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रफीक बना राजकुमार तो अफसरी हुई अनीता: 17 साल बाद परिवार समेत हिंदू धर्म में वापसी, बंगाल में बन गए थे मुस्लिम

Sat, 26 Sep 2026 09:27 PM IST
विकास कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Published by: विकास कुमार Updated Sat, 26 Sep 2026 09:27 PM IST
सार

राजकुमार ने बताया कि अब वह पत्नी और बच्चों के साथ अपने गांव राजापुर में ही रहना चाहता है। उसे गांव में स्टील के गेट बनाने का काम मिल गया है। उसकी तीन बेटियों और चार वर्षीय बेटे का सरकारी स्कूल में दाखिला भी करा दिया गया है। 

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After 17 years Rajkumar embraced Hinduism again along with his wife and children
हिंदू धर्म अपनाने वाले पति पत्नी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

करीब डेढ़ दशक पहले पश्चिम बंगाल में इस्लाम धर्म अपनाने वाले रक्सा थाना क्षेत्र के राजापुर निवासी राजकुमार ने शनिवार को पत्नी और बेटे के साथ दोबारा हिंदू धर्म अपना लिया। श्री सिद्धेश्वर मंदिर में हवन-पूजन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के साथ धर्म वापसी की प्रक्रिया पूरी की गई। कुछ दिन पहले राजकुमार ने जिलाधिकारी को शपथपत्र देकर मूल धर्म में लौटने की जानकारी दी थी।

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17 साल पहले बंगाल में अपनाया इस्लाम
राजकुमार के अनुसार, उसने करीब 17 साल पहले पश्चिम बंगाल में मजदूरी करने के दौरान इस्लाम धर्म अपनाया था। धर्म परिवर्तन के बाद उसका नाम रफीक खान पुत्र सजीमुद्दीन निवासी विशनपुरा, थाना कालियाचक, जिला मालदा, पश्चिम बंगाल हो गया था। उसका दावा है कि काम के दौरान उसके साथियों ने उस पर इस्लाम अपनाने के लिए दबाव बनाया था। वर्ष 2013 में उसने मालदा निवासी अफसरी खातून से निकाह किया। उनकी तीन बेटियां और एक बेटा है।

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पिता का राशन कार्ड और पांचवीं की मार्कशीट दिखाई
कुछ समय पहले राजकुमार अपने परिवार के साथ झांसी लौट आया। यहां उसने नगर धर्माचार्य हरिओम पाठक से संपर्क किया। धर्माचार्य ने हिंदू धर्म में वापसी से पहले प्रशासन को इसकी सूचना देने की सलाह दी। इसके बाद राजकुमार ने 22 सितंबर को जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थनापत्र देकर हिंदू धर्म में वापसी की इच्छा जताई। उसने अपनी मूल पहचान के प्रमाण के रूप में पिता के राशन कार्ड और प्राथमिक विद्यालय की कक्षा पांच की अंकतालिका में दर्ज नाम का उल्लेख किया है।

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हवन-पूजन के बाद धर्म वापसी
पुलिस जांच के बाद शनिवार को श्री सिद्धेश्वर मंदिर में आचार्य राजीव पाठक के सान्निध्य में हवन-पूजन कराया गया। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद राजकुमार ने हिंदू धर्म अपनाया। उसकी पत्नी अफसरी खातून ने भी हिंदू धर्म अपनाकर अपना नाम अनीता रख लिया। 

कार्यक्रम में कौन-कौन था शामिल?
कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद, हिंदू जागरण मंच और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े लोग मौजूद रहे। इनमें विनोद अवस्थी, प्रदीप खरे, पुरुषोत्तम स्वामी, पीयूष रावत, विकास अवस्थी, रामकुमार मिश्र और अतुल मिश्रा शामिल रहे।
 

बारिश के कारण नहीं आ सकीं तीन बेटियां
राजकुमार ने बताया कि धर्म वापसी के कार्यक्रम में उसकी तीनों बेटियां बारिश के कारण नहीं आ सकीं। उसके अनुसार, वे कार्यक्रम में शामिल होने के लिए तैयार थीं, लेकिन तेज बारिश के कारण नहीं आ पाईं। राजकुमार का कहना है कि घर पर ही उन्हें गंगाजल और गोमूत्र पिलाया गया।

गांव में रहकर करेगा स्टील गेट बनाने का काम
राजकुमार ने बताया कि अब वह पत्नी और बच्चों के साथ राजापुर में ही रहना चाहता है। उसे गांव में स्टील के गेट बनाने का काम मिल गया है। उसकी तीन बेटियों और चार वर्षीय बेटे का सरकारी स्कूल में दाखिला भी कराया गया है। उसने बताया कि गांव में ही मकान बनाकर परिवार के साथ रहेगा।

बोला- बीडा से जमीन के बदले पैसा लेने का कोई लेना-देना नहीं
राजकुमार से जब पूछा गया कि वह करीब 1,200 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल से झांसी कहीं बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) में ली गई जमीन के बदले मिलने वाले मुआवजे के लिए तो नहीं आया है, तो उसने इससे इनकार किया। राजकुमार ने कहा कि वह अपने पुराने घर लौट आया है और अब परिवार के साथ यहीं रहना चाहता है। उसका कहना है कि बीडा से उसका कोई लेना-देना नहीं है।

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