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अमर उजाला अभियान का असर, अल्ट्रासाउंड केंद्रों के खिलाफ प्रशासन ने शुरू की जांच
Fri, 29 Nov 2019 06:29 PM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Fri, 29 Nov 2019 06:29 PM IST
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जांच करती टीम
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला की ओर से लिंग परीक्षण को लेकर चलाए गए अभियान का असर शुरू हो गया है। अल्ट्रासाउंड सेंटरों के खिलाफ प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच शुरू कर दी है।
अभी डीएम की ओर से गठित जांच समिति ने आवास विकास स्थित रोहन डायग्नोस्टिक सेंटर पर छापा मारा है। जहां रोहन डाइग्नोस्टिक सेंटर की अल्ट्रासाउंड मशीन सील कर दी गई है। सेंटर पर अवैध पोर्टेबल मशीन चलती हुई पकड़ी गई।
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अभी डीएम की ओर से गठित जांच समिति ने आवास विकास स्थित रोहन डायग्नोस्टिक सेंटर पर छापा मारा है। जहां रोहन डाइग्नोस्टिक सेंटर की अल्ट्रासाउंड मशीन सील कर दी गई है। सेंटर पर अवैध पोर्टेबल मशीन चलती हुई पकड़ी गई।
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पांच से दस हजार में पता कराएं लड़का है या लड़की, एजेंट सक्रिय
जांच करती टीम
- फोटो : अमर उजाला
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे जिले में लिंग परीक्षण का गोरखधंधा चल रहा है। इसके लिए बाकायदा एजेंट सक्रिय हैं। महज पांच से दस हजार रुपये में लिंग की जांच कराकर पता लगाया जा सकता है कि कोख में पल रहा लड़का है या लड़की। खास बात ये है कि जनपद में लिंग परीक्षण ज्यादातर बाहरी शहरों और राज्यों के लोगों का कराया जा रहा है। ताकि, शहर में इस खेल का ‘शोर’ सुनाई न हो।
जिले में 70-75 अल्ट्रासाउंड सेंटर चल रहे हैं। इनमें से कम से कम दस सेंटरों में लिंग परीक्षण का खेल चल रहा है। ठेका लेकर दूरदराज के लोगों को लिंग परीक्षण के लिए झांसी लाया जाता है। यहां ‘ग्राहक’ की एजेंट से मुलाकात कराई जाती है। इसके बाद एजेंट ‘ग्राहक’ को अपने सेटिंग वाले अल्ट्रासाउंड सेंटर पर ले जाता है।
जिस मशीन का स्वास्थ्य विभाग से पंजीकरण और ट्रैकर लगा होता है, उससे लिंग की जांच नहीं की जाती है। इस गोरखधंधा में लिप्त सेंटर दूसरी अल्ट्रासाउंड मशीन भी रखे रहते हैं, जिसमें ट्रैकर नहीं लगा होता है। उससे ही लिंग परीक्षण किया जाता है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के ढुलमुल रवैये की वजह से यह धंधा फल-फूल रहा है।
दस सेंटरों पर नहीं लगे ट्रैकर
शहर में संचालित दस अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर ट्रैकर तक नहीं लगे हैं। जबकि, बिना ट्रैकर के अल्ट्रासाउंड मशीन चलनी ही नहीं चाहिए। इसे स्वास्थ्य विभाग का लचर रवैया न कहें तो भला क्या कहें? इन सेंटरों को विभाग नोटिस जारी कर चुप्पी साध लेता है। किसी का भी लाइसेंस निरस्त नहीं किया गया। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
सात साल में सिर्फ एक युवक पकड़ा
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि पीएनडीटी एक्ट के तहत पिछले सात साल में लिंग परीक्षण में लिप्त सिर्फ एक युवक ही पकड़ा गया है। वह भी आठ दिन पूर्व हरियाणा पुलिस एक अल्ट्रासाउंड सेंटर से युवक को उठाकर ले गई है। हरियाणा में लिंग परीक्षण का मामला सामने आने के बाद पुलिस को झांसी का कनेक्शन मिला था। इसके बाद पुलिस युवक को पकड़कर अपने साथ ले गई।
अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर छापा मार अभियान चलाया जाएगा। जिन सेंटरों पर अल्ट्रासाउंड मशीन में ट्रैकर नहीं लगे हैं, उनको नोटिस दिया जाएगा। यदि कहीं पर भी लिंग परीक्षण होने की बात सामने आती है तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. जीके निगम, सीएमओ।
ये है कानून
जांच करती टीम
- फोटो : अमर उजाला
- गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 के तहत गर्भधारण पूर्व या बाद में लिंग चयन और जन्म से पहले कन्या भ्रूण हत्या के लिए लिंग परीक्षण कराना गुनाह है।
- भ्रूण परीक्षण के लिए सहयोग देना व विज्ञापन करना कानूनी अपराध है। इसके तहत तीन से पांच साल तक की जेल व दस हजार से एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
- गर्भवती स्त्री का जबरदस्ती गर्भपात करवाना अपराध है। ऐसा करने पर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
- धारा 313 के तहत गर्भवती महिला की मर्जी के बिना गर्भपात करवाने वाले को आजीवन कारावास या जुर्माने से भी दंडित किया जा सकता है।
- धारा 314 के तहत गर्भपात करने के मकसद से किए गए कार्यों से अगर महिला की मौत हो जाती है तो दस साल की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकता है।
- आईपीसी की धारा 315 के तहत शिशु को जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के बाद उसकी मृत्यु मकसद से किया गया कार्य अपराध है, इस पर दस साल की सजा या जुर्माना दोनों हो सकता है।
- भ्रूण परीक्षण के लिए सहयोग देना व विज्ञापन करना कानूनी अपराध है। इसके तहत तीन से पांच साल तक की जेल व दस हजार से एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
- गर्भवती स्त्री का जबरदस्ती गर्भपात करवाना अपराध है। ऐसा करने पर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
- धारा 313 के तहत गर्भवती महिला की मर्जी के बिना गर्भपात करवाने वाले को आजीवन कारावास या जुर्माने से भी दंडित किया जा सकता है।
- धारा 314 के तहत गर्भपात करने के मकसद से किए गए कार्यों से अगर महिला की मौत हो जाती है तो दस साल की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकता है।
- आईपीसी की धारा 315 के तहत शिशु को जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के बाद उसकी मृत्यु मकसद से किया गया कार्य अपराध है, इस पर दस साल की सजा या जुर्माना दोनों हो सकता है।