फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   After coming to India, concerned about the friends trapped in Ukraine's Zafrozia

Ukraine Crisis : भारत आने के बाद यूक्रेन के जफरोजिया में फंसे साथियों की चिंता, नेता का बेटा भी घिरा

Mon, 28 Feb 2022 01:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा अजय उपाध्याय, तालबेहट (ललितपुर)
अजय उपाध्याय, तालबेहट (ललितपुर) Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 28 Feb 2022 01:33 AM IST
सार

जफरोजिया विश्वविद्यालय में करीब 1400 भारतीय छात्र पढ़ रहे। परिजनों के साथ रहते हुए फोन करके पूछ रहे साथियों की खैरियत। भाजपा नेता डॉ. दीपक चौबे का बेटा भी फंसा है यूक्रेन में। 

विज्ञापन
After coming to India, concerned about the friends trapped in Ukraine's Zafrozia
युद्ध के दौरान जवान। - फोटो : PTI

विस्तार

रूस और यूक्रेन के बीच चल रही वर्चस्व की जंग का सोमवार को पांचवां दिन है। छह दिन पहले यूक्रेन छोड़कर अपने गृह नगर तालबेहट आए मेडिकल छात्र योगेश झा यूक्रेन में फंसे अपने साथियों के लिए चिंतित हैं। उन्होंने बताया कि रविवार को जफरोजिया रीजन में रूसी सेना के टैंक के सड़कों पर घूमने से भारतीय साथी काफी तनाव में हैं। वे अपनी जान की रक्षा के लिए बंकरों में छिपे हुए हैं। उनके पास खाने की सामग्री की कमी हो गई है। ऐसे में वह परिजनों के साथ रहते हुए मोबाइल से उनकी भी खैरियत ले रहे हैं।

विज्ञापन


 रूस और यूक्रेन के मध्य कुछ दिनों से चल रहे तनाव के बाद नगर के गंज में निवासी डॉ. योगेश झा 22 फरवरी को अपने पिता डॉ. हरिश्चंद्र और माता आशा देवी के कहने पर वहां से निजी खर्च पर अपने छह साथियों के साथ भारत आ गए  थे। 23 फरवरी को अपने घर आ गए थे।  योगेश झा ने बताया कि उनका संपर्क उस दिन से यूक्रेन में रहने वाले अपने साथियों से है। रविवार को रूसी सेना के टैंक कीव के अलावा जफरोजिया प्रांत की सड़कों पर घूमने लगे हैं। कुछ मिसाइलें भी वहां गिराई गई हैं। साथी बंकरों में छिपकर जान बचा रहे हैं। सायरन और मिसाइलों की आवाज सुन उनका दिल दहल जाता है। 
विज्ञापन


वहां से भारत वापस न आने वाले मित्र राजेश गवल, श्रीनसवा, सौरभ उपाध्याय, श्रवण ठाकुर आदि से बात हो रही है। कुछ साथी यूक्रेन की सीमा लबीब पहुंच गए हैं, जहां से वह भारत आने का प्रबंध कर रहे हैं। अपने घर में काफी लंबे समय बाद परिजनों के साथ समय व्यतीत करना अच्छा लग रहा है, लेकिन यूक्रेन में रह गए भारतीयों की चिंता उन्हें सता रही है। उन्होंने भारत सरकार से वहां के छात्रों को वापस लाने की मुहिम तेज करने की मांग भी की है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


लंदन से आई बहन, दोस्त पूछ रहे यूक्रेन का हाल
यूक्रेन से भाई के वापस आने की खबर सुनते ही कुछ दिन पहले लंदन से आए जीजा महेंद्र और बहन विजेता अपने भाई से मिलने तालबेहट आई। काफी वर्षों बाद छोटे भाई से मिलकर बहन प्रसन्न हो गई। वहीं बचपन के  मित्र रक्षपाल राहुल राठौर अपने मित्र के सकुशल वतन वापसी से प्रसन्न हैं। वह उनके साथ दिन में कई घंटे गुजार रहे हैं। उनसे यूक्रेन के वातावरण, वहां के लोगों के रहन सहन, खान पान, मौसम आदि के बारे में जानकारी ले रहे हैं।

यूक्रेन में फंसा ललितपुर का उत्कर्ष

After coming to India, concerned about the friends trapped in Ukraine's Zafrozia
उत्कर्ष चौबे - फोटो : amar ujala

यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा भाजपा नेता डॉ. दीपक चौबे का बेटा उत्कर्ष चौबे फंसा हुआ है। वह भारत आने के इंतजार में है। परिजन लगातार उसके संपर्क में हैं और उसे स्वदेश लाने के प्रयास कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने भी उससे संपर्क किया है।

भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय सहसंयोजक कानपुर बुंदेलखंड क्षेत्र एवं शहर के मोहल्ला चौबयाना निवासी डॉ.दीपक चौबे के बेटा उत्कर्ष चौबे यूक्रेन से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। इस वर्ष उसकी एमबीबीएस फाइनल ईयर है। वह इस समय यूक्रेन में ही फंसा हुआ है। 

उसके साथ में साथी लुधियाना निवासी मनप्रीत भी है। उत्कर्ष ने बताया कि उसने 26 फरवरी की फ्लाइट में 49, 500 रुपये खर्च कर बुकिंग भी की थी, लेकिन एयरपोर्ट पर बमबारी होने के चलते फ्लाइट रद्द हो गई थी। जिसके चलते वह अपने देश वापस नहीं लौट सका है। फ्लैट के ऊपर से फाइटर प्लेन निकलने पर वह सहम जाता है। हालांकि उसे फ्लैट के पास में ही कुछ दूरी पर बंकर भी मुहैया करा दिया गया है। हालात अधिक खराब होने या उसके आसपास बमबारी होने की स्थिति में वह बंकर में जा सकता है। उसके पिता और परिजन उसके लगातार संपर्क में हैं और रविवार को दोपहर में ही उससे बात भी हुई थी। जिस पर उत्कर्ष ने उन्हें वहां के हालातों के बारे में बताया। 

कई दिनों का खाने का सामान किया इकट्ठा
उत्कर्ष के पिता डॉ. दीपक चौबे ने बताया कि वह अपने बेटे से लगातार संपर्क में है। बेटे ने कई दिनों के खाने का इंतजाम कर ब्रेड, पोहा आदि सामान एकत्रित कर लिया है। हालांकि वहां पानी की कमी बताई गई है, जो किसी प्रकार मिल पा रहा है। उनके बेटे ने यह भी बताया कि जब उसने यूक्रकन की एंबेसी से बात की तो उन्होंने उसे बॉर्डर तक पहुंचने की बात कही, लेकिन बार्डर से पहले रास्ते में जगह-जगह बमबारी हो रही है, तो ऐसे में दिक्कत हो सकती है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed