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काढ़े के बेहिसाब सेवन से हो सकते बीमार, नाक से खून आने से लेकर मुंह के छाले तक संभव

Thu, 30 Jul 2020 01:18 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2020 01:18 AM IST
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झांसी। कोरोना के दौर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए इन दिनों काढ़े का सेवन खूब बढ़ गया है। लोग इंटरनेट पर देखकर खूब मसाले डालकर काढ़ा बनाकर पी रहे हैं लेकिन यह खतरनाक हो सकता है। हर चीज का एक मानक होता है। ऐसे में बिना आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह लिए बेहिसाब मसालों का सेवन करने से नाक से खून आना, मुंह से छाले, पेट में जलन या दर्द, पेशाब में जलन, अपच और पेचिश की समस्या हो सकती है।
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कोई भी आयुर्वेदिक औषधि मौसम, प्रकृति, उम्र व स्थिति देखकर दी जाती है। आयुर्वेद के चिकित्सकों के मुताबिक इन दिनों लोग कोई भी चार-पांच चीजें जैसे काली मिर्च, सोंठ, दालचीनी, पीपली, गिलोय, हल्दी, अश्वगंधा मिलाकर काढ़ा बनाकर पी रहे हैं। ऐसे में अगर तासीर के हिसाब से काढ़े का गलत सेवन किया गया तो ये हानिकारक भी हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति बेहिसाब काढ़ा पी रहा है तो उसके शरीर में गर्मी बढ़ सकती है। चूंकि, आजकल गर्मियों का मौसम है, इसलिए गर्म तासीर के मसालों का काढ़ा सुबह-शाम पीने से आहार नली में छाले तक हो सकते हैं। वहीं, काढ़ा कफ को तो ठीक करता है लेकिन जिन लोगों को पित्त दोष है, उन्हें काढ़ा पीते समय सावधानी बरतनी चाहिए। कोशिश करें कि आपके काढ़े में ठंडी तासीर वाली चीजें शामिल हों। लौंग, लहसुन, दालचीनी और औषधियों के बेहिसाब सेवन से अल्सर, पेट दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
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इंटरनेट का एक फार्मूला सब के लिए ठीक नहीं
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए लोग इंटरनेट पर देखकर काढ़ा बना रहे हैं। बनने के बाद इसका सेवन करते हैं। एक, दो दिन काढ़ा पीने से इम्यूनिटी नहीं बढ़ती है। उसके लिए लाइफस्टाइल सुधारना जरूरी है। 40 मिनट व्यायाम करना होगा पर वो आसान नहीं, इसलिए बेहिसाब काढ़ा पी रहे हैं। हर किसी के लिए एक फॉर्मूला सही नहीं है। डॉक्टर हर व्यक्ति के हिसाब से माइक्रोन्यूट्रिएंट और उसकी मात्रा तय करते हैं।
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ये लक्षण दिखें तो काढ़ा पीना बंद करें
काढ़ा पीने के बाद अगर नाक से खून आना, मुंह से छाले, पेट में जलन या दर्द, पेशाब में जलन, अपच और पेचिश की समस्या दिखे तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए।
विटामिन-सी के ओवरडोज से हो सकती मरोड़, उल्टी
वयस्क पुरुष के लिए 90 मिलीग्राम और महिला के लिए 70 मिलीग्राम विटामिन सी प्रतिदिन काफी है। विटामिन-सी की अधिकता की वजह से पेट में मरोड़ और वॉमिट की षिकायत हो सकती है।

आयुर्वेद अंदाजा नहीं, सही मात्रा व दवाओं का मिश्रण
डॉक्टर ने जिस औषधि को जिस चीज के साथ लेने के लिए कहा गया है, उसी के साथ तय मात्रा में लेना जरूरी है। आयुर्वेद अंदाजे पर नहीं, सही मात्रा व सटीक मिश्रण पर काम करता है। किसी भी चीज की अधिकता से परेशानी हो सकती है। - डॉ. केदारनाथ यादव, प्रिंसिपल, आयुर्वेदिक कॉलेज।
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