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Jhansi News: हादसे के बाद कई घायलों का श्वसन मार्ग अवरुद्ध होने से आता हार्ट अटैक
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मेडिकल कॉलेज में कई विभागों के डॉक्टरों की आपातकालीन श्वसन मार्ग प्रबंधन कार्यशाला हुई। मुख्य आयोजक डॉ. अंशुल जैन ने बताया कि सड़क हादसे में घायल कई लोगों के गर्दन, मुंह आदि जगह गंभीर चोटें आने से श्वसन मार्ग अवरुद्ध हो जाता है। यदि समय पर ये मार्ग नहीं खोला गया तो तीन से पांच मिनट में घायल को हार्ट अटैक आ सकता है।
एनेस्थीसिया, मेडिसिन और रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग की ओर से हुई कार्यशाला में उन्होंने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य यह था कि कई विभागों के चिकित्सक आपातकालीन परिस्थितियों में श्वसन मार्ग की बुनियादी से लेकर उन्नत तकनीकों तक में पूरी तरह सक्षम हों। आपातकालीन श्वसन मार्ग प्रबंधन उन रोगियों के लिए बेहद जरूरी होता है, जो सड़क दुर्घटना, स्ट्रोक, सेप्सिस, बेहोशी या तीव्र श्वसन विफलता जैसी स्थिति में होते हैं। यदि इन परिस्थितियों में समय रहते श्वसन मार्ग को सुरक्षित नहीं किया जाए तो हाइपोक्सिया विकसित होकर दुर्दम्य हृदय गति रुकना (रिफ्रैक्टरी कार्डियक अरेस्ट) और मृत्यु का कारण बन सकता है।
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इसलिए हर विशेषज्ञ को अब श्वसन मार्ग की बुनियादी जानकारी और हस्तक्षेप करने की क्षमता होनी चाहिए। अब यह सिर्फ एनेस्थीसिया या इमरजेंसी का दायित्व नहीं रह गया है। कार्यशाला में सर्जरी, मेडिसिन, एनेस्थीसिया, ऑर्थोपेडिक, रेस्पिरेटरी और इमरजेंसी विभाग के चिकित्सकों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रधानाचार्य डॉ. मयंक सिंह ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र बांटे। इस दौरान कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉ. अनिल वर्मा, झांसी मेडिकल कॉलेज की डॉ. सेठी, डॉ. फहद, डॉ. चितरांगध गुप्ता मौजूद रहे।
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