग साल भर फूलों की खेती कर सकते हैं। ऐसे में ऑफ सीजन में भी फूल प्राप्त होंगे। साथ ही कम जमीन से ज्यादा आय भी कमा सकते हैं।
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बुंदेलखंड में ज्यादातर फूलों की खेती खुले में की जाती है। जैसे गेंदा, गैलारडिया, देसी गुलाब आदि। यहां पर फूलों की संरक्षित खेती की काफी संभावनाएं हैं। इससे उच्च गुणवत्ता वाले फूलों का उत्पादन किया जाता है, जिससे अधिक मुनाफा मिलता है। प्रोजेक्ट की प्रभारी पुष्प विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रियंका शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय में हाईटेक पौली हाउस बनाए जाएंगे। इनमें महंगे फूलों जैसे जरबेरा, लिलियम, गुलाब, गुलदाउदी आदि की संरक्षित खेती होगी। किसानों को भी इस संबंध में जानकारी दी जाएगी। इसे बुंदेलखंड में एक मॉडल की तरह विकसित करेंगे। कट फ्लावर (फूलों की कलियां, जो सजावट में इस्तेमाल होतीं) के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले फूल बुंदेलखंड में ज्यादातर दिल्ली, भोपाल, इंदौर की फूल मंडियों से मंगवाए जाते हैं। मगर जल्द ही कृषि विश्वविद्यालय इसमें इस्तेमाल होने वाले गुलाब, जरबेरा, लिलियम, गुलदाउदी, करेन, मोगरा आदि फूल की नई किस्में झांसी में ही विकसित करेगा। डॉ. प्रियंका के मुताबिक संरक्षित खेती से किसान लगभग साल भर फूलों की खेती कर सकते हैं। ऐसे में ऑफ सीजन में भी फूल प्राप्त होंगे। साथ ही कम जमीन से ज्यादा आय भी कमा सकते हैं।
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