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Jhansi News: अबान की माैत के बाद अली से मिलने नहीं पहुंचा कोई अपना

Sat, 12 Sep 2026 02:22 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2026 02:22 AM IST
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After Aban's death, no one close to him came to meet Ali.
अली अहमद
झांसी। करीब 11 महीने से झांसी जेल में बंद अली अहमद से छोटे भाई अबान की मौत के बाद मिलने के लिए कोई अपना नहीं पहुंचा है। हादसे में अबान की मौत को एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इस दौरान अली का कोई परिजन जेल में उससे मिलने नहीं आया। अली ने भी जेल प्रशासन को किसी नए रिश्तेदार का नाम मुलाकाती के तौर पर दर्ज कराने के लिए नहीं दिया है। फिलहाल उससे मिलने के लिए सिर्फ उसके वकील ही जेल पहुंच रहे हैं।
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दिवंगत माफिया अतीक अहमद का बेटा अली एक अक्तूबर 2025 से झांसी जेल में बंद है। उससे मिलने के लिए उसका छोटा भाई अबान नियमित रूप से प्रयागराज से झांसी आता था। अबान अब तक 30 से अधिक बार जेल में अली से मुलाकात कर चुका था। अली अपनी पसंद की चीजें भी अक्सर अबान से ही मंगवाता था।
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छह अगस्त को भी अबान अली से मिलने के लिए झांसी आ रहा था। झांसी-कानपुर हाईवे पर पूंछ के खिल्ली गांव के पास उसकी तेज रफ्तार कार सड़क किनारे बनी सहारा दीवार से टकरा गई थी। हादसे में अबान की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बाद से अली से मिलने के लिए परिवार का कोई सदस्य झांसी जेल नहीं पहुंचा है।
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अली को भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए प्रयागराज ले जाया गया था। इस दौरान उसने अपने मंझले भाई अहजम को भी झांसी जेल में आकर उससे मुलाकात करने से मना कर दिया था। इसके बाद भी उसने किसी अन्य रिश्तेदार का नाम मुलाकाती के तौर पर जेल प्रशासन को नहीं दिया।

वकील ही बने मुलाकात का सहारा
अबान की मौत के बाद बीते एक माह से अली से मिलने के लिए उसके वकील ही जेल पहुंच रहे हैं। परिवार का कोई सदस्य मुलाकात के लिए नहीं आया है। अली ने भी अब तक किसी रिश्तेदार को मुलाकाती के तौर पर दर्ज नहीं कराया है।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि अली ने अब तक किसी रिश्तेदार का नाम मुलाकाती के तौर पर दर्ज कराने के लिए जेल प्रशासन को नहीं दिया है। उससे मिलने आने वालों का बाकायदा रिकॉर्ड रखा जाता है। सुरक्षा के मद्देनजर मुलाकातियों की सूचना एलआईयू को भी दी जाती है।


अबान संभालता था अली से मुलाकात की जिम्मेदारी
अतीक अहमद का बड़ा बेटा उमर लखनऊ जेल में बंद है। उमर से मिलने के लिए उनका मंझला भाई अहजम जाता था, जबकि अली से मिलने की जिम्मेदारी अबान संभालता था। अबान तकरीबन हर सप्ताह अली से मिलने झांसी आता था। उसकी मौत के बाद से यह सिलसिला पूरी तरह थम गया है।
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